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	<title>अहम फैसला &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>अहम फैसला &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>हाईकोर्ट का अहम फैसला : अविवाहित बेटी भी गुजारा भत्ता पाने की हकदार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Jan 2024 09:35:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[अहम फैसला]]></category>
		<category><![CDATA[हाईकोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अविवाहित बेटियों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत अविवाहित बेटी भी गुजारा भत्ता पाने की हकदार है। वह चाहे किसी भी धर्म, आयु और रोजगार से जुड़ी हो। यह फैसला न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा की अदालत ने एक पिता की ओर से देवरिया &#8230;]]></description>
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<p>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अविवाहित बेटियों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत अविवाहित बेटी भी गुजारा भत्ता पाने की हकदार है। वह चाहे किसी भी धर्म, आयु और रोजगार से जुड़ी हो। यह फैसला न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा की अदालत ने एक पिता की ओर से देवरिया की निचली अदालत द्वारा पहली पत्नी से जन्मी तीन बेटियों को गुजारा भत्ता दिए जाने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए सुनाया है।</p>



<p>याची ने वर्ष 2015 में पहली पत्नी के देहांत के बाद दूसरी शादी कर ली। पहली पत्नी से जन्मी याची की तीन बेटियों ने देवरिया के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम, 2005 के तहत अपने पिता से अंतरिम भरण-पोषण देने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि मां की मौत के बाद पिता, सौतेली मां के साथ इन सभी के साथ मारपीट करता है। उन्होंने इनकी पढ़ाई भी रोक दी है। न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में बेटियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पिता को निर्देशित किया कि वह तीनों बेटियों का को तीन हजार रुपये प्रतिमाह भरण -पोषण प्रदान करें।</p>



<p><strong>मजिस्ट्रेट के आदेश को पिता ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती</strong></p>



<p>याची पिता ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को जिला जज की अदालत में चुनौती दी। लेकिन, जिला जज ने पिता की अपील खारिज कर दी। इसके खिलाफ पिता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची पिता ने दलील दी कि उसकी बेटियां बालिग हैं और स्वस्थ हैं। वह ट्यूशन पढ़ा कर कमाई भी करती हैं। बेटियां उसके साथ रह रही हैं और वह उनका सारा खर्चा वहन कर रहा है। याची ने अपनी उम्र, आर्थिक तंगी और मुस्लिम विधि का भी हवाला देते हुए निचली अदालत द्वारा दिए गए फैसले को रद्द करने की मांग की।</p>



<p>कोर्ट ने याची पिता की दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा मामला परिवारिक हिंसा से जुड़ा है। इसलिए अविवाहित बेटी किसी भी धर्म, आयु और समुदाय की हो, उसे घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत संरक्षण प्राप्त है। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर अपनी मुहर लगाते हुए याची पिता की याचिका खारिज कर दी।</p>
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		<title>इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्णायक फैसला, पत्नी बेवफा है या वफा, DNA टेस्ट से हो जायेगा साबित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sonelal Verma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Nov 2020 10:36:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इलाहाबाद]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[DNA टेस्ट से]]></category>
		<category><![CDATA[अहम फैसला]]></category>
		<category><![CDATA[इलाहाबाद हाईकोर्ट का]]></category>
		<category><![CDATA[पत्नी बेवफा है]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवाद के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि डीएनए टेस्ट से साबित कर सकते हैं कि पत्नी बेवफा है या नहीं. दरअसल हमीरपुर के रहने वाले दंपती का फैमिली कोर्ट से तलाक हो चुका है. तलाक के तीन साल बाद पत्नी ने मायके में बच्चे को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>प्रयागराज.</strong> इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवाद के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि डीएनए टेस्ट से साबित कर सकते हैं कि पत्नी बेवफा है या नहीं. दरअसल हमीरपुर के रहने वाले दंपती का फैमिली कोर्ट से तलाक हो चुका है. तलाक के तीन साल बाद पत्नी ने मायके में बच्चे को जन्म दिया. पत्नी ने दावा किया कि बच्चा उसके पति का है, जबकि पति ने पत्नी के साथ शारीरिक संबंध होने से इनकार किया.</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" src="https://www.haqeeqattoday.com/wp-content/uploads/2020/11/हाई.jpg" alt="" class="wp-image-149982"/></figure>



<p class="has-medium-font-size">&#8216;डीएनए टेस्ट सबसे बेहतर तरीका&#8217;-</p>



<p>मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा तो अब हाईकोर्ट ने कहा है कि शख्स बच्चे का पिता है या नहीं? यह साबित करने के लिए डीएनए टेस्ट सबसे बेहतर तरीका है. कोर्ट ने कहा कि डीएनए टेस्ट से यह भी साबित हो सकता है कि पत्नी बेवफा है या नहीं. दरअसल पति राम आसरे ने फैमिली कोर्ट में डीएनए टेस्ट मांग में अर्जी दाखिल की थी, लेकिन फैमिली कोर्ट ने अर्जी कर खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकल पीठ ने ये आदेश दिया है.</p>



<p class="has-medium-font-size">यह है पूरा मामला-</p>



<p>पति के अनुसार वह 15 जनवरी 2013 से अपनी पत्नी के साथ नहीं रह रहा था. इसके बाद 25 जून 2014 को दोनों का तलाक हो गया. उसने दावा किया कि उसका पत्नी के साथ कोई संबंध नहीं था. पत्नी अपने मायके में रह रही है. 26 जनवरी 2016 को उसने एक बच्चे को जन्म दिया. 15 जनवरी 2013 के बाद से दोनों के बीच शारीरिक संबंध नहीं बने. बच्चा उसका नहीं है, जबकि पत्नी का कहना है कि बच्चा उसके पति का ही है. इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.</p>
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