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	<title>आपातकाल &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>आपातकाल &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>अमेरिका के पूर्वी तट पर मंडरा रहा है तूफान इमेल्डा का खतरा, उत्तरी कैरोलिना में आपातकाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 06:55:21 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[आपातकाल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="336" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/rftghhhhhhh-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/rftghhhhhhh.jpg 861w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/rftghhhhhhh-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/rftghhhhhhh-768x417.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />तूफान इमेल्डा के कुछ दिनों में अमेरिका के पूर्वी तट से टकराने की आशंका है। 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। दक्षिण कैरोलिना के गवर्नर हेनरी मैकमास्टर ने निवासियों से सतर्क रहने का आग्रह किया है जबकि उत्तरी कैरोलिना में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी गई है। तूफान इमेल्डा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="336" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/rftghhhhhhh-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/rftghhhhhhh.jpg 861w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/rftghhhhhhh-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/rftghhhhhhh-768x417.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>तूफान इमेल्डा के कुछ दिनों में अमेरिका के पूर्वी तट से टकराने की आशंका है। 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। दक्षिण कैरोलिना के गवर्नर हेनरी मैकमास्टर ने निवासियों से सतर्क रहने का आग्रह किया है जबकि उत्तरी कैरोलिना में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी गई है।</p>



<p>तूफान इमेल्डा कुछ दिनों में अमेरिका के पूर्वी तट से टकरा सकता है। 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार में हवाएं चल रही हैं।</p>



<p>यह तूफान मध्य बहामास से लगभग 155 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम में या फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से लगभग 600 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में था। इमेल्डा 11 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर की ओर बढ़ रहा था।</p>



<p><strong>उत्तरी कैरोलिना में आपतकाल घोषित</strong><br>दक्षिण कैरोलिना के गवर्नर हेनरी मैकमास्टर ने निवासियों से सतर्क रहने का आग्रह किया है, जबकि उत्तरी कैरोलिना में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी गई है।</p>



<p><strong>बरमूडा के लिए बना खतरा</strong><br>मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि इमेल्डा के कारण तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है। इस बीच, तूफान हम्बर्टो शक्तिशाली श्रेणी 4 तूफान बना हुआ है, जो बरमूडा के लिए खतरा बना हुआ है।</p>
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		<title>&#8216;बीते 11 वर्षों से देश में अघोषित आपातकाल लागू&#8217;, कांग्रेस का केंद्र सरकार पर तीखा हमला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Jun 2025 05:33:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[आपातकाल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-25-105446-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-25-105446.png 731w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-25-105446-medium.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />कांग्रेस ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि बीते 11 वर्षों से देश में अघोषित आपातकाल लागू है। भारतीय लोकतंत्र पर व्यवस्थागत और खतरनाक तरीके से पांच गुना ज्यादा हमला किया जा रहा है, जिसे अघोषित आपातकाल कहना सही होगा। कांग्रेस ने दावा किया कि देश में बेलगाम नफरती &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-25-105446-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-25-105446.png 731w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-25-105446-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>कांग्रेस ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि बीते 11 वर्षों से देश में अघोषित आपातकाल लागू है। भारतीय लोकतंत्र पर व्यवस्थागत और खतरनाक तरीके से पांच गुना ज्यादा हमला किया जा रहा है, जिसे अघोषित आपातकाल कहना सही होगा। कांग्रेस ने दावा किया कि देश में बेलगाम नफरती भाषण दिए जा रहे हैं और नागरिक अधिकारों का दमन किया जा रहा है।</p>



<p>कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान जारी कर कहा कि &#8216;सरकार के आलोचकों को बदनाम किया जा रहा है। सत्ता में बैठे लोगों द्वारा नफरत और कट्टरता फैलाई जा रही है। प्रदर्शन करने वाले किसानों को खालिस्तानी करार दिया जा रहा है और जाति जनगणना की मांग करने वालों को शहरी नक्सली बताया जा रहा है।&#8217;</p>
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		<title>फ्रांस से आजादी की मांग कर रहे न्यू कैलेडोनिया में आपातकाल, टिकटॉक पर भी प्रतिबंध</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 May 2024 06:27:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[आजादी]]></category>
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		<category><![CDATA[फ्रांस]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="597" height="387" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/inter-4-4.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/inter-4-4.jpg 597w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/inter-4-4-300x194.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 597px) 100vw, 597px" />प्रशांत महासागर में स्थित न्यू कैलेडोनिया में हिंसा भड़कने के बाद फ्रांस ने बुधवार को 12 दिनों के लिए आपातकाल लगा दिया है। न्यू कैलेडोनिया में लोग फ्रांस से आजादी की मांग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री गेब्रियल एटल ने न्यू कैलेडोनिया के समय के अनुसार गुरुवार सुबह पांच बजे आपातकाल की घोषणा की।गृह मंत्रालय ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="597" height="387" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/inter-4-4.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/inter-4-4.jpg 597w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/inter-4-4-300x194.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 597px) 100vw, 597px" />
<p>प्रशांत महासागर में स्थित न्यू कैलेडोनिया में हिंसा भड़कने के बाद फ्रांस ने बुधवार को 12 दिनों के लिए आपातकाल लगा दिया है। न्यू कैलेडोनिया में लोग फ्रांस से आजादी की मांग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री गेब्रियल एटल ने न्यू कैलेडोनिया के समय के अनुसार गुरुवार सुबह पांच बजे आपातकाल की घोषणा की।गृह मंत्रालय ने कहा कि द्वीपसमूह पर1800 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल के कर्मी पहले से भी मौजूद हैं।</p>



<p>प्रशांत महासागर में स्थित न्यू कैलेडोनिया में हिंसा भड़कने के बाद फ्रांस ने बुधवार को 12 दिनों के लिए आपातकाल लगा दिया है। फ्रांस के प्रधानमंत्री एटल ने पेरिस में संसद को बताया कि आपातकाल लगाने का लक्ष्य जितनी जल्दी हो सके कानून व्यवस्था बहाल करना है। फ्रांस के गृह मंत्रालय ने कहा कि आखिरी बार 1985 में ऐसे उपाय लागू किए थे। फ्रांस की सरकार ने हिंसा समाप्त करने का आह्वान किया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">फ्रांस से आजादी की मांग कर रहे न्यू कैलेडोनिया में लोग</h2>



<p>न्यू कैलेडोनिया में लोग फ्रांस से आजादी की मांग कर रहे हैं। फ्रांसीसी अधिकारियों ने कहा कि मतदान सुधारों के विरोध में सोमवार को हुई सशस्त्र झड़पों और अन्य हिंसा में अर्धसैनिक बल के एक कर्मी समेत चार लोगों की मौत हुई है और 300 से अधिक लोग घायल हैं। दंगाइयों ने कारों को आग लगा दी है और दुकानों को लूट लिया। अब तक 130 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सुरक्षा के लिए फ्रांसीसी सैन्य बलों को किया गया तैनात</h2>



<p>फ्रांस के प्रधानमंत्री गेब्रियल एटल ने न्यू कैलेडोनिया के समय के अनुसार गुरुवार सुबह पांच बजे आपातकाल की घोषणा की। कहा कि बंदरगाहों और हवाई अड्डों की सुरक्षा के लिए फ्रांसीसी सैन्य बलों को तैनात किया जा रहा है। समाचार एजेंसी रायटर के अनुसार, 10 लोगों को घर में नजरबंद किया गया है। टिक टॉक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">भारी संख्या में सैन्यकर्मियों को किया गया तैनात</h2>



<p>गृह मंत्रालय ने कहा कि द्वीपसमूह पर 1,800 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल के कर्मी पहले से भी मौजूद हैं। कुछ ही घंटों में 500 अतिरिक्त कर्मियों के आने की उम्मीद है। क्षेत्र के शीर्ष फ्रांसीसी अधिकारी, उच्चायुक्त लुईस ले. फ्रैंक ने चेतावनी दी कि स्थिति बहुत गंभीर है। शांति बहाल नहीं की गई तो कई लोगों की मौत होने की आशंका है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">मतदान सुधारों का कर रहे विरोध</h2>



<p>फ्रांस के गृहमंत्री आंतरिक मंत्री गेराल्ड डर्मैनिन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि जिन दर्जनों जगहों पर हमला किया गया और गोलीबारी की गई, उनमें एक पुलिस स्टेशन भी शामिल था। अर्धसैनिक बल के एक कर्मी की भी मौत हुई है। फ्रांसीसी सरकार का कहना है कि वह हमेशा बातचीत के लिए तैयार रही है। न्यू कैलेडोनिया में लोग मतदान सुधारों का विरोध कर रहे हैं। इस सप्ताह की अशांति तब भड़क उठी जब पेरिस में फ्रांस की संसद ने न्यू कैलेडोनिया में मतदाता सूचियों में बदलाव करने के लिए फ्रांसीसी संविधान में संशोधन पर बहस शुरू की।</p>



<p>नेशनल असेंबली ने बुधवार को विधेयक को मंजूरी दे दी, जो अन्य बदलावों के अलावा, न्यू कैलेडोनिया में 10 साल से रहने वाले निवासियों को प्रांतीय चुनावों में मतदान करने की अनुमति देगा। लोगों को लगता है कि इससे स्थानीय लोगों को हाशिए पर धकेल दिया जाएगा।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>न्यू कैलेडोनिया 1853 में नेपोलियन के उत्तराधिकारी सम्राट नेपोलियन तृतीय के अधीन फ्रांस का क्षेत्र बना।</li>



<li>1957 में सभी स्थानीय लोगों को फ्रांसीसी नागरिकता दी गई, 1988 में शांति समझौता हुआ।</li>



<li>फ्रांस ने न्यू कैलेडोनिया को स्वायत्तता देने और लगातार तीन जनमत संग्रह कराने का वादा किया</li>



<li>2018 से 2021 के बीच तीन जनमत संग्रह कराया गया। अधिकांश मतदाताओं ने फ्रांस का हिस्सा बने रहने का विकल्प चुना</li>



<li>स्वतंत्रता-समर्थक स्थानीय लोगों ने 2021 में पिछले जनमत संग्रह के परिणामों को अस्वीकार कर दिया था।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading">सुरक्षा के लिए फ्रांसीसी सैन्य बलों को किया गया तैनात</h2>



<p>फ्रांस के प्रधानमंत्री गेब्रियल एटल ने न्यू कैलेडोनिया के समय के अनुसार गुरुवार सुबह पांच बजे आपातकाल की घोषणा की। कहा कि बंदरगाहों और हवाई अड्डों की सुरक्षा के लिए फ्रांसीसी सैन्य बलों को तैनात किया जा रहा है। समाचार एजेंसी रायटर के अनुसार, 10 लोगों को घर में नजरबंद किया गया है। टिक टॉक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">भारी संख्या में सैन्यकर्मियों को किया गया तैनात</h2>



<p>गृह मंत्रालय ने कहा कि द्वीपसमूह पर 1,800 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल के कर्मी पहले से भी मौजूद हैं। कुछ ही घंटों में 500 अतिरिक्त कर्मियों के आने की उम्मीद है। क्षेत्र के शीर्ष फ्रांसीसी अधिकारी, उच्चायुक्त लुईस ले. फ्रैंक ने चेतावनी दी कि स्थिति बहुत गंभीर है। शांति बहाल नहीं की गई तो कई लोगों की मौत होने की आशंका है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">मतदान सुधारों का कर रहे विरोध</h2>



<p>फ्रांस के गृहमंत्री आंतरिक मंत्री गेराल्ड डर्मैनिन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि जिन दर्जनों जगहों पर हमला किया गया और गोलीबारी की गई, उनमें एक पुलिस स्टेशन भी शामिल था। अर्धसैनिक बल के एक कर्मी की भी मौत हुई है। फ्रांसीसी सरकार का कहना है कि वह हमेशा बातचीत के लिए तैयार रही है। न्यू कैलेडोनिया में लोग मतदान सुधारों का विरोध कर रहे हैं। इस सप्ताह की अशांति तब भड़क उठी जब पेरिस में फ्रांस की संसद ने न्यू कैलेडोनिया में मतदाता सूचियों में बदलाव करने के लिए फ्रांसीसी संविधान में संशोधन पर बहस शुरू की।</p>



<p>नेशनल असेंबली ने बुधवार को विधेयक को मंजूरी दे दी, जो अन्य बदलावों के अलावा, न्यू कैलेडोनिया में 10 साल से रहने वाले निवासियों को प्रांतीय चुनावों में मतदान करने की अनुमति देगा। लोगों को लगता है कि इससे स्थानीय लोगों को हाशिए पर धकेल दिया जाएगा।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>न्यू कैलेडोनिया 1853 में नेपोलियन के उत्तराधिकारी सम्राट नेपोलियन तृतीय के अधीन फ्रांस का क्षेत्र बना।</li>



<li>1957 में सभी स्थानीय लोगों को फ्रांसीसी नागरिकता दी गई, 1988 में शांति समझौता हुआ।</li>



<li>फ्रांस ने न्यू कैलेडोनिया को स्वायत्तता देने और लगातार तीन जनमत संग्रह कराने का वादा किया</li>



<li>2018 से 2021 के बीच तीन जनमत संग्रह कराया गया। अधिकांश मतदाताओं ने फ्रांस का हिस्सा बने रहने का विकल्प चुना</li>



<li>स्वतंत्रता-समर्थक स्थानीय लोगों ने 2021 में पिछले जनमत संग्रह के परिणामों को अस्वीकार कर दिया था।</li>
</ul>
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			</item>
		<item>
		<title>बड़ी खबर : थाईलैंड सरकार ने देश में आपातकाल लागू किया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bhavna Vajpai]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Oct 2020 11:50:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[आपातकाल]]></category>
		<category><![CDATA[थाईलैंड]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="464" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1-1024x768.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1-1024x768.png 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1-300x225.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1-768x576.png 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1.png 1200w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />थाईलैंड में बुधवार को हुए विशाल जन प्रदर्शनों के बाद थाईलैंड सरकार ने गुरुवार तड़के देश में आपातकाल लागू कर दिया। टेलीविजन पर पुलिस अधिकारियों ने एक लाइव प्रसारण में कहा कि ये कदम “शांति और व्यवस्था” बनाए रखने के लिए उठाया गया है। इसके तहत प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई है। आंदोलन के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="464" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1-1024x768.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1-1024x768.png 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1-300x225.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1-768x576.png 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1.png 1200w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>थाईलैंड में बुधवार को हुए विशाल जन प्रदर्शनों के बाद थाईलैंड सरकार ने गुरुवार तड़के देश में आपातकाल लागू कर दिया। टेलीविजन पर पुलिस अधिकारियों ने एक लाइव प्रसारण में कहा कि ये कदम “शांति और व्यवस्था” बनाए रखने के लिए उठाया गया है। इसके तहत प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई है। आंदोलन के प्रमुख नेताओं सहित बहुत से कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-382783 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1.png" alt="" width="1200" height="900" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1.png 1200w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1-300x225.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1-1024x768.png 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/pic-1-768x576.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></p>
<p>ये आंदोलन पिछली फरवरी से चल रहा है। गुजरे अगस्त में आंदोलनकारियों ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे और राजशाही पर नियंत्रण लगाने की मांग की थी। ये पहला मौका था, जब सीधे तौर पर राजतंत्र या राज परिवार का सड़कों पर उतरकर जन समुदाय ने विरोध किया हो। बुधवार को इस विरोध के और तेज होने के संकेत मिले।</p>
<p>गिरफ्तार नेताओं में 36 वर्षीय मानवाधिकार अधिवक्त एनोन नम्पा और युवा नेता पनुसाया सिथिजिरावत्तनकुल भी हैं। पिछले अगस्त में भी थाईलैंड में बड़े पैमाने पर जन प्रदर्शन हुए थे। उस दौरान एनोन नम्पा ने तब तक जारी वर्जनाओं को तोड़ते हुए खुलकर राजशाही पर सार्वजनिक बहस छेड़ दी थी। उन्होंने इस व्यवस्था में सुधार की अपील की थी।</p>
<p>नुसाया ने तब 10 सूत्री घोषणापत्र जारी किया था, जिसमें राजशाही में सुधार की बात भी शामिल थी। तब आंदोलनकारियों ने कहा था कि उनका विरोध तभी ठहरेगा, जब उनकी ये तीन मांगें पूरी की जाएंगी- संसद भंग की जाए, संविधान को फिर से लिखा जाए और सरकार आलोचकों का दमन बंद करे।</p>
<p>कोरोना महामारी के कहर के बावजूद अगस्त में हफ्ते भर तक जोरदार प्रदर्शन हुए थे। उसी आंदोलन का अगला दौर पिछले कुछ दिनों से राजधानी बैंकाक और थाईलैंड के दूसरे शहरों की सड़कों पर दिख रहा था। इस पर काबू पाने के लिए ही देश में इमरजेंसी लगाई गई है। अब ये देखने की बात होगी कि इससे जन विरोध को कब तक रोका जा सकता है।</p>
<p>थाईलैंड में राजनीतिक उथल-पुथल का लंबा इतिहास है। मगर ताजा दौर के प्रदर्शन इस साल फरवरी में शुरू हुए, जब युवाओं की खास पसंद फ्यूचर फॉरवर्ड पार्टी (एफएफपी) को भंग कर दिया गया। मार्च 2019 में हुए संसदीय चुनाव में ये पार्टी तीसरे नंबर आई थी। युवा मतदाताओं ने उम्मीद जोड़ी थी कि ये पार्टी लंबे समय से चले आ रहे सैनिक शासन से देश को मुक्त कराएगी।</p>
<p>गौरतलब है कि 2014 में सेना ने तख्ता पलट कर सत्ता संभाल ली थी। भारी जनविरोध के दबाव में आकर 2019 में उसने चुनाव कराया था। इस चुनाव के बाद सैनिक तानाशाह प्रयुथ चन-ओचा फिर से प्रधानमंत्री बन गए। मगर एफएफपी विपक्ष की मजबूत आवाज बनकर उभरी। लेकिन इस साल के शुरु में कथित तौर पर गैर-कानूनी चंदा लेने के आरोप में पार्टी को भंग कर दिया गया।</p>
<p>उसके विरोध में शुरू हुए आंदोलन का एजेंडा अब देश में वास्तविक लोकतंत्र कायम करना हो गया है। इसी सिलसिले में राजतंत्र पर बहस खड़ी की गई है, जबकि अब तक राजतंत्र और राजा को आलोचना और बहस से ऊपर माना जाता था। देश के शासक और मध्यवर्गों में अभी भी ऐसी ही सोच है। लेकिन ‘रेड शर्ट्स’ नाम से चर्चित नौजवान इस सोच को चुनौती दे रहे हैं। उन्हें इसमें वामपंथी गुटों और राजतंत्र विरोधी कई दूसरे समूहों का भी समर्थन हासिल है।</p>
<p>थाईलैंड में 1932 में ‘संवैधानिक राजतंत्र’ की स्थापना हुई थी। मगर राजा सामाजिक आदर के पात्र बने रहे। महाराज भूमिबोल काफी हद तक इस सम्मान को बनाए रखने में कामयाब रहे, लेकिन 2016 में उनके निधन के बाद स्थितियां तेजी से बदली हैं। भूमिबोल के बेटे 68 वर्षीय वजिरालोंगकर्ण इस वक्त राजा हैं, लेकिन वो ज्यादातर जर्मनी में रहते हैं। मुख्य राजकाज में सैनिक शासन ने उन्हें किनारे पर ही रखा है।</p>
<p>इस बीच सैनिक शासकों के संरक्षण में कंजरवेटिव और निहित स्वार्थी ताकतों का देश पर शिकंजा कसता गया है। मौजूदा आंदोलन उसके खिलाफ ही उठा एक जन विद्रोह है, जिसमें ये सवाल भी पूछे जा रहे हैं कि अगर राजा की कोई भूमिका ही नहीं है, तो फिर उसकी उपयोगिता क्या है?</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडिस याद आएंगे जब-जब होगा आपातकाल का जिक्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Radha Rajpoot]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Jun 2019 06:32:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[आपातकाल]]></category>
		<category><![CDATA[पूर्व रक्षामंत्री]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="275" height="183" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-25T120107.257.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />आज ही के दिन 1975 में भीषण गर्मी में तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की नेतृत्व वाली सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद देश में आपातकाल लगाने का फैसला लिया और 25 जून का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। आज देश आपातकाल को याद कर रहा है। पीएम नरेंद्र &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="275" height="183" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-25T120107.257.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><strong>आज ही के दिन 1975 में भीषण गर्मी में तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की नेतृत्व वाली सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद देश में आपातकाल लगाने का फैसला लिया और 25 जून का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। आज देश आपातकाल को याद कर रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी भी उस समय को याद करते हुए ट्वीट किए हैं। </strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-248533 " src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-25T120107.257.jpg" alt="" width="512" height="341" /></p>
<p><strong>लेकिन इमरजेंसी की याद देश के पूर्व रक्षा मंत्री और दिवंगत समाजवादी नेता जार्ज फर्नांडिस की जंजीरों वाली तस्वीर के बगैर अधूरी लगती है। ट्रेड यूनियन लीडर के रूप में राजनितिक करियर की शुरुआत करने वाले धुर समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस का भले ही देहांत हो गया हो, मगर आजादी के बाद लोकतंत्र पर धब्&#x200d;बा माने जाने वाले आपातकाल के दौर की उनकी बेड़ियों से जकड़ी तस्&#x200d;वीर लोगों के जेहन में अभी भी ताज़ा है।</strong></p>
<p><strong>जब भी आपातकाल के क्रूर दौर का उल्लेख होगा, उस दमन के विरोध के प्रतीकस्&#x200d;वरूप &#8216;बागी&#8217; नेता जॉर्ज फर्नांडिज की उस तस्&#x200d;वीर का भी जिक्र आएगा। संभवतया इसी वजह से करिश्&#x200d;माई नेता जॉर्ज को विद्रोही तेवर का नेता कहा जाता है। जार्ज साहब के देहांत के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने ऐलान किया है कि उनकी हथकड़ी वाली मुर्ति सरकार लगवाएगी।</strong></p>
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