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	<title>अमेरिका-ईरान &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>अमेरिका-ईरान &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>अमेरिका-ईरान के बीच आज से लागू हो सकता है सीजफायर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 08:30:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका-ईरान]]></category>
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					<description><![CDATA[मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच सीजफायर की खबर सामने आ रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर का प्लान मिला है। यह प्लान सोमवार से लागू हो सकता है, जिसके बाद ईरान होर्मुज को फिर से खोल सकता है। रॉयटर्स ने &#8230;]]></description>
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<p>मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच सीजफायर की खबर सामने आ रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर का प्लान मिला है। यह प्लान सोमवार से लागू हो सकता है, जिसके बाद ईरान होर्मुज को फिर से खोल सकता है।</p>



<p>रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच दुश्मनी खत्म करने का फ्रेमवर्क पाकिस्तान ने तैयार किया है। जिसके बाद पाकिस्तान ने इसे रातों-रात ईरान और अमेरिका के साथ शेयर किया है। जिसमें तुरंत सीजफायर के बाद क कॉम्प्रिहेंसिव एग्रीमेंट के साथ टू-लेयर अप्रोच की आउटलाइन है।</p>



<p>सोर्स ने कहा, &#8220;सभी एलिमेंट्स पर आज सहमति होनी चाहिए, शुरुआती अंडरस्टैंडिंग को पाकिस्तान के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से अंतिम रूप दिया गया है, जिसे अब एक सहमति पत्र (MoU) के रूप में तैयार किया जाएगा। बातचीत की इस प्रक्रिया में पाकिस्तान एकमात्र &#8216;कम्युनिकेशन चैनल&#8217; की भूमिका निभा रहा है।&#8221;</p>



<h2 class="wp-block-heading">45 दिन के सीजफायर पर चल रही बातचीत</h2>



<p>इससे पहले रविवार को एक्सियोस न्यूज ने रिपोर्ट किया कि 45 दिन के संभावित सीजफायर को लेकर अमेरिका-ईरान बातचीत कर रहे हैं। जिससे युद्ध हमेशा के लिए खत्म हो सकता है।</p>



<p>रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ, फील्ड मार्शल असीम मुनीर, अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस, स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची के साथ पूरी रात संपर्क में रहे।</p>



<p>प्रस्ताव के तहत, सीजफायर तुरंत लागू होगा, जिससे होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल जाएगा, और एक बड़े समझौते को फाइनल करने के लिए 15-20 दिन का समय होगा। इस डील को टेंटेटिवली इस्लामाबाद अकॉर्ड कहा जा रहा है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">नहीं आई ईरान-अमेरिका की प्रतिक्रिया</h2>



<p>बता दें कि सीजफायर को लेकर अमेरिका और ईरानी अधिकारियों की ओर से तुरंत कोई जवाब नहीं आया है। पाकिस्तान के फॉरेन ऑफिस के स्पोक्सपर्सन ताहिर अंद्राबी ने कमेंट करने से मना कर दिया।</p>



<h2 class="wp-block-heading">ईरानी अधिकारियों ने सीजफायर के लिए रखी ये शर्त</h2>



<p>ईरानी अधिकारियों ने पहले रॉयटर्स को बताया था कि तेहरान इस गारंटी के साथ परमानेंट सीजफायर चाहता है कि अमेरिका और इजरायल उस पर दोबारा हमला नहीं करेंगे। उन्होंने कहा है कि ईरान को पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र समेत मीडिएटर्स से मैसेज मिले हैं।</p>



<p>सोर्स ने कहा कि फाइनल एग्रीमेंट में ईरान के कमिटमेंट शामिल होने की उम्मीद है कि वह बैन में राहत और फ्रीज किए गए एसेट्स को रिलीज करने के बदले न्यूक्लियर वेपन्स का पीछा नहीं करेगा।</p>



<p>दो पाकिस्तानी सोर्स ने कहा कि ईरान ने अभी तक कमिट नहीं किया है। सिविलियन और मिलिट्री की तरफ से ज्यादा कोशिशें होने के बावजूद, ईरान ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">ईरान ने नहीं दिया जवाब</h2>



<p>एक सोर्स ने कहा, &#8220;ईरान ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है,&#8221; और आगे कहा कि पाकिस्तान, चीन और यूनाइटेड स्टेट्स के सपोर्ट वाले टेम्पररी सीजफायर के प्रपोजल पर अब तक कोई कमिटमेंट नहीं आया है। कमेंट के लिए रिक्वेस्ट पर चीनी अधिकारियों की तरफ से तुरंत कोई जवाब नहीं आया।</p>



<p>यह नया डिप्लोमैटिक कदम बढ़ती दुश्मनी के बीच आया है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट के जरिए शिपिंग में रुकावट को लेकर चिंता बढ़ गई है, जो ग्लोबल तेल सप्लाई के लिए एक जरूरी रास्ता है।</p>
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		<title>अमेरिका-ईरान तनाव: भारत समेत कई देशों की अपने नागरिकों को चेतावनी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 06:08:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका-ईरान]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई देशों ने अपने नागरिकों और दूतावास कर्मचारियों के परिवारों के लिए यात्रा एडवाइजरी जारी की है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच कई देशों ने अपने नागरिकों और दूतावास कर्मचारियों के परिवारों के लिए एडवाइजरी जारी की है। दोनों देशों के बीच &#8230;]]></description>
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<p>अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई देशों ने अपने नागरिकों और दूतावास कर्मचारियों के परिवारों के लिए यात्रा एडवाइजरी जारी की है।</p>



<p>अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच कई देशों ने अपने नागरिकों और दूतावास कर्मचारियों के परिवारों के लिए एडवाइजरी जारी की है। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया है। ऐसे में संभावित सैन्य टकराव की आशंका को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।</p>



<p>डोनल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने मिडिल ईस्ट पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। वहीं ओमान, जो इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, ने कहा है कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन समझौता अभी नहीं हुआ है।</p>



<p>ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी शुक्रवार को वॉशिंगटन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच अगले हफ्ते वियना में फिर से बातचीत होगी।</p>



<p><strong>ब्रिटेन और अमेरिका की एडवाइजरी<br></strong>यूनाइटेड किंगडम ने सुरक्षा खतरे को देखते हुए ईरान से अपने दूतावास कर्मचारियों को अस्थायी रूप से वापस बुला लिया है। ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने कहा है कि तेहरान में दूतावास सीमित तरीके से काम कर रहा है और आम नागरिकों को सीधे मदद देना फिलहाल संभव नहीं है।</p>



<p>संयुक्त राज्य अमेरिका के यरुशलम स्थित दूतावास ने गैर-जरूरी सरकारी अधिकारियों और उनके परिवारों को इजरायल छोड़ने की अनुमति दे दी है। यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया है।</p>



<p><strong>चीन और जर्मनी की चेतावनी<br></strong>चीन ने इजरायल में रह रहे अपने नागरिकों से सुरक्षा इंतजाम कड़े करने और आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा है। साथ ही चीन ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने और वहां मौजूद लोगों को जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी है।</p>



<p>जर्मनी के दूतावास ने चेतावनी दी है कि ईरान की सुरक्षा स्थिति बेहद अस्थिर है और कभी भी सैन्य झड़प हो सकती है। साथ ही हवाई क्षेत्र बंद होने या उड़ानों पर रोक लगने की भी आशंका जताई गई है।</p>



<p><strong>भारत और अन्य देशों की सलाह<br></strong>भारत के तेहरान स्थित दूतावास ने भारतीय नागरिकों को उपलब्ध किसी भी साधन से ईरान छोड़ने की सलाह दी है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने अपने नागरिकों से तुरंत ईरान छोड़ने और वहां की यात्रा से पूरी तरह बचने को कहा है। उन्होंने कहा कि संघर्ष की संभावना बहुत वास्तविक है और बाद में निकासी संभव नहीं हो सकती।</p>



<p>स्वीडन की विदेश मंत्री मारिया माल्मर स्टेनरगार्ड ने भी अपने नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील की है। सर्बिया के विदेश मंत्रालय ने आने वाले दिनों में ईरान की यात्रा न करने और वहां मौजूद नागरिकों को तुरंत लौटने को कहा है।</p>



<p>दक्षिण कोरिया के दूतावास ने क्षेत्र में तेजी से बढ़ते तनाव का हवाला देते हुए अपने नागरिकों से जल्द से जल्द ईरान छोड़ने और यात्रा योजनाएं रद या स्थगित करने की सलाह दी है।</p>
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		<title>अमेरिका-ईरान बातचीत में तनाव, JD वेंस बोले- राष्ट्रपति ट्रंप की शर्तें मानने को तैयार नहीं तेहरान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 08:39:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका-ईरान]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला। परमाणु मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच जिनेवा परोक्ष रूप से वार्ता हुई। ईरानी मीडिया के अनुसार, ये बैठक करीब तीन घंटे चली। वहीं इस पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान राष्ट्रपति ट्रंप की शर्ते मानने को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला। परमाणु मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच जिनेवा परोक्ष रूप से वार्ता हुई। ईरानी मीडिया के अनुसार, ये बैठक करीब तीन घंटे चली। वहीं इस पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान राष्ट्रपति ट्रंप की शर्ते मानने को तैयार नहीं है।</p>



<p>अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत को लेकर ताजा बयान सामने आया है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरान अभी तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से तय की गई मुख्य शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं है।</p>



<p><strong>जेडी वेंस ने क्या कहा?<br></strong>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि जिनेवा में हुई बातचीत &#8216;कुछ मायनों में ठीक रही&#8217;, क्योंकि दोनों देशों ने आगे भी बैठक जारी रखने पर सहमति जताई है। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि ईरान ने अब तक ट्रंप की प्रमुख शर्तों को स्वीकार नहीं किया है। उनके मुताबिक- राष्ट्रपति ट्रंप ने कूटनीतिक समाधान के लिए कुछ स्पष्ट शर्तें रखी हैं। इन शर्तों में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। ईरान अभी इन शर्तों पर खुलकर सहमति देने को तैयार नहीं दिख रहा।</p>



<p><strong>क्या है अमेरिका का रुख?<br></strong>जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका अभी भी बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत बेनतीजा रही, तो आगे क्या करना है- इसका फैसला राष्ट्रपति ट्रंप करेंगे। उनका कहना था, &#8216;हम चाहते हैं कि मामला बातचीत से सुलझे, लेकिन अगर कूटनीति की सीमा खत्म हो जाती है, तो अंतिम फैसला राष्ट्रपति का होगा।&#8217;</p>



<p><strong>क्यों बढ़ा है अमेरिका-ईरान के बीच तनाव?<br></strong>अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों पर कड़ी रोक लगाए। वहीं ईरान अपने अधिकारों और सुरक्षा चिंताओं का हवाला देता रहा है।</p>



<p><strong>दूसरे दौर की वार्ता का नहीं निकला कोई नतीजा<br></strong>ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जिनेवा में बातचीत का दूसरा दौर खत्म हो गया है। ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह बैठक लगभग तीन घंटे तक चली, जिसमें कोई नतीजा नहीं निकला है। मंगलवार को हुई यह मुलाकात परमाणु मुद्दे पर दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत थी। जिनेवा में वार्ता व अभ्यास ऐसे समय हुए जब अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>तनातनी से मुश्किल में दुनिया, अमेरिका-ईरान के रिश्तों में ऐसे आई खटास&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Hema Bisht]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 May 2019 08:23:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका-ईरान]]></category>
		<category><![CDATA[खटास]]></category>
		<category><![CDATA[तनातनी]]></category>
		<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
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					<description><![CDATA[ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मध्यपूर्व में पैट्रियट मिसाइलों और युद्धपोतों की तैनाती कर दी है। अमेरिका ने ईरान पर चौतरफा प्रतिबंध भी लगा रखा है। दुनिया के किसी भी देश को वह ईरान से व्यापार नहीं करने दे रहा है। उसने ईरान के रिवोल्युशनरी गार्ड कोर (आइआरजीसी) को विदेशी आतंकी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मध्यपूर्व में पैट्रियट मिसाइलों और युद्धपोतों की तैनाती कर दी है। अमेरिका ने ईरान पर चौतरफा प्रतिबंध भी लगा रखा है। दुनिया के किसी भी देश को वह ईरान से व्यापार नहीं करने दे रहा है। उसने ईरान के रिवोल्युशनरी गार्ड कोर (आइआरजीसी) को विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। वहीं ईरान ने कहा है कि अगर उसका तेल बेचने से रोका गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।</strong></p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-232348 size-full" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/80174-vmpizpfwtk-1525840902.jpg" alt="" width="1200" height="630" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/80174-vmpizpfwtk-1525840902.jpg 1200w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/80174-vmpizpfwtk-1525840902-300x158.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/80174-vmpizpfwtk-1525840902-768x403.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/80174-vmpizpfwtk-1525840902-1024x538.jpg 1024w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></p>
<p><strong>ऐसे आई रिश्तों में खटास-  अमेरिका पिछले साल ईरान समेत छह देशों के बीच हुई परमाणु संधि से बाहर हो गया था। राष्ट्रपति ट्रंप के इस समझौते को रद करने के पीछे ये वजह बताई जा रही थी कि वह साल 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय ईरान से हुई संधि से ख़ुश नहीं थे। यही नहीं, ट्रंप ने दुनिया के देशों को धमकी देते हुए कहा कि ईरान से जो देश व्यापार करेगा वह अमेरिका से कारोबारी संबंध नहीं रख पाएगा। नतीजा यह हुआ कि ईरान पर अमेरिका और यूरोप में खुलकर मतभेद सामने आए। यूरोपीय यूनियन ने ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को बचाने की कोशिश की लेकिन ट्रंप नहीं माने। अब अमेरिका वॉर्सोवा में मध्य-पूर्व पर एक सम्मेलन करा रहा है। वह चाहता है कि ईरान विरोधी गठजोड़ में इजरायल, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ यूरोप भी एकमत से शामिल हो जाए। ईरान एक बार फिर से संकट में घिरा हुआ है। ट्रंप प्रशासन को उम्मीद है कि इस तरह से घेरकर वह ईरान सरकार को नया समझौता करने के लिए मजबूर कर लेंगे और इसके दायरे में सिर्फ ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही नहीं बल्कि बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम भी होगा।</strong></p>
<p><strong>भारत सहित दुनिया पर असर-  अमेरिका ने ईरान से कच्चे तेल के आयात के लिए भारत समेत आठ देशों को जो छूट दी थी वह 2 मई को खत्म हो गई। अब भारत ईरान से तेल नहीं खरीद सकेगा। ईरान से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वालों में चीन के बाद भारत दूसरे नंबर पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के रिश्तों के बीच कोई खास असर नहीं पड़ेगा। हालांकि अमेरिका के फैसले के बाद अगर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आता है तो इसका असर पड़ेगा। सबसे पहले रुपये की कीमत गिरेगी।</strong></p>
<p><strong>गैरकानूनी है प्रतिबंध-  ईरान ने अमेरिकी पाबंदियों को गैरकानूनी बताया है। उसका कहना है कि वह किसी भी हालत में झुकने वाला नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने कहा है कि उनके पास अमेरिकी प्रतिबंधों का जवाब देने के लिए कई विकल्प हैं। जिसमें परमाणु अप्रसार संधि से अलग होना भी शामिल है।</strong></p>
<p><strong>ईरान पर असर-  ढलान पर आर्थिक विकास ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से ईरान की अर्थव्यवस्था कई वर्षों तक बुरी तरह प्रभावित रही है। 2015 में राष्ट्रपति हसन रूहानी ने उन प्रतिबंधों को हटाने के बदले में ईरान की परमाणु गतिविधियों को सीमित करने के लिए अमेरिका और पांच अन्य देशों के साथ एक समझौते पर सहमति जताई थी। समझौता लागू होने के बाद ईरान की अर्थव्यवस्था वापस पटरी पर लौटी और जीडीपी 12.3 फीसद बढ़ी। लेकिन नए सिरे से अमेरिकी प्रतिबंधों ने जीडीपी विकास दर को गिरा दिया है।</strong></p>
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