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	<title>आईआईटी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>आईआईटी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>सभी आईआईटी में एक दिसंबर से शुरू होगा कैंपस प्लेसमेंट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 23 Nov 2025 09:45:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैरियर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="324" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/cfxcvv-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/cfxcvv.jpg 708w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/cfxcvv-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />सभी आईआईटी में 1 दिसंबर से कैंपस प्लेसमेंट शुरू होने जा रहा है। आईआईटी दिल्ली, मद्रास, बीएचयू, कानपुर, गुवाहाटी और रुड़की समेत प्रमुख संस्थानों ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। छात्रों का तनाव कम करने के लिए काउंसलिंग का भी इंतजाम किया गया है। Campus Placement: आईआईटी दिल्ली, बॉम्बे, कानपुर, मद्रास, खड़गपुर, बीएचयू, रुड़की, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="324" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/cfxcvv-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/cfxcvv.jpg 708w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/cfxcvv-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सभी आईआईटी में 1 दिसंबर से कैंपस प्लेसमेंट शुरू होने जा रहा है। आईआईटी दिल्ली, मद्रास, बीएचयू, कानपुर, गुवाहाटी और रुड़की समेत प्रमुख संस्थानों ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। छात्रों का तनाव कम करने के लिए काउंसलिंग का भी इंतजाम किया गया है।</p>



<p>Campus Placement: आईआईटी दिल्ली, बॉम्बे, कानपुर, मद्रास, खड़गपुर, बीएचयू, रुड़की, गुवाहाटी समेत अन्य दिग्गज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में एक दिसंबर से कैंपस प्लेसमेंट सत्र शुरू होने जा रहा है। इसमें दिन-रात कंपनियां छात्रों के इंटरव्यू लेंगी। देश के दिग्गज प्रौद्योगिकी संस्थानों में कैंपस प्लेसमेंट एक दिसंबर से शुरू होकर मई तक चलेगा। दो चरणों में चलने वाले कैंपस प्लेसमेंट सत्र में देशी-विदेशी आईटी, मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, एनालॉटिक्स, फाइनेंस क्षेत्रों की कंपनियां टैलेंट के आधार पर भारतीय छात्रों का चयन करेंगी।</p>



<p>आईआईटी दिल्ली, बीएचयू, गुवाहाटी, मद्रास समेत अन्य आईआईटी के कैंपस प्लेसमेंट अधिकारियों का कहना है कि एक दिसंबर को कैंपस प्लेसमेंट का पहला सत्र शुरू होगा। आईआईटी प्रबंधन को उम्मीद है कि कैंपस प्लेसमेंट के पहले ही दिन पहले ही राउंड में लाखों-करोड़ों रुपये के पैकेज के साथ छात्रों को ऑफर मिलने शुरू हो जाएंगे।</p>



<p>इस कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव में छात्रों को प्लेसमेंट ऑफर के अलावा प्री-प्लेसमेंट ऑफर भी शामिल होंगे। कई छात्रों को कई कंपनियों (मल्टीपल ऑफर) की ओर से एक साथ कई ऑफर भी मिल सकते हैं।</p>



<p><strong>इंटरव्यू का तनाव कम करने पर फोकस</strong></p>



<p>आईआईटी प्रबंधन का कैंपस प्लेसमेंट से पहले छात्रों के तनाव को दूर करने पर फोकस है। इसके लिए काउंसलिंग, थेरेपी सत्र चल रहे हैं। इसके अलावा मेंटल हेल्थ और उनके हेल्दी खाने पर फोकस किया गया है। प्लेसमेंट राउंड के लिए कई दिनों से तैयारियां चल रही है। छात्रों की कमियों को दूर करने के लिए विशेष काउंसलिंग भी कराई जा चुकी है, ताकि इंटरव्यू में किसी प्रकार की कोई कमी न रह जाए। हिंदी और गैर-हिंदी राज्यों के छात्रों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र भी चलाए गए हैं, ताकि इंग्लिश भाषा किसी प्रकार से कैंपस प्लेसमेंट में बाधा न बन सके।</p>



<p><strong>आईटी सेक्टर में लगातार बढ़ रही मांग</strong></p>



<p>आईआईटी कैंपस प्लेसमेंट में लगातार आईटी सेक्टर टॉप पर चल रहा है। आईटी सेक्टर में सबसे अधिक रोजगार के मौके उपलब्ध होने के कारण सबसे अधिक छात्रों को आईटी कंपनियों की ओर से ऑफर लेटर मिलते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 35 से 32 फीसदी तक आईटी, इंजीनियरिंग के कोर एरिया में 29 से 31 फीसदी, मैनेजमेंट में 10 से 11 फीसदी, कंस्लटेंसी में 14 से 15 फीसदी, एनालॉटिक्स में 9 से 10 फीसदी तो फाइनेंस में चार से पांच फीसदी को रोजगार मिलने की उम्मीद है।</p>



<p>यह कंपनियां रहेंगी खास ब्लूमबर्ग लंदन, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, सैमसंग, एडोब, वॉलमार्ट, बोस्टन, मैकेंजी, गोल्डमैन सॉक्स स्प्रिंकलर, पेटीएम, अमेजन, कैशफ्री, इसरो, फिल्पकार्ट, क्वालॅकॉम, रिलायंस जियो, कैपजेमिनी, विस्काडिया, सेरेमॉर्फिक एडवर्ब, एलएडटी आदि कंपनियां प्लेसमेंट के लिए आने वाली हैं। छात्रों को विदेशी कंपनियों के साथ भारत समेत हांगकांग, जापान, मिडिल ईस्ट, नॉर्थलैंड, साउथ कोरिया, ताइवान, यूएस आदि देशों में काम करने का मौका मिल सकता है।</p>
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		<title>आईआईटी जैम के लिए आवेदन का कल आखिरी मौका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Oct 2025 09:22:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कैरियर]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[आईआईटी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="452" height="227" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/58-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/58.png 452w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/58-medium.png 300w" sizes="(max-width: 452px) 100vw, 452px" />भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जैम के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 अक्तूबर है। यह परीक्षा 15 फरवरी को आयोजित की जाएगी और M.Sc. एवं अन्य स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होती है। IIT JAM 2025: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे, मास्टर्स स्तर की प्रवेश परीक्षा JAM (Joint Admission Test for M.Sc.) 2026 &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="452" height="227" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/58-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/58.png 452w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/58-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 452px) 100vw, 452px" />
<p>भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जैम के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 अक्तूबर है। यह परीक्षा 15 फरवरी को आयोजित की जाएगी और M.Sc. एवं अन्य स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होती है।</p>



<p>IIT JAM 2025: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे, मास्टर्स स्तर की प्रवेश परीक्षा JAM (Joint Admission Test for M.Sc.) 2026 के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित कर रहा है। परीक्षा का आयोजन उच्च शिक्षा में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और संबंधित क्षेत्रों में मास्टर्स कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए किया जाता है।</p>



<p>इस वर्ष JAM 2026 का पंजीकरण 20 सितंबर 2025 तक चालू रहेगा और इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट joaps.iitb.ac.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा 15 फरवरी 2026 को दो सत्रों (पूर्वाह्न और अपराह्न) में आयोजित की जाएगी और इसमें निम्नलिखित विषयों के लिए पेपर शामिल होंगे:</p>



<p>रसायन विज्ञान (CY)</p>



<p>अर्थशास्त्र (EN)</p>



<p>जैव प्रौद्योगिकी (BT)</p>



<p>भूविज्ञान (GG)</p>



<p>गणित (MA)</p>



<p>गणितीय सांख्यिकी (MS)</p>



<p><strong>परीक्षा पैटर्न</strong></p>



<p>जैम 2026 एक स्नातक स्तर की कंप्यूटर आधारित परीक्षा है जिसमें सात टेस्ट पेपर शामिल हैं। प्रत्येक पेपर में तीन प्रकार के प्रश्न होते हैं:</p>



<p>बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)</p>



<p>बहु-उत्तर प्रश्न (MSQ)</p>



<p>संख्यात्मक उत्तर प्रकार प्रश्न (NAT)</p>



<p>अभ्यर्थी एक या दो टेस्ट पेपर दे सकते हैं। यदि कोई दो पेपर देता है, तो सत्र टकराव से बचने के लिए दूसरे पेपर का चयन सावधानीपूर्वक करना आवश्यक है।</p>



<p>मेरिट सूची में स्थान पाने वाले अभ्यर्थी लगभग 3000 सीटों पर आईआईटी के विभिन्न स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में प्रवेश के पात्र होंगे।</p>



<p><strong>आवेदन शुल्क</strong></p>



<p>महिला, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) उम्मीदवारों के लिए JAM 2026 का आवेदन शुल्क एक पेपर के लिए 1,000 रुपये और दो पेपर के लिए 1,350 रुपये है।</p>



<p>अन्य सभी उम्मीदवारों के लिए एक पेपर के लिए शुल्क 2,000 रुपये और दो पेपर के लिए 2,700 रुपये निर्धारित किया गया है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>आईआईटी का उपकरण बताएगा फसल बीमार है या नहीं, एक मिनट में देगा रिपोर्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Aug 2025 08:45:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[आईआईटी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="337" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/78oy-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/78oy.png 624w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/78oy-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />आईआईटी ने ऐसा उपकरण विकसित किया है जो फसल पकने के बाद खाद्यान्न की गुणवत्ता बस एक मिनट में बता देगा। यह खाद्यान्न भंडारित किया जा सकता या नहीं इसकी भी जानकारी देगा। खाद्यान्न में बीमारी पकड़ आने के बाद किसान उस बीज को दोबारा नहीं बोएंगे तो भविष्य में उनको नुकसान भी नहीं होगा, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="337" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/78oy-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/78oy.png 624w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/78oy-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>आईआईटी ने ऐसा उपकरण विकसित किया है जो फसल पकने के बाद खाद्यान्न की गुणवत्ता बस एक मिनट में बता देगा। यह खाद्यान्न भंडारित किया जा सकता या नहीं इसकी भी जानकारी देगा। खाद्यान्न में बीमारी पकड़ आने के बाद किसान उस बीज को दोबारा नहीं बोएंगे तो भविष्य में उनको नुकसान भी नहीं होगा, उपज भी बढ़ेगी। साथ ही खाद्यान्न में रेत या कंकड़ होने की भी जानकारी देगा।</p>



<p>अक्सर किसान किसी भी खाद्यान्न को हाथों में लेकर कान के पास बजाकर उसी आवाज सुनते हैं और खाद्यान्न की गुणवत्ता बता देते हैं। इसी तरह आईआईटी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. तुषार संधान ने अपनी टीम के साथ एआई युक्त एग्रीग्नेन एनालाइजर विकसित किया है जो खाद्यान्न की आवाज सुनकर एक मिनट में गुणवत्ता बता देगा। यह उपकरण खाद्यान्न थोक विक्रेताओं के लिए भी उपयोगी होगा जो अनाज की गुणवत्ता की निगरानी कर सकेंगे। इससे उन्हें यह निर्धारित करने में मदद मिलेगी कि अनाज भंडारण के लिए उपयुक्त है या तत्काल उपभोग के लिए बाजार में बेचा जाना है।</p>



<p>उपकरण में जीपीसएस ट्रैकिंग सुविधा भी है जो किसानों और खरीदारों को यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि उन्हें कभी भी कहीं भी सर्वोत्तम गुणवत्ता वाला खाद्यान्न मिल सके। प्रो. तुषार ने कहा कि जब खाद्यान्न में कीड़ा लगा होता है तो उपकरण में उसे डालने पर अलग तरह से आवाज आती है। अगर खाद्यान्न में बीमारी है और उसका इस्तेमाल बीज के रूप में होगा तो आने वाली फसल भी खराब हो जाएगी। इस एनालाइजर की मदद से अच्छे बीजों से रोपाई की जा सकेगी। इसके अलावा कई बार एक बोरी में अच्छी और खराब गुणवत्ता वाले खाद्यान्न की मिलावट की जाती है, इस एनालाइजर से इसका भी पता लगाया जा सकेगा।</p>



<p><strong>ऐसे काम करता है उपकरण<br></strong>प्रो. तुषार ने बताया कि डिवाइस में खाद्यान्न के सैंपल अंदर लगी ब्रास की प्लेट पर गिरते हैं। गिरने की आवाज से समझ आएगा खाद्यान्न बीमारी से रहित या युक्त है। इसके बाद खाद्यान्न भीतर बने चैंबर में एकत्र होते हैं। चैंबर में दो तरह के कैमरे और एलईडी पैनल लगे हैं जिससे खाद्यान्न के आकार और वजन की जानकारी पता चलती है। एआई के संपर्क में आने से सारी डिटेल रिपोर्ट मिल जाती है। प्रो. तुषार ने कहा कि यह कॉम्पैक्ट और पोर्टेबल है। इस उपकरण की मदद से किसान और खरीदार यह विश्लेषण कर सकेंगे कि खाद्यान्न स्वस्थ हैं या नहीं। यह पौधों की बीमारियों को रोकने में मदद करेगा और पौधों में होने वाली किसी भी नई बीमारी का पता लगाने में भी मदद करेगा।</p>
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		<item>
		<title>इंदौर: देश का पहला आईआईटी जो वन वाटिका बनाएगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Jul 2024 07:25:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[आईआईटी]]></category>
		<category><![CDATA[वन वाटिका]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-1419.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-1419.png 736w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-1419-300x170.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />जैव विविधता के संवर्धन, वन्यजीव वास में सुधार, वन आग पर नियंत्रण, वन संरक्षण और मृदा एवं जल संरक्षण उपाय किए जाएंगे। इंदौर आईआईटी देश का पहला आईआईटी बन गया है जो वन वाटिका बनाएगा। आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास ने कहा कि वन वाटिका के बनने से हमारी एक अलग पहचान बनेगी, क्योंकि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-1419.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-1419.png 736w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-1419-300x170.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>जैव विविधता के संवर्धन, वन्यजीव वास में सुधार, वन आग पर नियंत्रण, वन संरक्षण और मृदा एवं जल संरक्षण उपाय किए जाएंगे।</p>



<p>इंदौर आईआईटी देश का पहला आईआईटी बन गया है जो वन वाटिका बनाएगा। आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास ने कहा कि वन वाटिका के बनने से हमारी एक अलग पहचान बनेगी, क्योंकि हम ऐसी परियोजना प्राप्त करने वाले पहले आईआईटी हैं। इस परियोजना के लिए आईआईटी इंदौर को देश के पहला आईआईटी और जिले के एकमात्र शैक्षणिक संस्थान के रूप में चुना गया है। इस विकास के लिए कुल 50 हेक्टेयर वन भूमि की पहचान की जाएगी और इसका उपयोग वनीकरण, सहायक प्राकृतिक पुनर्जनन के माध्यम से वनों की गुणवत्ता में सुधार, जैव विविधता के संवर्धन, वन्यजीव वास में सुधार, वन आग पर नियंत्रण, वन संरक्षण और मृदा एवं जल संरक्षण उपायों के लिए किया जाएगा। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए कुल ₹1.98 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।</p>



<p>पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) के अंतर्गत नगर वन परियोजना के लिए आईआईटी इंदौर को चुना है। इस उपलक्ष्य पर, इसका शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया। नगर वन योजना (एनवीवाई) की पायलट योजना में 2020-21 से 2024-25 की अवधि के दौरान देश में 400 नगर वन और 200 नगर वाटिका विकसित करने की परिकल्पना की गई है, जिसका उद्देश्य वनों और हरित क्षेत्र के अतिरिक्त वृक्षों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना, शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जैव विविधता और पर्यावरणीय लाभ को बढ़ाना और शहरवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। इस कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय कैम्पा के सीईओ सुभाष चंद्रा और आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी भी उपस्थित रहे।</p>



<p>इस दौरान, प्रोफेसर जोशी ने कहा, आईआईटी इंदौर काफी समय से इस परियोजना पर काम करना चाहता था और हमें खुशी है कि हमें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रकृति के संरक्षण की स्थिति में आईआईटी इंदौर अद्वितीय रहा है और हम लगातार बांध तथा तालाब विकसित कर रहे हैं और प्राकृतिक वास को बढ़ा रहे हैं। इस वन वाटिका के बनने से हमारी एक अलग पहचान बनेगी, क्योंकि हम ऐसी परियोजना प्राप्त करने वाले पहले आईआईटी हैं। इस परियोजना के अनुदान से पहले भी आईआईटी इंदौर इस तरह की परियोजनाओं पर काम कर रहा है, लेकिन इस परियोजना के अनुदान से गतिविधियों को और गति मिलेगी।</p>



<p>वहीं, चंद्रा ने कहा, हम जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से अवगत हैं, जिससे सूखा, अचानक बाढ़, बादल फटने जैसी घटनाएं हो रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप जल और जैव विविधता के प्राकृतिक चक्र पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। वर्षा चक्र में परिवर्तन से भूमि की उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप हानिकारक कीटों का जन्म हो रहा है और खाद्य सुरक्षा को चुनौती मिल रही है। इन परियोजनाओं के माध्यम से, हमारा इरादा मिट्टी के क्षरण को रोकना और वर्षा आधारित नदियों में जल की मात्रा में सुधार करना है। उन्होंने आगे कहा, आईआईटी इंदौर को परिसर में एक स्वचालित मौसम केंद्र की व्यवहार्यता पर विचार करना चाहिए तथा वर्षा पैटर्न और जैव विविधता का अध्ययन करना चाहिए जो प्रकृति और जलवायु का अध्ययन करने के लिए महत्वपूर्ण है। संस्थान को इस क्षेत्र के पुराने पौधों की एक सूची तैयार करनी चाहिए और जैव विविधता के बेसलाइन डेटा में सुधार करना चाहिए और लगभग 170 प्रकार के पेड़ लगाने चाहिए जो मध्य भारत में विशिष्ट हैं। ऐसी जैव विविधता विकसित करके जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव देखने के लिए एक अध्ययन किया जाना चाहिए।</p>
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		<title>लेह घूमने गए आईआईटी के असिस्टेंट प्रोफेसर की मौत</title>
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		<pubDate>Fri, 14 Jun 2024 04:03:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="417" height="338" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/up2-4.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/up2-4.jpg 417w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/up2-4-300x243.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 417px) 100vw, 417px" />बाइक से लेह घूमने गए आईआईटी के सस्टेनेबल एनर्जी के असिस्टेंट प्रोफेसर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ट्रैकिंग के दौरान ऑक्सीजन कम होने से उन्हें हार्ट अटैक पड़ गया। साथियों संग बाइक से लेह घूमने गए आईआईटी कानपुर के सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कंवर सिंह नलवा (39) &#8230;]]></description>
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<p>बाइक से लेह घूमने गए आईआईटी के सस्टेनेबल एनर्जी के असिस्टेंट प्रोफेसर की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ट्रैकिंग के दौरान ऑक्सीजन कम होने से उन्हें हार्ट अटैक पड़ गया।</p>



<p>साथियों संग बाइक से लेह घूमने गए आईआईटी कानपुर के सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कंवर सिंह नलवा (39) की मौत हो गई। बुधवार को लेह में ट्रैकिंग के दौरान ऑक्सीजन की कमी व सांस लेने में दिक्कत के चलते उनकी तबीयत बिगड़ी थी। जिसके बाद हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।</p>



<p>मूल रूप से देहरादून के रहने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नलवा संस्थान के मैटेरियल साइंस के डॉ. शिवम त्रिपाठी और केमिकल साइंस के प्रो. नितिन कायस्था के साथ आधिकारिक दौरे पर आईआईटी रोपड़ गए थे। वहां से तीनों लेह के लिए निकल गए। बुधवार को ट्रैकिंग के दौरान हाईपॉक्सिया (ब्लड में ऑक्सीजन की कमी) की वजह से उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई। जब तक उन्हें अस्पताल ले जाया जाता, उन्होंने दम तोड़ दिया। आईआईटी प्रशासन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिये उनकी मौत की पुष्टि की। डॉ. नलवा के परिवार में उनकी पत्नी और बेटी है। उनके निधन पर आईआईटी के प्रो. मणींद्र अग्रवाल, उप निदेशक प्रो. बृजभूषण ने शोक व्यक्त किया है।</p>



<p><strong>आधार कार्ड न मिलने पर एयरलिफ्ट नहीं हो सका शव</strong><br>प्रोफेसर की मौत के बाद उनके शव को एयरलिफ्ट करने के लिए कवायद की गई। हालांकि आधार कार्ड उपलब्ध न होने की वजह से शव एयरलिफ्ट नहीं किया जा सका। आईआईटी प्रबंधन आधार व अन्य औपचारिकताएं गुरुवार शाम तक पूरी करा सका। अब शुक्रवार को उनका शव गृह जनपद देहरादून के लिए एयरलिफ्ट कराया जाएगा।</p>



<p><strong>आईआईटी कानपुर से ही किया था बीटेक</strong><br>डॉ. नलवा ने आईआईटी कानपुर से ही बीटेक किया था। वर्तमान में वह सौर ऊर्जा पर रिसर्च कर रहे थे। उनके साथी और पीएचडी कर रहे छात्रों के अनुसार डॉ. नलवा बेहद खुशमिजाज स्वभाव के थे। उनके निधन की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया।</p>
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