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	<title>अल्जाइमर &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>अल्जाइमर &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>अल्जाइमर के इलाज में गेमचेंजर साबित हो सकती है यह दवा</title>
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		<pubDate>Tue, 16 Jun 2026 05:47:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="291" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-18.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-18.jpg 980w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-18-300x141.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-18-768x362.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />अगर आपके घर या जान-पहचान में कोई अल्जाइमर का मरीज है, तो यह रिसर्च आपके लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। हाल ही में हुए एक शोध से पता चला है कि दिमाग तक तांबा यानी कॉपर पहुंचाने वाली एक खास दवा इस गंभीर बीमारी से लड़ने में बेहद मददगार साबित हो सकती है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="291" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-18.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-18.jpg 980w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-18-300x141.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-18-768x362.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>अगर आपके घर या जान-पहचान में कोई अल्जाइमर का मरीज है, तो यह रिसर्च आपके लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। हाल ही में हुए एक शोध से पता चला है कि दिमाग तक तांबा यानी कॉपर पहुंचाने वाली एक खास दवा इस गंभीर बीमारी से लड़ने में बेहद मददगार साबित हो सकती है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि यह दवा कैसे काम करती है और इस रिसर्च में क्या खास बातें सामने आई हैं।</p>



<p><strong>क्या है अल्जाइमर और यह कैसे असर करता है?<br></strong>अल्जाइमर एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है। इसमें इंसान के सोचने, याद रखने और धीरे-धीरे बोलने की क्षमता भी खत्म होने लगती है। यह बीमारी मुख्य रूप से दिमाग में ‘एमाइलाइड-बीटा’ नाम के एक जहरीले प्रोटीन के जमा होने के कारण होती है।</p>



<p>शोध में पाया गया है कि कॉपर पहुंचाने वाली यह नई दवा दिमाग की स्पेशियल मेमोरी को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने में मदद करती है। स्पेशियल मेमोरी हमारे दिमाग का वह कॉग्निटिव सिस्टम है, जो हमारे आस-पास के वातावरण और जगहों की जानकारी को रिकॉर्ड करता है, स्टोर करता है और जरूरत पड़ने पर उसे रिकवर करके हमें याद दिलाता है।</p>



<p><strong>दिमाग में कैसे काम करते हैं ‘सफाई वाले पंप’?<br></strong>ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बताया कि हमारा दिमाग खुद की सफाई कैसे करता है। आम तौर पर, हमारे दिमाग के ब्लड-ब्रेन बैरियर में कुछ खास तरह के पंप लगे होते हैं। इनका काम दिमाग में बनने वाले जहरीले प्रोटीन को खून के बहाव के जरिए बाहर निकालना होता है।</p>



<p><strong>अल्जाइमर में क्या दिक्कत आती है?<br></strong>अल्जाइमर के मरीजों में कचरा साफ करने वाले इन मुख्य पंपों को ‘पी-ग्लाइकोप्रोटीन’ कहा जाता है। इस बीमारी में ये पंप बेहद कमजोर हो जाते हैं। जब ये पंप अपना काम ठीक से नहीं कर पाते, तो कचरा बाहर निकलने का रास्ता बंद हो जाता है और यह जहरीला प्रोटीन दिमाग में ही इकट्ठा होने लगता है।</p>



<p><strong>कॉपर वाले कंपाउंड ‘सीयू’ से जगी नई उम्मीद<br></strong>‘केमिकल न्यूरोसाइंस जर्नल’ में प्रकाशित इस रिसर्च में चूहों पर परीक्षण किया गया। शोध में सामने आए नतीजे बेहद सकारात्मक रहे:</p>



<p>पंपों की मरम्मत: शोधकर्ताओं ने पाया कि कॉपर से बना एक खास कंपाउंड, जिसे ‘सीयू’ नाम दिया गया है, अल्जाइमर से पीड़ित चूहों पर काफी असरदार रहा।<br>जहरीले प्रोटीन में कमी: इस कंपाउंड ने चूहों के दिमाग में मौजूद उन खराब हो चुके ‘कचरा हटाने वाले पंपों’ को फिर से ठीक करने में बड़ी भूमिका निभाई, जिससे दिमाग में जमे जहरीले प्रोटीन को कम किया जा सका।</p>



<p>इस शानदार खोज के बाद अब न्यूरोवैस्कुलर डिसफंक्शन के इलाज के लिए एक नया और कारगर रास्ता खुलने की पूरी संभावना है।</p>
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		<title>क्या आंखों की जांच से सालों पहले लग सकेगा अल्जाइमर का पता?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 11:25:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[अल्जाइमर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-21-032441.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-21-032441.png 873w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-21-032441-300x167.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-21-032441-768x427.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />क्या आप जानते हैं कि हमारी आंखें हमारे दिमाग की स्थिति का राज खोल सकती हैं? जी हां, एक हालिया शोध में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। अब आंखों के पर्दे (रेटिना) की जांच से अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी का पता बहुत पहले लगाया जा सकता है, वह भी तब, जब दिमाग को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-21-032441.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-21-032441.png 873w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-21-032441-300x167.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-21-032441-768x427.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>क्या आप जानते हैं कि हमारी आंखें हमारे दिमाग की स्थिति का राज खोल सकती हैं? जी हां, एक हालिया शोध में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। अब आंखों के पर्दे (रेटिना) की जांच से अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी का पता बहुत पहले लगाया जा सकता है, वह भी तब, जब दिमाग को नुकसान पहुंचना शुरू भी न हुआ हो।</p>



<p><strong>‘दिमाग की खिड़की’ के सही हिस्से की पहचान<br></strong>अमेरिका के ह्यूस्टन मेथोडिस्ट अस्पताल के शोधकर्ता स्टीफन वोंग के अनुसार, “आंखें दिमाग की खिड़की होती हैं।” उनका कहना है कि अब तक हम इस खिड़की के गलत हिस्से में झांक रहे थे। आमतौर पर आंखों की जांच रेटिना के बीच वाले हिस्से पर केंद्रित होती है। लेकिन, इस नए अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि अल्जाइमर रोग के सबसे अहम और शुरुआती संकेत आंख के बाहरी हिस्से में छिपे होते हैं।</p>



<p><strong>याददाश्त जाने से सालों पहले शुरू हो सकेगा इलाज<br></strong>इस नई खोज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे समय रहते बीमारी को पकड़ा जा सकता है। याददाश्त कमजोर होने और दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचने से कई साल पहले ही रेटिना में बदलाव होने लगते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर लोग नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं, तो डॉक्टर इन शुरुआती बदलावों को पहचान सकते हैं। इससे बीमारी का समय पर पता लगाकर इलाज शुरू किया जा सकता है।</p>



<p><strong>क्या है इसके पीछे का विज्ञान?<br></strong>यह पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है, इसे पिछले शोधों के आधार पर समझा जा सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि अल्जाइमर रोग का एक प्रमुख लक्षण दिमाग में ‘एमिलायड प्रोटीन’ का जमा होना है। ठीक ऐसा ही एमिलायड प्रोटीन आंखों के रेटिना में भी इकट्ठा होने लगता है। इसका सीधा मतलब यह है कि रेटिना में होने वाले बदलाव, दिमाग के अंदर चल रही बीमारी की असली स्थिति को दर्शाते हैं।</p>
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		<title>अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियों के खिलाफ IIT बॉम्बे की बड़ी पहल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 04:54:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[अल्जाइमर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="329" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-23-205144.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-23-205144.png 726w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-23-205144-300x160.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-23-205144-310x165.png 310w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />मस्तिष्क से जुड़ी जटिल बीमारियों को समझने और उनका इलाज खोजने की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के बायोइंजीनियरों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं की इस टीम ने &#8216;ब्रेनप्रोट&#8217; और &#8216;ड्रगप्रोटएआइ&#8217; नामक दो नए स्मार्ट प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, जो अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारियों को समझने और उनके &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="329" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-23-205144.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-23-205144.png 726w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-23-205144-300x160.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-23-205144-310x165.png 310w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>मस्तिष्क से जुड़ी जटिल बीमारियों को समझने और उनका इलाज खोजने की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के बायोइंजीनियरों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं की इस टीम ने &#8216;ब्रेनप्रोट&#8217; और &#8216;ड्रगप्रोटएआइ&#8217; नामक दो नए स्मार्ट प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, जो अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारियों को समझने और उनके लिए नई दवाओं की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।</p>



<p><strong>बताएगा कितनी उपयुक्त है प्रोटीन की दवा</strong><br>डॉ. अंकित हल्दर ने कहा कि ड्रगप्रोटएआइ यह भविष्यवाणी करता है कि क्या प्रोटीन दवा के लिए उपयुक्त है। प्रोटीन के अनुक्रम से परे देख सकते हैं जैसे कि सेलुलर स्थान, संरचनात्मक विशेषताएं और अन्य अद्वितीय विशेषताएं । यह उपकरण &#8220;ड्रग्गेबिलिटी इंडेक्स&#8221; पैदा करता है। यह एक संभावना स्कोर है जो यह दर्शाता है कि किसी प्रोटीन की दवा के लिए उपयुक्त होने की कितनी संभावना है। उच्च स्कोर यह सुझाव देता है कि प्रोटीन उन प्रोटीनों के साथ कई गुण साझा करता है, जिनके लिए पहले से अनुमोदित दवाएं हैं।</p>



<p><strong>प्रोटीन दवा के लिए कितना सही?</strong><br>ड्रगप्रोटएआइ को यह समझने के लिए विकसित किया गया कि क्या कोई प्रोटीन दवा के लिए उपयुक्त हो सकता है (जिसमें उपयोगी दवा लक्ष्य बनने के लिए आवश्यक जैविक और भौतिक विशेषताएं होती हैं) या इससे पहले कि महंगे प्रयोग किए जाएं। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में केवल लगभग 10 प्रतिशत मानव प्रोटीनों के लिए एफडीए द्वारा अनुमोदित दवा है, प्रतीकात्मक जबकि 3-4 प्रतिशत अन्य जांच के अधीन हैं।</p>



<p><strong>रोग मार्कर की पहचान</strong><br>हल्दर ने कहा कि ड्रगप्रोटएआइ को सीधे ब्रेनप्रोट में एकीकृत करके हमने एक पाइपलाइन बनाई है, जहां शोधकर्ता एक रोग मार्कर की पहचान से लेकर उसकी एक्सप्रेशन पैटर्न की जांच करने उसकी दवा के लिए उपयुक्तता का मूल्यांकन करने और मौजूदा यौगिकों या क्लिनिकल परीक्षणों का अन्वेषण करने तक सभी एक घंटे के भीतर आगे बढ़ सकते हैं।</p>



<p><strong>जीन्स और प्रोटीन की जांच</strong><br>आईआईटी बांबे के बायोसाइंसेस और बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संजीव श्रीवास्तव ने कहा कि ब्रेनप्रोट में मानव मस्तिष्क के 20 न्यूरोएनाटामिकल क्षेत्रों में बाएं व दाएं बाएं और दाएं हिस्सों (हेमस्फियर) के बीच प्रोटीन एक्सप्रेशन के अंतर को पहचानने और समझने के लिए संसाधन भी शामिल हैं। यह अपनी तरह का पहला संसाधन है। ब्रेनप्रोट में 56 मानव मस्तिष्क रोगों और 1,800 से अधिक रोगी नमूनों से मिले 52 मल्टी ओमिक्स डाटासेट का डाटा शामिल है। इन डाटासेट में 11 रोगों के लिए ट्रांसक्रिप्टोमिक डेटा और छह रोगों के लिए प्रोटिओमिक डेटा शामिल हैं।</p>



<p>प्रत्येक रोग के लिए उपयोगकर्ता उन जीनों और प्रोटीनों की जांच कर सकते हैं जो रोग से अक्सर जुड़े होते हैं। यह आकलन कर सकते हैं कि ये जीन और प्रोटीन मौजूदा चिकित्सा और वैज्ञानिक डाटाबेस द्वारा कितनी मजबूती से समर्थित हैं।</p>
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		<title>अब अल्जाइमर का हो सकेगा पूरा इलाज, ग्रीन टी बनी वरदान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Dec 2025 05:52:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[अल्जाइमर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-215054-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-215054.png 863w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-215054-medium.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-215054-768x435.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />भूलने की बीमारी कहे जाने वाले अल्जाइमर रोग (एडी) के इलाज की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। मोहाली स्थित इंस्टीट्यूट आफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलाजी (आइएनएसटी) के विज्ञानियों ने नैनोपार्टिकल आधारित नई उपचार पद्धति विकसित की है। इसमें ग्रीन टी में पाए जाने वाले एक प्रोटीन को तीन अन्य प्रोटीन के साथ मिलाकर ऐसी &#8230;]]></description>
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<p>भूलने की बीमारी कहे जाने वाले अल्जाइमर रोग (एडी) के इलाज की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। मोहाली स्थित इंस्टीट्यूट आफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलाजी (आइएनएसटी) के विज्ञानियों ने नैनोपार्टिकल आधारित नई उपचार पद्धति विकसित की है। इसमें ग्रीन टी में पाए जाने वाले एक प्रोटीन को तीन अन्य प्रोटीन के साथ मिलाकर ऐसी दवा बनाई गई है, जो अल्जाइमर के कारण उत्पन्न कई समस्याओं को दूर करेगी। विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय इसे बड़ी उपलब्धि बता रहा है। पेटेंट प्रक्रिया और क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी शुरू कर दी गई है।</p>



<p>शोध टीम का नेतृत्व करने वाली आइएनएसटी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जीवन ज्योति पांडा बताती हैं कि नई पद्धति नैनोपार्टिकल्स पर आधारित है। इसमें ग्रीन टी में पाए जाने वाले एंटी आक्सिडेंट (ईजीसीजी) को मूड और तंत्रिका संचार से जुड़े न्यूरोट्रांसमीटर डोपामिन (ईडीटीएनपी) और एमिनो एसिड ट्रिप्टोफैन के साथ जोड़ा गया है। सभी तीन प्रोटीन के मिलने से आइएनएसटी में अपनी टीम के साथ डॉ. जीवन ज्योति (दाएं से चौथी) जागरण</p>



<p>ईजीसीजी- डोपामिन-ट्रिप्टोफैन (ईडीटीएनपी) नैनोपार्टिकल्स बना । इन नैनोपार्टिकल्स पर ब्रेन- डिराइव्ड न्यूरोट्राफिक फैक्टर (बीडीएनएफ) को भी जोड़ा गया, जिससे एक उन्नत नैनोप्लेटफार्म तैयार हुआ । यह न केवल मस्तिष्क में जमा विषैले एमिलाइड बीटा प्रोटीन को साफ करता है, बल्कि न्यूरांस के पुनर्जनन और उनकी कार्यक्षमता को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने बताया कि बीडीएनएफ न्यूरांस के जीवित रहने, बढ़ने और काम करने के लिए जरूरी एक प्रोटीन है। ईडीटीएनपी पर मिलाने से (बी-ईडीटीएनपी) एक ड्यूल एक्शन नैनोप्लेटफार्म बनता है जो न केवल न्यूरोटाक्सिक एमीलोइड बीटा एग्रीगेट्स (प्रोटीन के गुच्छे जो न्यूरल फंक्शन पर नकारात्मक असर डालते हैं) को साफ करता है, बल्कि न्यूरान को फिर से बनने में भी मदद करता है।</p>



<p><strong></strong>शोध में रायबरेली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एनआईपीईआर) के डॉ. अशोक कुमार दतुसालिया और गांधीनगर स्थित गुजरात बायोटेक्नोलाजी यूनिवर्सिटी की डॉ. नीशा सिंह ने सहयोग दिया है। डॉ. अशोक ने बताया कि प्रयोगशाला परीक्षण और चूहों पर ट्रायल में याददाश्त और सीखने की क्षमता डॉ. अशोक कुमार में सुधार देखा गया है। अल्जाइमर ग्रस्त मस्तिष्क में सूजन कम हुई और कोशिकाओं के अंदर संतुलन बहाल हुआ। कंप्यूटर सिमुलेशन ने हानिकारक प्रोटीन तोड़ने की पुष्टि की।</p>



<p><strong>पहले एक समस्या होती थी दूर, अब चार से मिलेगी राहत<br></strong>डॉ. जीवन ज्योति के अनुसार, अल्जाइमर के कारण दिमाग में प्रोटीन के गुच्छे बनते हैं, सूजन होती है, आक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है और दिमाग की कोशिकाएं मरने लगती हैं। पुरानी दवाएं सिर्फ एक समस्या को ठीक करती हैं, जबकि नई दवा चार प्रमुख समस्याओं पर काम करेगी, जिसमें एमिलाइड जमाव, आक्सीडेटिव तनाव, सूजन और तंत्रिका कोशिकाओं के क्षय अहम है। इन सभी के एक साथ आने से स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है। वह सामान्य इंसान की तरह सोच और कार्य नहीं कर पाता।</p>
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		<title>लक्षण दिखने से 10 साल पहले ही पता चल सकेगा अल्जाइमर का खतरा</title>
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		<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 08:01:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[अल्जाइमर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="577" height="326" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/fcvbbcc-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/fcvbbcc.jpg 577w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/fcvbbcc-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 577px) 100vw, 577px" />अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी अक्सर तब तक पता नहीं चलती, जब तक इसके लक्षण सामने न आने लगें- जैसे भूलने की आदत, सोचने की क्षमता का कम होना या रोजमर्रा के कामों में कठिनाई, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा भविष्यवाणी मॉडल तैयार किया है, जो इन समस्याओं के शुरू होने से लगभग 10 साल &#8230;]]></description>
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<p>अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी अक्सर तब तक पता नहीं चलती, जब तक इसके लक्षण सामने न आने लगें- जैसे भूलने की आदत, सोचने की क्षमता का कम होना या रोजमर्रा के कामों में कठिनाई, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा भविष्यवाणी मॉडल तैयार किया है, जो इन समस्याओं के शुरू होने से लगभग 10 साल पहले ही जोखिम का अनुमान लगा सकता है। यह खोज खास इसलिए है क्योंकि इससे समय रहते सावधानी बरतकर बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है।</p>



<p><strong>क्या है यह नया उपकरण?</strong></p>



<p>अमेरिका स्थित मेयो क्लिनिक के शोधकर्ताओं ने एक उन्नत उपकरण विकसित किया है, जिसे एक भविष्यवाणी मॉडल की तरह बनाया गया है। यह उपकरण कई महत्वपूर्ण कारकों को एक साथ जोड़कर यह अंदाजा लगाता है कि किसी व्यक्ति में आगे चलकर हल्का संज्ञानात्मक हानि या डिमेंशिया विकसित होने की संभावना कितनी है।</p>



<p><strong>उम्र और लिंग</strong></p>



<p>आनुवंशिक जोखिम, जैसे APOE e4 वेरिएंट</p>



<p>मस्तिष्क में एमिलॉयड प्रोटीन का स्तर, जिसे अल्जाइमर का प्राथमिक संकेत माना जाता है</p>



<p><strong>पीईटी स्कैन से हासिल सूचनाएं</strong></p>



<p>इन सभी संकेतकों को मिलाकर एक ऐसा जोखिम स्तर तैयार किया जाता है, जो किसी व्यक्ति के 10 वर्षों या पूरे जीवनकाल में संज्ञानात्मक गिरावट की संभावना बताता है।</p>



<p><strong>5,858 लोगों के डेटा पर आधारित अध्ययन</strong></p>



<p>यह अध्ययन द लैन्सेट न्यूरोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने 5,858 प्रतिभागियों के लंबे समय से एकत्र किए गए डेटा का विश्लेषण किया। ये आंकड़े अमेरिका के मिनेसोटा में चल रहे Mayo Clinic Study of Aging प्रोजेक्ट से लिए गए थे, जिसमें दशकों से मस्तिष्क स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने के संबंध को लेकर शोध किया जा रहा है।</p>



<p>APOE e4 जीन वाले लोगों- चाहे पुरुष हों या महिलाएं उनमें जीवनभर अल्जाइमर का जोखिम अधिक पाया गया।</p>



<p>महिलाएं उम्रभर अल्जाइमर या हल्की संज्ञानात्मक हानि के प्रति पुरुषों की तुलना में अधिक संवेदनशील हो सकती हैं।</p>



<p>PET स्कैन में एमिलॉयड स्तर जितना अधिक पाया गया, भविष्य में डिमेंशिया या स्मृति समस्याओं का खतरा उतना ही अधिक देखा गया।</p>



<p><strong>कैसे करता है मदद?</strong></p>



<p>पीईटी स्कैन की मदद से मस्तिष्क में जमा एमिलॉयड प्रोटीन को पहचाना जा सकता है। यह वही प्रोटीन है, जो अल्जाइमर से जुड़े शुरुआती बदलावों को दर्शाता है। नया उपकरण इस जानकारी को अन्य कारकों के साथ मिलाकर एक स्पष्ट जोखिम प्रोफाइल तैयार करता है।</p>



<p><strong>इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि:</strong></p>



<p>अगले 10 वर्षों में किसी व्यक्ति में हल्की संज्ञानात्मक हानि विकसित होगी या नहीं</p>



<p>या फिर उसके जीवनकाल में डिमेंशिया होने की संभावना कितनी है</p>



<p>इस तरह यह उपकरण डॉक्टरों और रोगियों, दोनों को यह समझने में मदद करता है कि कब हस्तक्षेप शुरू करना चाहिए- जैसे दवाइयां, नियमित मानसिक व्यायाम, शारीरिक सक्रियता या जीवनशैली में परिवर्तन।</p>



<p><strong>डॉक्टरों के लिए एक बड़ा कदम</strong></p>



<p>शोध टीम के अनुसार, यह मॉडल भविष्य में व्यक्तिगत देखभाल को बेहतर बनाने में अहम साबित हो सकता है। जैसे कोलेस्ट्रॉल का स्तर देखकर हार्ट अटैक का खतरा समझा जाता है, उसी तरह यह उपकरण भी व्यक्ति-विशेष के मस्तिष्क स्वास्थ्य का अंदाजा लगाने में मदद करेगा।</p>



<p>हालांकि यह अभी एक शोध आधारित उपकरण है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह अल्जाइमर की शुरुआती पहचान में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।</p>



<p>अल्जाइमर जैसी बीमारी का अभी कोई पूर्ण इलाज नहीं है, लेकिन शुरुआत में जोखिम का पता चल जाए तो इसकी प्रगति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। मेयो क्लिनिक द्वारा विकसित यह नया उपकरण भविष्य में मस्तिष्क स्वास्थ्य की निगरानी को अधिक सटीक और व्यक्तिगत बना सकता है, जिससे लोगों को समय रहते कदम उठाने में मदद मिलेगी।</p>
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