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	<title>अब फांसी&#8230; &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>जेलर ने पूछा, कोई अंतिम इच्छा,उधम सिंह बोले,डायर को मारकर अंतिम इच्छा हुई पूरी,अब फांसी&#8230;</title>
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		<pubDate>Mon, 31 Jul 2017 12:04:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="278" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170731133041.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="जेलर ने पूछा, कोई अंतिम इच्छा,उधम सिंह बोले,डायर को मारकर अंतिम इच्छा हुई पूरी,अब फांसी..." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170731133041.jpg 1000w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170731133041-300x135.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170731133041-768x346.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /> New Delhi : आज जिस बलिदानी का बलिदान दिवस है उस वीर के महानतम कार्य को भारत वासियों ने भूला दिया है। उधम सिंह जी थे वो पराक्रमी, जिनके शौर्य और गौरव को छिपाने के लिए ही सोची समझी रणनीति बना कर पिछली सरकारें केवल कुछ ख़ास नामों पर ही लाखों रुपये बहाती रही, लेकिन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="278" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170731133041.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="जेलर ने पूछा, कोई अंतिम इच्छा,उधम सिंह बोले,डायर को मारकर अंतिम इच्छा हुई पूरी,अब फांसी..." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170731133041.jpg 1000w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170731133041-300x135.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170731133041-768x346.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong> New Delhi : आज जिस बलिदानी का बलिदान दिवस है उस वीर के महानतम कार्य को भारत वासियों ने भूला दिया है। उधम सिंह जी थे वो पराक्रमी, जिनके शौर्य और गौरव को छिपाने के लिए ही सोची समझी रणनीति बना कर पिछली सरकारें केवल कुछ ख़ास नामों पर ही लाखों रुपये बहाती रही, लेकिन कभी भी देश के सच्चे सपूतों को याद नहीं किया।<img decoding="async" class="aligncenter wp-image-67934 " src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170731133041.jpg" alt="जेलर ने पूछा, कोई अंतिम इच्छा,उधम सिंह बोले,डायर को मारकर अंतिम इच्छा हुई पूरी,अब फांसी..." width="647" height="291" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170731133041.jpg 1000w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170731133041-300x135.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/07/img_20170731133041-768x346.jpg 768w" sizes="(max-width: 647px) 100vw, 647px" /></strong><strong><a title="Permalink to अभी अभी: लखनऊ गैंगरेप में हुई हैवानियत की सारी हदे पार, वाइरल विडियो देख खौल उठेगा आपका खून" href="http://www.livehalchal.com/%e0%a4%b2%e0%a4%96%e0%a4%a8%e0%a4%8a-%e0%a4%97%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%aa-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%88-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%b5%e0%a4%be/67872" target="_blank" rel="bookmark noopener">अभी अभी: लखनऊ गैंगरेप में हुई हैवानियत की सारी हदे पार, वाइरल विडियो देख खौल उठेगा आपका खून</a></strong></p>
<p><strong>पिछले वर्ष आर टी आई से पता चला कि सैकड़ों करोड़ रुपये केवल कुछ गिने चुने नामों की जयंती पर ही फूंके गए थे, जबकि सच्चे क्रन्तिकारी रानी लक्ष्मी बाई से लेकर सुभाष चन्द्र बोस तक किसी को भी आज तक याद नहीं किया गया। आइए हम परम बलिदानी उधम सिंह को नमन व स्मरण करते है। वही वीर जिन्होंने भारत माता के अपमान का बदला लेने के लिए अपनी संकल्प की अग्नि को २० साल तक दबाये रखा और जलियावाला कांड का बदला लिया।</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>पंजाब में संगरूर जिले के सुनाम गांव में 26 दिसंबर 1899 में जन्मे ऊधम सिंह ने जलियांवाला बाग में अंग्रेजों द्वारा किए गए कत्लेआम का बदला लेने की प्रतिज्ञा की थी जिसे उन्होंने गोरों की मांद में घुसकर 21 साल बाद पूरा कर दिखाया।</strong></p>
<p><strong>पंजाब के तत्कालीन गवर्नर माइकल ओडायर के आदेश पर ब्रिगेडियर जनरल रेजीनल्ड डायर ने अमृतसर के जलियांवाला बाग में शांति के साथ सभा कर रहे सैकड़ों भारतीयों को अंधाधुंध फायरिंग करा मौत के घाट उतार दिया था।</strong></p>
<p><strong> क्रांतिकारियों पर कई पुस्तकें लिख चुके जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चमन लाल के अनुसार जलियांवाला बाग की इस घटना ने ऊधम सिंह के मन पर गहरा असर डाला था और इसीलिए उन्होंने इसका बदला लेने की ठान ली थी। ऊधम सिंह अनाथ थे और अनाथालय में रहते थे, लेकिन फिर भी जीवन की प्रतिकूलताएं उनके इरादों से उन्हें डिगा नहीं पाई।</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>उन्होंने 1919 में अनाथालय छोड़ दिया और क्रांतिकारियों के साथ मिलकर जंग-ए-आजादी के मैदान में कूद पड़े। </strong></p>
<p><strong>भारत के महान क्रांतिकारियों में ऊधम सिंह का विशेष स्थान है। उन्होंने जलियांवाला बाग नरसंहार के दोषी माइकल ओडायर को गोली से उड़ा दिया था। जाने माने नेताओं डॉ. सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में लोगों ने जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन एक सभा रखी थी, जिसमें ऊधम सिंह पानी पिलाने का काम कर रहे थे।</strong></p>
<p><strong>पंजाब का तत्कालीन गवर्नर माइकल ओडायर किसी कीमत पर इस सभा को नहीं होने देना चाहता था और उसकी सहमति से ब्रिगेडियर जनरल रेजीनल्ड डायर ने जलियांवाला बाग को घेरकर अंधाधुंध फायरिंग करा दी। अचानक हुई गोलीबारी से बाग में भगदड़ मच गई। बहुत से लोग जहां गोलियों से मारे गए, वहीं बहुतों की जान भगदड़ ने ले ली।</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>जान बचाने की कोशिश में बहुत से लोगों ने पार्क में मौजूद कुएं में छलांग लगा दी। बाग में लगी पट्टिका के अनुसार 120 शव तो कुएं से ही बरामद हुए। सरकारी आंकड़ों में मरने वालों की संख्या 379 बताई गई, जबकि पंडित मदन मोहन मालवीय के अनुसार कम से कम 1300 लोगों की इस घटना में जान चली गई।</strong></p>
<p><strong>स्वामी श्रद्धानंद के मुताबिक मृतकों की संख्या 1500 से अधिक थी। अमृतसर के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. स्मिथ के अनुसार मरने वालों की संख्या 1800 से ज्यादा थी। ऊधम सिंह के मन पर इस घटना ने इतना गहरा प्रभाव डाला था कि उन्होंने बाग की मिट्टी हाथ में लेकर ओडायर को मारने की सौगंध खाई थी।</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>अपनी इसी प्रतिज्ञा को पूरा करने के मकसद से वह 1934 में लंदन पहुंच गए और सही वक्त का इंतजार करने लगे।ऊधम को जिस वक्त का इंतजार था वह उन्हें 13 मार्च 1940 को उस समय मिला जब माइकल ओडायर लंदन के कॉक्सटन हाल में एक सेमिनार में शामिल होने गया। </strong></p>
<p><strong>भारत के इस सपूत ने एक मोटी किताब के पन्नों को रिवॉल्वर के आकार के रूप में काटा और उसमें अपनी रिवॉल्वर छिपाकर हाल के भीतर घुसने में कामयाब हो गए। चमन लाल के अनुसार मोर्चा संभालकर बैठे ऊधम सिंह ने सभा के अंत में ओडायर की ओर गोलियां दागनी शुरू कर दीं। सैकड़ों भारतीयों के कत्ल के गुनाहगार इस गोरे को दो गोलियां लगीं और वह वहीं ढेर हो गया।</strong></p>
<p><strong>अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने के बाद इस महान क्रांतिकारी ने समर्पण कर दिया। उन पर मुकदमा चला और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। 31 जुलाई 1940 को पेंटविले जेल में यह वीर हंसते हंसते फांसी के फंदे पर झूल गया।</strong></p>
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