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	<title>अमेरिकी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>अमेरिकी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>अमेरिकी एफ-35 जेट की रफ्तार धीमी करेगा चीन, दुर्लभ खनिजों को बना रहा हथियार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Mar 2026 08:47:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी]]></category>
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					<description><![CDATA[चीन की सरकार बड़ी ही चालाकी से उन दुर्लभ खनिजों पर अपनी पकड़ बना रही है, जिनका इस्तेमाल आधुनिक सैन्य उपकरण बनाने में होता है। इसके जरिए चीन, अमेरिका के कई अत्याधुनिक हथियारों को बिना एक गोली चलाए ही बेअसर करने की रणनीति बना रहा है। वैश्विक तनाव और ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के &#8230;]]></description>
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<p>चीन की सरकार बड़ी ही चालाकी से उन दुर्लभ खनिजों पर अपनी पकड़ बना रही है, जिनका इस्तेमाल आधुनिक सैन्य उपकरण बनाने में होता है। इसके जरिए चीन, अमेरिका के कई अत्याधुनिक हथियारों को बिना एक गोली चलाए ही बेअसर करने की रणनीति बना रहा है।</p>



<p>वैश्विक तनाव और ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के बीच अमेरिका को चित करने के लिए चीन की रणनीति तैयार है। रेयर अर्थ खनिजों व टेक आपूर्ति शृंखला पर मजबूत पकड़ की बदौलत चीन बगैर युद्ध और बिना एक गोली चलाए भविष्य में अमेरिका के अत्याधुनिक एफ-35 फाइटर जेट की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार चीन का फोकस उन अहम कच्चे संसाधनों और तकनीकी सप्लाई चेन पर नियंत्रण बढ़ाने पर है, जिनके बिना आधुनिक सैन्य उपकरण बनाना मुश्किल हो जाता है।</p>



<p><strong>चीन का दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर पकड़<br></strong>विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी एफ-35 समेत कई उन्नत हथियार प्रणालियों में रेयर अर्थ खनिजों का व्यापक इस्तेमाल होता है। ये धातुएं जेट इंजन, सेंसर, रडार और मिसाइल सिस्टम के लिए बेहद जरूरी मानी जाती हैं। चीन पहले से ही दुनिया में इन खनिजों की प्रोसेसिंग का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है और हाल के वर्षों में इनके निर्यात पर कड़े नियम भी लागू किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार चीन की नई औद्योगिक और तकनीकी योजनाओं में एआई, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ-साथ रेयर अर्थ संसाधनों पर पकड़ मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।</p>



<p><strong>अमेरिका भी खतरे से वाकिफ<br></strong>अमेरिका भी 2027 तक रक्षा क्षेत्र में चीनी रेयर अर्थ खनिजों पर निर्भरता घटाने की योजना बना रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नई खदानें विकसित करने और प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने में समय लगेगा, लेकिन इस संबंध में योजना बन चुकी है। विश्लेषकों के अनुसार आने वाले समय में महाशक्तियों के बीच मुकाबला केवल हथियारों से नहीं बल्कि संसाधनों और आपूर्ति शृंखला के नियंत्रण से भी तय हो सकता है, जहां बिना गोली चलाए भी रणनीतिक बढ़त हासिल की जा सकती है।</p>
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		<title>ईरान की तेल तस्करी पर अमेरिकी कार्रवाई, भारत की दो कंपनियां भी नए प्रतिबंधों की सूची में</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 07:51:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान की तेल तस्करी और गुप्त व्यापार को रोकने के लिए नए बड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें भारत की दो कंपनियां टीआर6 पेट्रो और आरएन शिप मैनेजमेंट सहित दुनियाभर की कुल 17 कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि ये कदम इसलिए उठाया गया हैं ताकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम, सेना और &#8230;]]></description>
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<p>अमेरिका ने ईरान की तेल तस्करी और गुप्त व्यापार को रोकने के लिए नए बड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें भारत की दो कंपनियां टीआर6 पेट्रो और आरएन शिप मैनेजमेंट सहित दुनियाभर की कुल 17 कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि ये कदम इसलिए उठाया गया हैं ताकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम, सेना और आतंकवादी समूहों को पैसा नहीं भेज सके।</p>



<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान की तेल तस्करी और गुप्त व्यापार नेटवर्क को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों में भारत की एक शिपिंग कंपनी और एक पेट्रोलियम ट्रेडर समेत कई देशों की 17 कंपनियां, व्यक्ति और जहाज शामिल हैं। मामले में अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि ये कदम इसलिए उठाए गए हैं ताकि उस पैसों के प्रवाह को रोका जा सके जिससे ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम, सेना और आतंकवादी समूहों को समर्थन देता है।</p>



<p>बता दें कि भारत की पेट्रोलियम ट्रेडर कंपनी टीआर6 पीईटीआरओ पर आरोप है कि उसने अक्तूबर 2024 से जून 2025 के बीच ईरान से आठ मिलियन डॉलर से अधिक का बिटुमेन खरीदा। अमेरिका के अनुसार यह ईरानी तेल की खरीद की श्रेणी में आता है, जो प्रतिबंधों का उल्लंघन है। इसलिए कंपनी को कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में डाल दिया गया।</p>



<p><strong>भारतीय शिपिंग कंपनी आरएन शिप प्रबंधन पर भी कार्रवाई</strong></p>



<p>दूसरी तरफ अमेरिकी द्वारा लगाए गए प्रतिबंध की श्रेणी में मुंबई स्थित आरएन शिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है। इस कंपनी पर आरोप है कि उसने ऐसे जहाज चलाए जो ईरानी कच्चा तेल दूसरी कंपनियों के लिए गुप्त रूप से ले जाते थे। कंपनी से जुड़े दो भारतीय नागरिक जैर हुसैन इकबाल हुसैन सैयद और जुल्फिकार हुसैन रिजवी सैयद को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह कंपनी उन कई देशों के नेटवर्क का हिस्सा मानी जा रही है, जिनमें यूएई, पनामा, जर्मनी, ग्रीस और गाम्बिया शामिल हैं, जो ईरान के लिए चोरी-छिपे तेल परिवहन में मदद करते हैं।</p>



<p><strong>ईरान की एयरलाइन पर भी कार्रवाई</strong></p>



<p>इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान की निजी एयरलाइन माहान एयर और उसकी सहायक कंपनी यज्द इंटरनेशनल एयरवेज पर प्रतिबंध बढ़ाए हैं। दावा है कि एयरलाइन ईरान की आईआरजीसी-कोड्स फोर्स के साथ मिलकर सीरिया और लेबनान में हथियार और लड़ाके पहुंचाती है। माहान एयर के कई विमानों को ब्लॉक्ड प्रॉपर्टी घोषित कर दिया गया है।</p>



<p><strong>अमेरिका का दावा और प्रतिबंधों का प्रभाव, समझिए</strong></p>



<p>अमेरिका के मुताबिक, ईरान हाल ही में इस्राइल के साथ 12-दिवसीय युद्ध में हार के बाद अपनी सेना को फिर से खड़ा करने के लिए तेल के इस गुप्त कारोबार पर निर्भर है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान की आय रोकना उसके परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए जरूरी है। अब बात अगर इन प्रतिबंधों से पड़ने वाले प्रभावों की करें तो इन कंपनियों और व्यक्तियों की संपत्ति अमेरिका में फ्रीज कर दी गई है।</p>



<p>ऐसे में अमेरिकी नागरिक और कंपनियां इनके साथ कोई भी व्यापार नहीं कर सकेंगे। साथ ही प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर कड़े जुर्माने या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। मामले में अमेरिका का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि ईरान को अपने व्यवहार में बदलाव लाने के लिए मजबूर करना है।</p>
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		<title>अमेरिकी टैरिफ के असर से निपटने के लिए केंद्र का बड़ा कदम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 08:21:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी]]></category>
		<category><![CDATA[टैरिफ]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका के भारी टैरिफ से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने 45,000 करोड़ रुपये की दो योजनाएं मंजूर की हैं। 25,060 करोड़ के निर्यात संवर्धन मिशन से वस्त्र, चमड़ा, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा, जबकि 20,000 करोड़ की ऋण गारंटी योजना के तहत निर्यातकों को बिना संपार्श्विक ऋण &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अमेरिका के भारी टैरिफ से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने 45,000 करोड़ रुपये की दो योजनाएं मंजूर की हैं। 25,060 करोड़ के निर्यात संवर्धन मिशन से वस्त्र, चमड़ा, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा, जबकि 20,000 करोड़ की ऋण गारंटी योजना के तहत निर्यातकों को बिना संपार्श्विक ऋण सहायता मिलेगी। यह कदम निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद करेगा।</p>



<p>केंद्र सरकार ने अमेरिका के भारी टैरिफ के असर से निपटने में निर्यातकों की मदद के लिए 45,000 करोड़ रुपये की दो योजनाओं को मंजूरी दी है। इसमें 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात संवर्धन मिशन का मकसद भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा क्षमता को मजबूत करना है। दूसरी, निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीएसई) है, जिसमें 20,000 करोड़ रुपये तक की संपार्श्विक-मुक्त ऋण सहायता सुनिश्चित की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ये निर्णय किए गए।</p>



<p>निर्यात संवर्धन मिशन के तहत अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित क्षेत्रों वस्त्र, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पाद को मदद दी जाएगी। इसमें खासकर पहली बार निर्यात करने वाले और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए सूक्ष्म, लघु, मध्य उद्यम (एमएसएमई) को मदद मिलेगी। यह मिशन इस वित्त वर्ष से शुरू होगा और छह वित्त वर्ष के लिए होगा। इस कदम से निर्यातकों को अमेरिका के लगाए गए भारी टैरिफ से निपटने में मदद मिलेगी।</p>



<p>केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि मिशन को दो उपयोजनाओं 10,401 करोड़ के निर्यात प्रोत्साहन एवं 14,659 करोड़ रुपये के निर्यात दिशा योजना के जरिये क्रियान्वित किया जाएगा। यह व्यापक मिशन है और यह संपूर्ण निर्यात तंत्र को समर्थन देगा। इस कदम से घरेलू निर्यातकों को अमेरिकी टैरिफ से बचाने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि अमेरिका ने 27 अगस्त से भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगा दिया है।</p>



<p><strong>भारतीय उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच होगी आसान</strong></p>



<p>निर्यात प्रोत्साहन: ब्याज अनुदान, निर्यात लेनदारी लेखा क्रय, गारंटी, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड और नए बाजारों में विविधीकरण के लिए ऋण वृद्धि सहायता जैसे कई साधनों के जरिये एमएसएमई के लिए किफायती व्यापार वित्त तक पहुंच में सुधार पर केंद्रित है।</p>



<p>निर्यात दिशा: गैर-वित्तीय सक्षमताओं पर केंद्रित है, जो बाजार की तैयारी और प्रतिस्पर्धा क्षमता को बढ़ाती हैं। इसमें निर्यात गुणवत्ता और अनुपालन सहायता, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग, पैकेजिंग के लिए सहायता और व्यापार मेलों में भागीदारी, निर्यात भंडारण और लॉजिस्टिक्स, अंतर्देशीय परिवहन प्रतिपूर्ति व व्यापार खुफिया और क्षमता निर्माण पहल शामिल हैं।</p>



<p><strong>क्रेडिट गारंटी योजना में 100 फीसदी कवरेज</strong></p>



<p>क्रेडिट गारंटी योजना (सीजीएसई) के तहत राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लि. (एनसीजीटीसी) की ओर से सदस्य ऋणदाता संस्थानों को 100 प्रतिशत क्रेडिट गारंटी कवरेज दिया जाएगा, ताकि एमएसएमई सहित पात्र निर्यातकों को 20,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त क्रेडिट सुविधाएं दी जा सकें। योजना वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) की ओर से लागू की जाएगी। इससे भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ने और नए व उभरते बाजारों में विविधीकरण को समर्थन मिलने की उम्मीद है। योजना में सुचारू व्यावसायिक संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।</p>



<p><strong>अहम खनिजों पर युक्तिसंगत रॉयल्टी</strong></p>



<p>वैष्णव ने बताया, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के मकसद से ग्रेफाइट, सीजियम, रुबिडियम और जिरकोनियम पर रॉयल्टी दरों को युक्तिसंगत बनाने को मंजूरी दी है। इससे चारों खनिजों के ब्लॉकों की नीलामी को बढ़ावा मिलेगा। इससे इन खनिजों के साथ पाए जाने वाले अन्य महत्वपूर्ण खनिजों जैसे लिथियम, टंगस्टन, आरईईएस और नियोबियम को भी प्राप्त किया जा सकेगा। इन खनिजों का उपयोग परमाणु ऊर्जा, एयरोस्पेस, स्वास्थ्य सेवा, इलेक्ट्रिक वाहनों, घड़ियों, जीपीएस प्रणालियों व चिकित्सा उपकरणों में किया जाता है।</p>



<p><strong>डीजीएफटी कार्यान्वयन एजेंसी का काम करेगा</strong></p>



<p>निर्यात संवर्धन मिशन को निर्यात बाधाएं दूर करने के लिए तैयार किया गया है। इसके लिए  विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। आवेदन से वितरण तक की सभी प्रक्रियाएं एकीकृत समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रबंधित की जाएंगी।</p>
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		<item>
		<title>मलयेशिया में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को से मिले भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Oct 2025 08:54:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने मलयेशिया में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की। मलयेशिया में आयोजित किए जा रहे आसियान सम्मेलन से इतर दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और व्यापार समझौते पर बात हुई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने मलयेशिया में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की। मलयेशिया में आयोजित किए जा रहे आसियान सम्मेलन से इतर दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और व्यापार समझौते पर बात हुई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि ‘सुबह कुआलालंपुर में अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रूबियो से मिलकर खुशी हुई। इस मुलाकात में हमारे द्विपक्षीय संबंधों के साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत हुई।’</p>



<p><strong>मार्को रूबियो ने कहा- भारत की कीमत पर पाकिस्तान से संबंध नहीं</strong></p>



<p>दोनों नेताओं की मुलाकात का समय बेहद अहम है। दरअसल अमेरिकी टैरिफ के चलते दोनों देशों के रिश्तों में थोड़ा खिंचाव है। हालांकि हालात को संभालने की दोनों तरफ से कोशिश हो रही है। मलयेशिया में अपने हालिया बयान में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि भारत से रिश्तों की कीमत पर पाकिस्तान से संबंध मजबूत नहीं करेगा अमेरिका। रूबियो ने कहा कि ‘भारत को समझना चाहिए कि हमें कई देशों के साथ संबंध रखने की जरूरत है। हम पाकिस्तान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बढ़ाने का अवसर देखते हैं।’ मार्को रूबियो ने दोहराया कि अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वह अमेरिका और भारत के बीच गहरे, ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण संबंधों के नुकसान पर नहीं हैं।</p>



<p><strong>भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी</strong></p>



<p>भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत हो रही है। हालांकि कुछ मुद्दों को लेकर दोनों देशों में अभी सहमति नहीं बन पा रही है। हाल ही में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ‘हम यूरोपीय संघ के साथ सक्रिय बातचीत कर रहे हैं। हम अमेरिका से बात कर रहे हैं, लेकिन हम जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करते और न ही हम कोई समय सीमा तय करके या बंदूक की नोंक पर कोई समझौता करते हैं।’</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अमेरिकी बीमा कंपनियों ने अदाणी समूह की कंपनियों में किया भारी निवेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Oct 2025 09:58:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी]]></category>
		<category><![CDATA[कंपनियों]]></category>
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					<description><![CDATA[अदाणी समूह की कंपनियों में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का निवेश इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में ये खुलासा किया, जिस पर विवाद हुआ। हालांकि आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि एलआईसी नहीं बल्कि अमेरिकी बीमा कंपनियां ने अदाणी समूह की कंपनियों में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अदाणी समूह की कंपनियों में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का निवेश इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में ये खुलासा किया, जिस पर विवाद हुआ। हालांकि आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि एलआईसी नहीं बल्कि अमेरिकी बीमा कंपनियां ने अदाणी समूह की कंपनियों में खूब निवेश किया है।</p>



<p><strong>आंकड़ो से सामने आई जानकारी</strong></p>



<p>आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि जून, 2025 में, अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा 57 करोड़ अमेरिकी डॉलर (5,000 करोड़ रुपये) के निवेश के एक महीने बाद, अमेरिका स्थित एथेन इंश्योरेंस ने अदाणी के मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में 6,650 करोड़ रुपये (75 करोड़ डॉलर) का निवेश किया। एथेन की पैरेंट कंपनी अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट की जून 2023 की स्टेटमेंट के अनुसार, कंपनी के प्रबंधित फंड्स और अन्य सहयोगी निवेशकों ने भी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MAIL) में करीब 75 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश किया।</p>



<p>कई वैश्विक कर्जदाताओं जैसे डीबीएस बैंक, डीजेड बैंक, रोबोबैंक, बैंक सिनोपैक कंपनी लिमिटेड ने भी अदाणी समूह की अदाणी एनर्जी लिमिटेड में करीब 25 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की अगस्त की एक रिपोर्ट के अनुसार, समूह ने वर्ष की पहली छमाही में बंदरगाह इकाई (एपीएसईजेड), नवीकरणीय ऊर्जा इकाई (एजीईएल), प्रमुख कंपनी (अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड) और बिजली पारेषण इकाई (अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड) में कुल मिलाकर 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की नई ऋण सुविधाओं पर हस्ताक्षर किए।</p>



<p><strong>अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट से हुआ हंगामा</strong></p>



<p>गौरतलब है कि वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि सरकारी अधिकारियों ने एलआईसी के निवेश को प्रभावित किया और अदाणी समूह की कंपनियों में निवेश कराया। शनिवार को एलआईसी ने बयान जारी कर वॉशिंगटन पोस्ट में किए गए दावे को फर्जी, आधारहीन और सच्चाई से परे बताया। एलआईसी ने कहा कि अदाणी समूह की कंपनियों में निवेश का फैसला स्वतंत्र तौर पर लिया गया और बोर्ड की नीतियों के तहत ही इसकी मंजूरी दी थी।</p>



<p>भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में जांच-पड़ताल के आधार पर विभिन्न कंपनियों में निवेश के फैसले लिए गए हैं। भारत की शीर्ष 500 कंपनियों में इसका निवेश मूल्य 2014 से 10 गुना बढ़कर 1.56 लाख करोड़ रुपये से 15.6 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अदाणी समूह में इसका निवेश समूह के कुल 2.6 लाख रुपये के कर्ज के दो प्रतिशत से भी कम है। इसके अलावा, अदाणी समूह एलआईसी की सबसे बड़ी होल्डिंग नहीं है, बल्कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, आईटीसी और टाटा समूह हैं।</p>



<p>एलआईसी ने बताया कि उसके पास अदाणी के चार प्रतिशत (60,000 करोड़ रुपये मूल्य के) शेयर हैं, जबकि रिलायंस में 6.94 प्रतिशत (1.33 लाख करोड़ रुपये), आईटीसी लिमिटेड में 15.86 प्रतिशत (82,800 करोड़ रुपये), एचडीएफसी बैंक में 4.89 प्रतिशत (64,725 करोड़ रुपये) और एसबीआई में 9.59 प्रतिशत (79,361 करोड़ रुपये) शेयर हैं। एलआईसी के पास टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में 5.02 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसका मूल्य 5.7 लाख करोड़ रुपये है।</p>
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		<title>अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने वाणिज्य सचिव से की मुलाकात</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Oct 2025 08:20:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका के नए राजदूत पद के नामित सर्जियो गोर ने भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर चर्चा हुई। पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हालिया बातचीत से रिश्तों में सुधार की उम्मीद। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूती देने की दिशा &#8230;]]></description>
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<p>अमेरिका के नए राजदूत पद के नामित सर्जियो गोर ने भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर चर्चा हुई। पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हालिया बातचीत से रिश्तों में सुधार की उम्मीद।</p>



<p>भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूती देने की दिशा में नई शुरुआत हुई है। अमेरिका के नए राजदूत पद के नामित सर्जियो गोर ने रविवार को भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच चल रहे आर्थिक संबंधों पर चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य व्यापार समझौते को लेकर जारी बातचीत को आगे बढ़ाना था।</p>



<p>सर्जियो गोर अपने छह दिवसीय भारत दौरे पर हैं। वे हाल ही में अमेरिकी सीनेट द्वारा भारत के लिए नए राजदूत के रूप में नियुक्त किए गए हैं। उनके साथ अमेरिका के डेप्युटी सेक्रेटरी फॉर मैनेजमेंट एंड रिसोर्सेज माइकल जे. रिगास भी भारत आए हैं। गोर को अगस्त 2025 में भारत के लिए अमेरिकी राजदूत के रूप में नामित किया गया था। गोर ट्रंप के करीबी सहयोगियों में से एक हैं और व्हाइट हाउस में पर्सनल डायरेक्टर के रूप में काम कर चुके हैं।</p>



<p><strong>पीएम मोदी, विदेश मंत्री से भी की मुलाकात</strong></p>



<p>गोर ने शनिवार को अपने दौरे की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, और विदेश सचिव विक्रम मिस्री से भी मुलाकात की। गोर ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत यात्रा के दौरान मैंने वाणिज्य सचिव अग्रवाल से मुलाकात की और अमेरिका-भारत के आर्थिक संबंधों पर चर्चा की, जिसमें अमेरिका में निवेश बढ़ाने के अवसरों पर भी बात हुई। प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद गोर ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता है।</p>



<p>हालांकि हाल के महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों में कुछ तनाव भी देखा गया था। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क को दोगुना कर 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया था, जिसमें रूसी कच्चे तेल की खरीद पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत ड्यूटी भी शामिल थी। भारत ने इस कदम को अनुचित और अन्यायपूर्ण बताया था।</p>



<p><strong>H1B वीजा नीति में बदलावों</strong></p>



<p>इसके अलावा, H1B वीजा नीति में ट्रंप प्रशासन के बदलावों से भी भारत ने असंतोष जताया था। हालिया हफ्तों में प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई फोन वार्ताओं ने दोनों देशों के बीच रिश्तों में सुधार की उम्मीदें जगा दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन बातचीतों के बाद व्यापार समझौते की वार्ता फिर से शुरू हो गई है और सकारात्मक नतीजों की संभावना बढ़ गई है।</p>



<p> </p>
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		<title>अमेरिकी सेना का ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर क्रैश, इलाके में फैली आग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Sep 2025 08:08:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के जॉइंट बेस लुईस-मैककॉर्ड के पास अमेरिकी सेना के MH-60 ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर का क्रैश हो गया। इस हेलिकॉप्टर में चार सैनिक सवार थे, जो 160वें स्पेशल ऑपरेशंस एविएशन रेजिमेंट के थे। यह अमेरिकी सेना के जॉइंट बेस हेडक्वार्टर के अधीन आता &#8230;]]></description>
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<p>अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के जॉइंट बेस लुईस-मैककॉर्ड के पास अमेरिकी सेना के MH-60 ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर का क्रैश हो गया। इस हेलिकॉप्टर में चार सैनिक सवार थे, जो 160वें स्पेशल ऑपरेशंस एविएशन रेजिमेंट के थे। यह अमेरिकी सेना के जॉइंट बेस हेडक्वार्टर के अधीन आता है। यह हादसा बुधवार रात करीब नौ बजे हुआ। मामले में अमेरिकी सेना की ओर से गुरुवार को जारी बयान में बताया गया कि क्रैश की वजह क्या थी, यह अभी पता नहीं चला है। हालांकि मामले की जांच चल रही है। सेना ने यह भी कहा कि यह अभी एक सक्रिय और जारी स्थिति है।</p>



<p><strong>हेलिकॉप्टर क्रैश के चलते इलाके में फैली आग<br></strong>मीडिया रिपोर्ट की माने तो क्रैश की वजह से इलाके में जंगल में आग लग गई, जो गुरुवार सुबह तक करीब एक एकड़ (लगभग 0.4 हेक्टेयर) क्षेत्र में फैल चुकी थी। वॉशिंगटन के प्राकृतिक संसाधन विभाग (डीएनआर) ने यह जानकारी दी। आग बुझाने के लिए सेना, फायर ब्रिगेड और अन्य एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।</p>



<p>वहीं मामले में थर्स्टन काउंटी के शेरिफ डेरिक सैंडर्स ने बताया कि हेलिकॉप्टर के मलबे का पता लगा लिया गया है, लेकिन इलाके में आग होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा है। उन्होंने कहा कि सेना और स्थानीय एजेंसियां मिलकर पूरा प्रयास कर रही हैं कि जल्द से जल्द सैनिकों तक पहुंचा जा सके।</p>
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		<title>SpaceX ने नए अमेरिकी जासूस समूह के लिए लॉन्च किए उपग्रह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 May 2024 06:57:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी]]></category>
		<category><![CDATA[उपग्रह]]></category>
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					<description><![CDATA[स्पेसएक्स ने बुधवार को अंतरिक्ष-आधारित निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से एक नए अमेरिकी खुफिया नेटवर्क के हिस्से के रूप में परिचालन जासूसी उपग्रहों (operational spy satellites) का पहला सेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया। फाल्कन 9 रॉकेट ने बुधवार सुबह 4 बजे EDT पर दक्षिणी कैलिफोर्निया में वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से उड़ान भरी। इस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>स्पेसएक्स ने बुधवार को अंतरिक्ष-आधारित निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से एक नए अमेरिकी खुफिया नेटवर्क के हिस्से के रूप में परिचालन जासूसी उपग्रहों (operational spy satellites) का पहला सेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया।</p>



<p>फाल्कन 9 रॉकेट ने बुधवार सुबह 4 बजे EDT पर दक्षिणी कैलिफोर्निया में वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से उड़ान भरी।</p>



<p>इस साल की शुरुआत में, रिपोर्टों से पता चला कि स्पेसएक्स, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन के सहयोग से, एक व्यापक कक्षीय प्रणाली बनाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रीय टोही कार्यालय (एनआरओ) के लिए सैकड़ों उपग्रहों का निर्माण कर रहा है जो पृथ्वी पर लगभग कहीं भी जमीनी लक्ष्यों को तुरंत पहचानने में सक्षम है।</p>



<p>NRO ने कहा कि यह लॉन्च एनआरओ के प्रवर्धित सिस्टम (proliferated systems ) का पहला लॉन्च था जिसमें उत्तरदायी संग्रह और तेजी से डेटा वितरण शामिल था।</p>



<p>इसके अतिरिक्त, एनआरओ ने अपने प्रसार वास्तुकला का समर्थन करने के लिए 2024 में लगभग छह लॉन्च की योजना बनाई है, अतिरिक्त लॉन्च 2028 तक जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, एजेंसी ने इस मिशन के दौरान तैनात उपग्रहों की विशिष्ट संख्या का खुलासा नहीं किया।</p>



<p>इस उपग्रह नेटवर्क का विकास अमेरिकी सरकार की अपने कुछ मिशनों के लिए एलन मस्क के स्पेसएक्स पर बढ़ती निर्भरता को उजागर करता है।</p>



<p>स्पेसएक्स ने न केवल अमेरिकी रॉकेट लॉन्च बाजार पर अपना दबदबा बनाया है, बल्कि अपने स्टारलिंक नेटवर्क के साथ वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा उपग्रह ऑपरेटर भी बन गया है।</p>



<p><a href="https://www.khojle.com/?utm_source=jagranhindi&amp;utm_medium=referral&amp;utm_campaign=midarticle" target="_blank" rel="noreferrer noopener"></a></p>
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		<item>
		<title>उत्तर कोरिया की मिसाइलों में मिले अमेरिकी और यूरोपीय कंपनी के पार्ट्स</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Feb 2024 07:31:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर कोरिया]]></category>
		<category><![CDATA[मिसाइलों]]></category>
		<category><![CDATA[यूरोपीय कंपनी]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तर कोरिया की मिसाइलों से रूस के जरिए यूक्रेन पर हमला किए जा रहे हैं। वहीं, मिसाइल में मौजूद कई पार्ट्स अमेरिकी और यूरोपीय कंपनी ने निर्मित किए हैं। ब्रिटेन &#160;स्थित जांच संगठन कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च या सीएआर ने जनवरी में यूक्रेन के खार्किव से बरामद उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइल के अवशेषों की जांच की। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>उत्तर कोरिया की मिसाइलों से रूस के जरिए यूक्रेन पर हमला किए जा रहे हैं। वहीं, मिसाइल में मौजूद कई पार्ट्स अमेरिकी और यूरोपीय कंपनी ने निर्मित किए हैं।</p>



<p>ब्रिटेन &nbsp;स्थित जांच संगठन कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च या सीएआर ने जनवरी में यूक्रेन के खार्किव से बरामद उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइल के अवशेषों की जांच की।</p>



<p>जांच में पाया गया कि मिसाइलों में मौजूद 290 पार्ट्स में से 75 प्रतिशत पार्ट्स अमेरिकी कंपनी ने डिजाइन की है। वहीं, 16 प्रतिशत पार्ट्स को यूरोपीय कंपनी द्वारा निर्मित किया गया। 9 प्रतिशत पार्ट्स को एशिया में डिजाइन किया गया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पश्चिमी देशों से सैन्य सामग्री खरीद रहा उत्तर कोरिया: सीएआर</h3>



<p>इससे पहले &nbsp;कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च ने जानकारी दी थी कि यूक्रेन पर हमला करने के लिए रूस ने जिस ईरान में निर्मित ड्रोन का इस्तेमाल किया था, उस ड्रोन के 82 प्रतिशत पार्ट्स अमेरिका की कंपनी ने तैयार किए थे।</p>



<p>रिसर्च में यह भी जानकारी सामने आई की इन यूक्रेन पर हमले किए जा रहे मिसाइल को 2021 और 2023 के बीच बनाया गया है। वहीं, मिसाइलों को मार्च 2023 के बाद एसेंबल किया गया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अमेरिका के प्रतिबंधों का उत्तर कोरिया पर कोई असर नहीं</h3>



<p>पश्चिमी देश खासकर अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया पर बैलिस्टिक मिसाइलों के उत्पादन और अन्य तरह के प्रतिबंध लगाए हैं, फिर भी रूस लगातार उत्तर कोरिया के साथ अपने संबंध बेहतर बनाने की कोशिश में जुटा है। यूक्रेन से लड़ने के लिए रूस लगातार ईरान और उत्तर कोरिया से सैन्य सामग्री खरीदता आया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सैन्य सामग्रियों का आदान-प्रदान करे रहे रूस- उत्तर कोरिया</h3>



<p>अमेरिका ने पिछले महीने पुष्टि की थी कि &nbsp; रूस यूक्रेन के शहरों पर उत्तर कोरियाई मिसाइल दाग रहा है। पेंटागन के महानिरीक्षक द्वारा पिछले सप्ताह प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर कोरिया ने संभवत पिछले वर्ष के दौरान रूस को लाखों राउंड तोपखाने (आर्टिलरी) खरीदे।</p>



<p>वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने पिछले महीने कहा था कि रूस से उत्तर कोरिया रूसी लड़ाकू विमान, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, बख्तरबंद वाहन, बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन उपकरण, युद्ध सामग्री और अन्य उन्नत प्रौद्योगिकियों हित सैन्य सहायता भी मांग सकता है।</p>
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		<item>
		<title>कल भारत दौरे पर आएंगे अमेरिकी उप विदेश मंत्री रिचर्ड वर्मा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Feb 2024 09:39:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिकी]]></category>
		<category><![CDATA[उप विदेश मंत्री रिचर्ड वर्मा]]></category>
		<category><![CDATA[भारत दौरे]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका के उप विदेश मंत्री रिचर्ड वर्मा 18 से 23 फरवरी तक भारत, मालदीव और श्रीलंका की यात्रा करेंगे। इस दौरान वह हिंद-प्रशांत साझेदार के बीच सहयोग को भी मजबूत करेंगे। कल भारत दौरे पर आएंगे रिचर्ड वर्मा अपनी यात्रा के दौरान रिचर्ड वर्मा सबसे पहले भारत की यात्रा करेंगे। भारत में वह आर्थिक विकास, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अमेरिका के उप विदेश मंत्री रिचर्ड वर्मा 18 से 23 फरवरी तक भारत, मालदीव और श्रीलंका की यात्रा करेंगे। इस दौरान वह हिंद-प्रशांत साझेदार के बीच सहयोग को भी मजबूत करेंगे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कल भारत दौरे पर आएंगे रिचर्ड वर्मा</h2>



<p>अपनी यात्रा के दौरान रिचर्ड वर्मा सबसे पहले भारत की यात्रा करेंगे। भारत में वह आर्थिक विकास, सुरक्षा और प्रौद्योगिकी सहित कई मुद्दों पर अमेरिकी-भारत वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, व्यापारिक नेताओं और उद्यमियों से मुलाकात करेंगे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">भारत सहित इन देशों की करेंगे यात्रा</h2>



<p>अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि प्रबंधन और संसाधन राज्य के उप सचिव रिचर्ड आर वर्मा इनमें से प्रत्येक के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोग को मजबूत करने के लिए 18 से 23 फरवरी को भारत, मालदीव और श्रीलंका की यात्रा करेंगे। बयान में कहा गया है कि उनकी यह यात्रा एक स्वतंत्र, खुले, सुरक्षित और समृद्ध क्षेत्र के लिए अमेरिका की स्थायी प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अमेरिकी विदेश मंत्री से मिले जयशंकर</h2>



<p>वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को जर्मनी में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और ब्रिटिश समकक्ष डेविड कैमरन सहित प्रमुख नेताओं के साथ द्विपक्षीय सहयोग और प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के मौके पर हुई।</p>



<p>जयशंकर ने एक्स पोस्ट में कहा कि ब्लिंकन के साथ बैठक प्रमुख द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ पश्चिम एशिया, यूक्रेन और हिंद-प्रशांत की स्थिति पर केंद्रित थी। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों में जारी प्रगति की समीक्षा की गई। समझा जाता है कि दोनों ने भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।</p>
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