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	<title>आयुर्वेदिक उपाय &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>आयुर्वेदिक उपाय &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>मायोपिया की समस्या से निपटने में असरदार साबित हो सकते हैं ये आयुर्वेदिक उपाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 May 2024 07:41:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[आयुर्वेदिक उपाय]]></category>
		<category><![CDATA[मायोपिया]]></category>
		<category><![CDATA[समस्या से निपटने]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="515" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6.jpg 515w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6-300x202.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 515px) 100vw, 515px" />आजकल बच्चे बाहर खेलने के बजाय मोबाइल लैपटॉप टीवी के साथ ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। जिस वजह से सेहत पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव देखने के मिल रहे हैं। इस आदत से बच्चे बचपन में ही मोटापे डायबिटीज जैसी और भी कई बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इनमें से एक मायोपिया भी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="515" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6.jpg 515w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6-300x202.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 515px) 100vw, 515px" />
<p>आजकल बच्चे बाहर खेलने के बजाय मोबाइल लैपटॉप टीवी के साथ ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। जिस वजह से सेहत पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव देखने के मिल रहे हैं। इस आदत से बच्चे बचपन में ही मोटापे डायबिटीज जैसी और भी कई बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इनमें से एक मायोपिया भी है। जिसमें दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं।</p>



<p>भारतीय बच्चों में मायोपिया तेजी से बढ़ती हुई एक गंभीर समस्या है। अध्य्यनों से पता चला है कि शहरी क्षेत्रों में 5 से 15 साल के बच्चों में मायोपिया की प्रॉब्लम 1999 में 4.44% से बढ़कर 2019 में 21.15% हो गई है। एक अनुमान के अनुसार भारत में 2050 तक 48% तक मायोपिया के मामले बढ़ सकते हैं। इसे लेकर पेरेंट्स को सतर्क होने की जरूरत है। </p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या है मायोपिया?&nbsp;</h2>



<p>मायोपिया, जिसे आमतौर पर निकट-दृष्टि दोष के रूप में जाना जाता है। इस बीमारी में आई बॉल यानी आंख की पुतली का आकार बढ़ जाता है। ऐसे में प्रतिबिंब रेटिना पर बनने के बजाय थोड़ा आगे बनता है। जिस वजह से दूर की चीजों के देखने में समस्या होती है। </p>



<h2 class="wp-block-heading">मायोपिया के लक्षण</h2>



<p>मायोपिया से जूझ रहे बच्चों में आंखों से पानी आना और सिरदर्द की समस्या सबसे आम है। इसके अलावा बार-बार पलकें झपकाना, दूर की चीजों को सही से न पढ़ पाना भी मायोपिया के लक्षण हैं।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading">मायोपिया से निपटने के आयुर्वेदिक उपाय</h2>



<p>कुछ आयुर्वेद उपाय निकट दृष्टि दोष सहित अन्य दूसरी आंखों से जुड़ी समस्याओं से भी निपटने में मददगार साबित हो सकते हैं। इसके लिए&#8230;</p>



<h2 class="wp-block-heading">1. हेल्दी डाइट लें</h2>



<p>हरी पत्तेदार सब्जियां के साथ गाजर, विटामिन सी से भरपूर फल, विटामिन ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड को अपनी डाइट में शामिल करें। जो शरीर के साथ आंखों को भी हेल्दी रखते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">2. त्रिफला और आंवला का सेवन</h2>



<p>त्रिफला, एक पारंपरिक आयुर्वेदिक फार्मूला है जिसमें तीन फल &#8211; अमलाकी (आंवला), बिभीतकी और हरीतकी शामिल हैं, जो आंखों को मजबूत बनाने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। त्रिफला चूर्ण और आंवले का सेवन करने से दृष्टि में सुधार और आंखों से जुड़ी समस्याओं को रोकने में मदद मिलती है।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading">3. हाइड्रेटेड रहें</h2>



<p>आंखों को हेल्दी रखने के लिए बॉडी को हाइड्रेट रखना भी जरूरी है। इससे ड्राई आई की प्रॉब्लम नहीं होती, जो मायोपिया के खतरे को बढ़ाने को बढ़ा सकता है। </p>



<h2 class="wp-block-heading">4. प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन कम करें</h2>



<p>प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम से कम करें, क्योंकि इनमें शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है। दूसरा यह सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाने का काम करते हैं, जिससे आंखों की हेल्थ पर असर पड़ता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">5.&nbsp;तर्पण चिकित्सा</h2>



<p>तर्पण, एक आयुर्वेदिक नेत्र देखभाल चिकित्सा है, जिसमें घी या तेल से आंखों को पोषण दिया जाता है। यह थेरेपी आंखों को चिकनाई देने, दृष्टि में सुधार करने, ड्राईनेस के साथ जलन को कम करने में मदद करती है। गर्मियों के दौरान यह चिकित्सा खासतौर से फायदेमंद होती है।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading">6. पंचकर्म थेरेपी</h2>



<p>यह उपचार आंखों के साथ शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है, जिससे आंखों की रोशनी में सुधार होता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">7. नेत्र बस्ती</h2>



<p>आंखों के चारों ओर गर्म औषधीय तेल लगाया जाता है, जिससे टिश्यू को पोषण मिलता है और दृष्टि में सुधार होता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">8. त्राटक</h2>



<p>यह एक ऐसा योग है जिसमें मोमबत्ती की लौ पर ध्यान केंद्रित करना होता है। इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।&nbsp;</p>



<p>इन आयुर्वेदिक उपायों की मदद से मायोपिया की समस्या को रोकने के साथ लक्षणों को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।&nbsp;</p>



<p>(डॉ. मंदीप सिंह बासु, डायरेक्टर, डॉ. बासु आई हॉस्पिटल से बातचीत पर आधारित)&nbsp;</p>
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		<title>आयुर्वेदिक उपाय से काफी हद तक कम कर सकते हैं फैटी लिवर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Feb 2024 09:32:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[आयुर्वेदिक उपाय]]></category>
		<category><![CDATA[फैटी लिवर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-2-2-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-2-2.jpg 753w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-2-2-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /> फैटी लिवर एक साइलेंट डिजीज़ है। फैटी लिवर वाले ज्यादातर लोगों में लंबे समय तक इसके कोई लक्षण ही नजर नहीं आते, लेकिन कुछ को लिवर बढ़ने की वजह से पेट के दाएं ओर दर्द का एहसास होता है। थकान, मतली और भूख न लगना इसके अन्य लक्षणों में शामिल है। अनहेल्दी डाइट और लाइफस्टाइल को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-2-2-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-2-2.jpg 753w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-2-2-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p><strong> </strong>फैटी लिवर एक साइलेंट डिजीज़ है। फैटी लिवर वाले ज्यादातर लोगों में लंबे समय तक इसके कोई लक्षण ही नजर नहीं आते, लेकिन कुछ को लिवर बढ़ने की वजह से पेट के दाएं ओर दर्द का एहसास होता है। थकान, मतली और भूख न लगना इसके अन्य लक्षणों में शामिल है। अनहेल्दी डाइट और लाइफस्टाइल को फैटी लिवर की सबसे बड़ी वजह माना जाता है। </p>



<p>फैटी लिवर की प्रॉब्लम लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने की वजह से होती है।&nbsp;समय रहते इसका इलाज न किया गया तो इससे लिवर डैमेज होने का भी खतरा हो सकता है। इसे ठीक करने के लिए डाइट पर ध्यान दें साथ ही यहां दिए गए आयुर्वेदिक उपाय भी है काफी मददगार।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आंवला</h2>



<p>विटामिन सी से भरपूर आंवला शरीर में जमी गंदगी को बाहर निकालने में बेहद असरदार है। शरीर में गंदगी इकट्टा होते रहने से शरीर बीमार होते जाता है। इसलिए समय-समय पर उसे डिटॉक्सीफाई करते रहना जरूरी है। आंवले के जूस के सेवन से फैटी लिवर की समस्या में काफी आराम मिलता है और साथ ही इसके होने का खतरा भी कम होता है। </p>



<h2 class="wp-block-heading">करी पत्ता</h2>



<p>करी पत्ते से सिर्फ खानपान का स्वाद ही नहीं बढ़ाया जा सकता, बल्कि इससे सेहत संबंधी कई समस्याओं से भी छुटकारा पाया जा सकता है। इसमें विटामिन ए और सी मौजूद होता है। साथ ही एंटीऑक्सीडेंट्स भी। करी पत्ते को खाने से भी फैटी लिवर की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। </p>



<h2 class="wp-block-heading">एलोवेरा</h2>



<p>एलोवेरा से स्किन और बालों को होने वाले फायदों के बारे में तो आपने जरूर सुना होगा, लेकिन आपको बता दें कि रोजाना थोड़ी मात्रा में इसके सेवन से लिवर की कार्यक्षमता भी सुधरती है और लिवर में जमी गंदगी बाहर निकल जाती है। सुबह खाली पेट आधा ग्लास एलोवेरा जूस पिएं। </p>



<h2 class="wp-block-heading">त्रिफला</h2>



<p>त्रिफला आयुर्वेद में एक जरूरी औषधि है, जिसका इस्तेमाल कई तरह के रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। त्रिफला में एंटी-इन्फ्लामेट्री और एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं, जो लिवर की सूजन दूर करने के साथ ही उसमें जमे जिद्दी फैट को भी दूर करते हैं। जिससे कई समस्याओं का खतरा टाला जा सकता है। त्रिफला के इस्तेमाल से बॉडी को डिटॉक्सीफाई करने में भी मदद मिलती है।&nbsp;&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>ये आयुर्वेदिक उपाय आँखों की देखभाल के लिए काम आएंगे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Radha Rajpoot]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Jun 2019 10:39:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[आँखों की देखभाल]]></category>
		<category><![CDATA[आयुर्वेदिक उपाय]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="275" height="183" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-27T160902.291.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />आँखों में कई तरह की परेशानी हो सकती है. ये मौसम के कारण इन्फेक्शन का शिकार भी हो सकती हैं. आंखों की देखभाल के लिए आपको कुछ तरीके अपनाने होंगे जिसके बारे बताने जा रहे हैं. धूल-मिट्टी और प्रदूषण के संपर्क ज्यादा होती हैं. इसलिए जरुरी है कि आप इनकी देखभाल अच्छे ढ़ंग से करें &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="275" height="183" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-27T160902.291.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><strong>आँखों में कई तरह की परेशानी हो सकती है. ये मौसम के कारण इन्फेक्शन का शिकार भी हो सकती हैं. आंखों की देखभाल के लिए आपको कुछ तरीके अपनाने होंगे जिसके बारे बताने जा रहे हैं. धूल-मिट्टी और प्रदूषण के संपर्क ज्यादा होती हैं. इसलिए जरुरी है कि आप इनकी देखभाल अच्छे ढ़ंग से करें ताकि इन्हें कई तरह की एलर्जी और इंफेक्शन से बचाया जा सके. प्रदूषण के कारण आपकी आँखों में बाहरी कण जा सकते हैं जो आपकी आँखों को शुष्क और इरिटेटेड बना देते हैं. इसके अलावा लंबे समय तक कंप्यूटर, फोन या लैपटॉप पर काम करने से भी आपकी आँखों को नुकसान पहुंचता है. इसलिए जरुरी है कि बाकी अंगों की तरह आप आँखों की देखभाल और इनके स्वास्थ्य पर भी उतना ही ध्यान दें. ऐसे में आप आयुर्वेद के अनुसार अपनी आँखों की देखभाल करें. आइए जानते हैं आँखों की देखभाल करने के लिए आयुर्वेदिक टिप्स.</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-249356 size-full" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-27T160902.291.jpg" alt="" width="275" height="183" /></p>
<p><strong>गुलाब जल</strong><br />
<strong>आँखों में इरिटेशन होने पर गुलाब जल आपको तुरंत राहत दे सकता है. इसे आप आई ड्रॉपर की मदद से इस्तेमाल कर सकते हैं. आँख में एक-दो बूंद गुलाब जल डालें. ध्यान रखें कि इसका तापमान सामान्य हो और इसमें कोई मिलावट ना हो.</strong></p>
<p><strong>कोल्ड कंप्रेस</strong><br />
<strong>आँखों में जलन के लिए यह तरीका काफी प्रभावी है. बर्फ के कुछ टुकड़ें एक सूती कपड़ें में लपेटकर इससे आँखों की सिंकाई करें. केवल साफ कपड़े का ही इस्तेमाल करें. इससे जलन कम हो जाती है.</strong></p>
<p><strong>टरमरिक आई ड्रॉप</strong><br />
<strong>आँखों में लालपन और सूजन होने पर आप टरमरिक आई ड्रॉप का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसे बनाने के लिए एक चम्मच हल्दी लेकर इसे दो कप पानी के साथ उबालें. जब पानी उबलकर आधा हो जाएं तो इसे आंच से उतार लें. अब इसे मलमल के कपड़े में पांच बार छानें. इस तरल का इस्तेमाल आईड्रॉप की तरह करें. आँखों में लालपन होने के क्या कारण हो सकते हैं, विस्तार में जानने के लिए क्लिक करें.</strong></p>
<p><strong>कैस्टर ऑयल</strong><br />
<strong>आँखों में सूखापन हो तो रात को सोने से पहले एक बूंद कैस्टर ऑयल आँखों में डाल लें. ध्यान रखें कि कैस्टर ऑयल में किसी तरह के प्रीजर्वेटिव ना हो. केवल शुद्ध कैस्टर ऑयल का ही इस्तेमाल करें.</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रदूषण से सेहत को बचाने में काम आएंगे अदरक, लहसुन, तुलसी, नीम, काली मिर्च, पढ़ें ये आयुर्वेदिक उपाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Hema Bisht]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Jun 2019 11:17:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[अदरक]]></category>
		<category><![CDATA[आयुर्वेदिक उपाय]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदूषण]]></category>
		<category><![CDATA[लहसुन]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="259" height="194" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-04T164204.601.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />इन दिनों लोग वातावरण में फैल रहे स्मॉग या वायु प्रदूषण से जूझ रहे हैं। स्मॉग के प्रदूषक तत्व सांस के जरिये हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होते हैं। ये कुछ समय बाद फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं। साथ ही हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="259" height="194" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-04T164204.601.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><article class="pht-post col-md-12" data-pagenumber-2290730="0">
<div class="entry-content col-md-12">
<div class="row">
<p><strong>इन दिनों लोग वातावरण में फैल रहे स्मॉग या वायु प्रदूषण से जूझ रहे हैं। स्मॉग के प्रदूषक तत्व सांस के जरिये हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होते हैं। ये कुछ समय बाद फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं। साथ ही हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, डायबिटीज, साइनोसाइटिस आदि स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। प्रदूषण से बचने के लिए जरूरी है कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो। प्रदूषण के अति सूक्ष्म तत्व, जिन्हें मेडिकल की भाषा में फ्री-रेडिकल्स बुलाया जाता है, को साफ करने के लिए शरीर को विषैले पदार्थों से मुक्त कराना जरूरी है।</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-241312 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-04T164204.601.jpg" alt="" width="776" height="581" /></p>
<p><strong>यह तभी होता है, जब आपका पाचन तंत्र अच्छी तरह काम कर रहा हो। आयुर्वेद के हिसाब से आपका पाचन तंत्र ठीक होगा तो शरीर में त्रिदोष- वात, पित्त और कफ कम होंगे, आव नहीं बनेगा, पाचन प्रक्रिया सुचारु चलेगी और खांसी-जुकाम, सांस लेने में दिक्कत नहीं होगी। वातावरण में फैले प्रदूषण का सामना करने और प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त करने के लिए आयुर्वेद दैनिक जीवन में अदरक, लहसुन, तुलसी, नीम, काली मिर्च, पीपली जैसी चीजें अपनाने पर बल देता है। आपको नाक को साफ रखने के लिए गाय के शुद्ध घी की एक-एक बूंद सुबह-शाम नाक में डालनी चाहिए। इससे सांस की नली साफ हो जाती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत नहीं होती और हानिकारक तत्व फेफड़ों तक नही पहुंचते। फेफड़ों को साफ करने में गुड़ बहुत फायदेमंद है। इसमें मौजूद आयरन हमारी धमनियों को भी साफ करता है, जिससे ब्लड में ऑक्सीजन की आपूर्ति तेज होती है और श्वास संबंधी दिक्कत कम होती है।</strong></p>
<p><strong> रोजाना 5 ग्राम गुड़ का सेवन करना चाहिए। रात को गर्र्म दूध के साथ सोते समय भी गुड़ ले सकते हैं। इसे दिन में कभी भी खा सकते हैं। चाहे तो चाय में गुड़ भी डाल सकते हैं और इसकी सहायता से तिल के लड्डू भी बना सकते हैं। रात को सोते समय त्रिफला ले सकते हैं। यह आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ पाचन तंत्र को भी सुचारु करने में मदद करेगा। एक चम्मच त्रिफला शहद, गुनगुने पानी या दूध के साथ ले सकते हैं। इसे शहद के साथ लेना ज्यादा फायदेमंद हैै। बच्चों के लिए त्रिफला का सिरप भी विशेषज्ञ के पास उपलब्ध होता है। जरूरतमंद बच्चे को सोते समय एक चम्मच सिरप दे सकते हैं। त्रिफला हमारे शरीर के तीन दोषों- वात, पित्त और कफ को सम प्रकृति में रखने में सहायक है। यानी ये दोष अगर बढ़े या घटे हुए हैं तो त्रिफला उन्हें संतुलित कर देता है। खट्टे फल जरूर लेने चाहिए। संतरा, नीबू,ऑरेंज जूस बहुत अच्छे होते हैं। ये हृदय के लिए भी अच्छे होते हैं।</strong></p>
<p><strong> दिन में दो बार अदरक की चाय पीना फायदेमंद है। आधा चम्मच अदरक के रस में आधा चम्मच शहद मिलाकर लें। अदरक इम्यूनिटी को बढ़ाती है और सांस से जुड़ी समस्याओं में फायदेमंद है गले में खराश महसूस हो रही हो तो अदरक का काढ़ा पिएं। एक गिलास में छोटा-सा अदरक का टुकड़ा बारीक काटकर, 4-5 पत्ते तुलसी और 2-3 दाने काली मिर्च के मिलाकर दो कप पानी में उबालें। पानी आधा रह जाए तो छानकर पी लें। ऐसा दिन भर में 2-3 बार करें। इससे गले की खराश कम होगी और श्वसन तंत्र दुरुस्त होगा। अगर बलगम की शिकायत है तो उस काढ़े में थोड़ा रॉक सॉल्ट मिला लें। पिसी काली मिर्च को शहद के साथ लेने से सीने में जमा कफ दूर होता है, सांस संबंधी समस्या से बचे रहेंगे। प्रदूषण से होने वाली समस्याओं से बचने के लिए एक गिलास दूध में 3 ग्राम या आधा छोटा चम्मच हल्दी मिलाकर जरूर पिएं। आप एक चम्मच शहद में 3 ग्राम हल्दी मिलाकर भी ले सकते हैं। तुलसी का जूस पिएं। पहले से बने-बनाए 10-15 मिलीलीटर तुलसी के जूस को पानी मिलाकर दिन में दो बार लें। यह आपकी सांस की नली या श्वसन तंत्र से प्रदूषक तत्व हटाने में सहायक है। चाहें तो घर में तुलसी के 5-6 पत्तों को पीस कर उसमें रस निकाल लें। इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर ले सकते हैं।</strong></p>
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<p><strong>3 ग्राम पीपली को शहद के साथ मिलाकर ज्यादा से ज्यादा 7 दिन ले सकते हैं, लेकिन इसे बच्चों को नही देना चाहिए। इससे सहज सांस लेने में मदद मिलती है। दिन में 2-3 चम्मच देसी घी फायदेमंद रहता है। घी शरीर के विषैले तत्वों को बाहर कर देता है। श्वसन-नली बंद है तो पिपरमिंट ऑयल की 2-3 बूंदें या यूकेलिप्टस ऑयल की 4-5 बूंदें डाल कर दिन में दो बार 5 मिनट के लिए भाप लेना फायदेमंद साबित होता है। नीम की पत्तियों को एक पतीले पानी में उबाल लें। इसे नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं। यह त्वचा पर जमे प्रदूषकों को हटाता है  और त्वचा को डिटाक्सिफाई करता है। संभव हो तो हफ्ते में 2-3 नीम की पत्तियां खा लें। नियमित रूप से फुल-बॉडी मसाज शरीर के लिम्फैटिक सिस्टम को स्वस्थ बनाता है। सर्दियों में सरसों, ऑलिव ऑयल से मसाज कर सकते हैं,गर्मियों में नारियल तेल अच्छा रहता है। इससे रक्त में जमा टॉक्सिक बाहर निकलते हैं।</strong></p>
<p><strong> रक्त संचार बेहतर होता है, ऑक्सीजन की आपूर्ति तेज होती है और शरीर की सफाई होती है। प्रदूषण से आंखों में होने वाली जलन में आंखों में गुलाब जल की बूंदें सुबह-शाम डाल सकते हैं। इससे आंखें साफ रहेंगी। खीरे या आलू के स्लाइस काट कर आंखों पर रख सकते हैं, इससे आंखों को ठंडक मिलेगी। प्रदूषण से आंखों में होने वाले सूखेपन या जलन से बचने के लिए आंखों को बार-बार ठंडे पानी से धोना चाहिए। इसके लिए एक और उपाय आजमा सकते हैं। रात को त्रिफला का पाउडर एक गिलास में भिगो कर रख दें, सुबह छान कर इस पानी से आंखें धोने से आंखों को आराम मिलेगा। बालों को प्रदूषण से बचाने के लिए संभव हो तो बाहर जाते हुए बाल ढक कर रखें। नहाने से एक घंटे पहले बालों की ऑयलिंग कर अच्छी तरह मसाज करें। ज्यादा देर तक तेल न लगा रहने दें, क्योंकि वह आपके बालों पर जमकर नुकसान पहुंचा सकता है। बाहर जाने पर साफ मास्क का इस्तेमाल करें। घर में एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें। एयर कंडीशनर को हाई टैम्परेचर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं, ताकि कमरे में तापमान ठीक रहे। घर की हवा बदलने के लिए सुबह-शाम 10 मिनट के लिए कूलर भी चला सकते हैं।</strong></p>
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