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	<title>अपरा एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>अपरा एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>अपरा एकादशी पर इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा</title>
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		<pubDate>Wed, 13 May 2026 04:33:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[अपरा एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="365" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/4-28.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/4-28.jpg 879w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/4-28-300x177.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/4-28-768x453.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 13 मई (Kab Hai Apara Ekadashi 2026) को अपरा एकादशी है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर अपरा एकादशी व्रत किया जाता है और भगवान विष्णु के संग मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। अन्न-धन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="365" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/4-28.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/4-28.jpg 879w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/4-28-300x177.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/4-28-768x453.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 13 मई (Kab Hai Apara Ekadashi 2026) को अपरा एकादशी है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर अपरा एकादशी व्रत किया जाता है और भगवान विष्णु के संग मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है।</p>



<p>अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अपरा एकादशी के दिन इन कामों को करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी पापों से मुक्ति मिलती है। ऐसे में आइए जानते हैं अपरा एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भोग आदि के बारे में।</p>



<p><strong>अपरा एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Apara Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 12 मई को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर होगी। वहीं, समापन 13 मई को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट पर होगा। ऐसे में आज यानी 13 मई को अपरा एकादशी व्रत किया जा रहा है।</p>



<p><strong>अपरा एकादशी 2026 व्रत पारण टाइम<br></strong>एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। व्रत पारण का समय 14 मई को सुबह 05 बजकर 31 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 14 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय व्रत का पारण कर सकते हैं।</p>



<p><strong>इन चीजों का लगाएं भोग<br></strong>भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए एकादशी के दिन पंचामृत, तुलसी दल फल और मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाएं। ऐसा माना जाता है कि इन चीजों का भोग लगाने से भगवान विष्णु की कृपा बरसती है।</p>



<p><strong>अपरा एकादशी पूजा विधि<br></strong>एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठें।<br>सुबह का स्नान करें और व्रत का संकल्प लें<br>सूर्य देव को जल अर्पित करें।<br>चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा को विराजमान करें।<br>भगवान विष्णु की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं।<br>पीला चंदन या गोपी चंदन का तिलक लगाएं।<br>इसके बाद पीले फूल, पीले वस्त्र और जनेऊ अर्पित करें।<br>देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।<br>व्रत कथा का पाठ करें।<br>विष्णु चालीसा का पाठ और मंत्रों का जप करें।<br>विशेष चीजों का भोग लगाएं।<br>प्रभु से जाने-अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें।</p>



<p><strong>इन बातों का रखें ध्यान<br></strong>एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़े।<br>वाद-विवाद न करें।<br>किसी के बारे में गलत न सोचें।<br>काले कपड़े न पहनने से बचें।</p>



<p><strong>भगवान विष्णु की आरती<br></strong>ॐ जय जगदीश हरे आरती</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे…</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।</p>



<p>भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे…</p>



<p>जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।</p>



<p>स्वामी दुःख विनसे मन का।</p>



<p>सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे…</p>



<p>मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।</p>



<p>स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।</p>



<p>तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे…</p>



<p>तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।</p>



<p>स्वामी तुम अन्तर्यामी।</p>



<p>पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे…</p>



<p>तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।</p>



<p>स्वामी तुम पालन-कर्ता।</p>



<p>मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे…</p>



<p>तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।</p>



<p>स्वामी सबके प्राणपति।</p>



<p>किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे…</p>



<p>दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।</p>



<p>स्वामी तुम ठाकुर मेरे।</p>



<p>अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे…</p>



<p>विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।</p>



<p>स्वामी पाप हरो देवा।</p>



<p>श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा॥</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे…</p>



<p>श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।</p>



<p>स्वामी जो कोई नर गावे।</p>



<p>कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे…</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>अनजाने में हुए पापों को नष्ट कर देती है अपरा एकादशी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 May 2026 04:12:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[अपरा एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="364" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/7-18.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/7-18.jpg 928w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/7-18-300x177.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/7-18-768x452.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />आज 13 मई को अपरा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक उसकी कथा का श्रवण (सुनना) या पाठ न किया जाए। आइए पढ़ते हैं अपरा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा और इसके अद्भुत लाभ। श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर का संवादमहाभारत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="364" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/7-18.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/7-18.jpg 928w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/7-18-300x177.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/7-18-768x452.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>आज 13 मई को अपरा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक उसकी कथा का श्रवण (सुनना) या पाठ न किया जाए। आइए पढ़ते हैं अपरा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा और इसके अद्भुत लाभ।</p>



<p><strong>श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर का संवाद<br></strong>महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा, “हे भगवन! ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है और इसका महात्म्य क्या है?” भगवान श्रीकृष्ण इसका उत्तर देते हुए कहते हैं, “हे राजन! इस एकादशी को ‘अपरा’ और ‘अचला’ एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान त्रिविक्रम (विष्णु जी के वामन अवतार) की पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार, यह व्रत अपार धन देने वाला है। जो भी मनुष्य सच्ची श्रद्धा से इस व्रत को करता है, वह संसार में कीर्ति और प्रसिद्धि प्राप्त करता है।”</p>



<p><strong>अपरा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा<br></strong>प्राचीन काल में महीध्वज नाम का एक धर्मात्मा और न्यायप्रिय राजा था। उसका छोटा भाई वज्रध्वज इसके बिल्कुल विपरीत क्रूर, अधर्मी और अन्यायी था। वज्रध्वज अपने बड़े भाई से बहुत ईर्ष्या करता था। एक रात मौका पाकर वज्रध्वज ने राजा महीध्वज की हत्या कर दी और उनके शव को जंगल में एक पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दिया। अकाल मृत्यु होने के कारण राजा की आत्मा को शांति नहीं मिली और वे प्रेत बनकर उसी पीपल के पेड़ पर रहने लगे। प्रेत योनि में आकर वे अक्सर वहां से गुजरने वालों को परेशान करते थे।</p>



<p><strong>ऋषि ने इस तरह दिलाई राजा को मुक्ति<br></strong>एक दिन धौम्य नामक एक महान ॠषि उस जंगल से गुजर रहे थे। उन्होंने उस प्रेत को देखा और अपने तपोबल से उसके अतीत और इस दुर्दशा का कारण जान लिया। ऋषि को राजा पर दया आ गई और उन्होंने प्रेत को पेड़ से नीचे उतारा व परलोक विद्या का ज्ञान दिया। ॠषि ने राजा को इस कष्टकारी प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया।</p>



<p>उन्होंने स्वयं पूरे विधि-विधान से अपरा एकादशी का व्रत किया और व्रत से मिलने वाला सारा पुण्य उस प्रेत (राजा महीध्वज) को अर्पित कर दिया। इस महापुण्य के प्रभाव से राजा को तुरंत प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई। उन्होंने एक दिव्य शरीर धारण किया और ऋषि धौम्य को हृदय से धन्यवाद देते हुए पुष्पक विमान में बैठकर स्वर्ग लोक की ओर प्रस्थान किया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>आज है अपरा एकादशी, इस विधि से करें पूजा, जानिए भोग और मंत्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 May 2025 05:50:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[अपरा एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="362" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-399-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-399.jpg 857w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-399-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-399-768x450.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />अपरा एकादशी व्रत (Apara Ekadashi 2025 Puja Vidhi) बेहद शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह व्रत 23 मई यानी आज के दिन रखा जा रहा है। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित है तो आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों (Apara &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="362" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-399-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-399.jpg 857w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-399-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-399-768x450.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>अपरा एकादशी व्रत (Apara Ekadashi 2025 Puja Vidhi) बेहद शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह व्रत 23 मई यानी आज के दिन रखा जा रहा है। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित है तो आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों (Apara Ekadashi Mantra And Bhog) को जानते हैं।</p>



<p><strong>अपरा एकादशी पूजा समय (Apara Ekadashi 2025 Puja Time)<br></strong>ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 04 मिनट से 04 बजकर 45 मिनट तक था। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 35 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग 04 बजकर 02 मिनट अगले दिन सुबह 05 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।</p>



<p>अमृत सिद्धि योग शाम 04 बजकर 02 मिनट से अगले दिन सुबह 05 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। इस दौरान पूजा से लेकर आप अन्य कोई भी शुभ काम कर सकते हैं।</p>



<p><strong>अपरा एकादशी पारण टाइम (Apara Ekadashi 2025 Parana time)<br></strong>अपरा एकादशी व्रत का पारण 24 मई को सुबह 05 बजकर 26 मिनट से लेकर शाम 08 बजकर 11 मिनट के बीच किया जाएगा।</p>



<p><strong>अपरा एकादशी पूजा विधि (Apara Ekadashi 2025 Puja Vidhi)<br></strong>सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।<br>पीले रंग के कपड़े पहनें।<br>पूजा शुरू करने से पहले व्रत का संकल्प लें।<br>एक वेदी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।<br>शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं।<br>भगवान विष्णु का अभिषेक करें।<br>उन्हें गोपी चंदन लगाएं।<br>पीले फूलों की माला अर्पित करें।<br>पूजा में तुलसी दल जरूर शामिल करें।<br>भोग के रूप में पंचामृत और पीली मिठाई चढ़ाएं।<br>अपरा एकादशी कथा और श्री हरि के वैदिक मंत्रों का जप करें।<br>पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती भाव के साथ करें।<br>व्रत का पारण द्वादशी के दिन शुभ मुहूर्त में करें।<br>व्रती तामसिक चीजों से परहेज करें।</p>



<p><strong>भगवान विष्णु के प्रिय भोग (Apara Ekadashi 2025 Bhog)<br></strong>अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पंचामृत, ऋतु फल, केसर की मिठाई, मखाने की खीर, पंजीरी आदि का भोग लगाना अति फलदायी माना जाता है। इसे चढ़ाने से भक्तों को मनचाहा फल मिलता है।</p>



<p><strong>पूजा मंत्र (Apara Ekadashi 2025 Puja Mantra)<br></strong>ॐ नमो नारायणाय॥<br>ॐ विष्णवे नमः॥<br>शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम्।<br>लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं, वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम्॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>अपरा एकादशी पर ऐसे करें कान्हा जी की पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 May 2025 05:47:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[अपरा एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="331" height="300" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-398-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-398.jpg 331w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-398-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 331px) 100vw, 331px" />आज अपरा एकादशी है जो ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आती है। इसे अचला एकादशी भी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है क्योंकि श्रीकृष्ण विष्णु जी के ही अवतार हैं इसलिए इस दिन उनकी पूजा भी फलदायी होती है। ऐसे में भक्त इस मौके पर मुरलीधर के सामने दीपक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="331" height="300" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-398-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-398.jpg 331w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-398-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 331px) 100vw, 331px" />
<p>आज अपरा एकादशी है जो ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आती है। इसे अचला एकादशी भी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है क्योंकि श्रीकृष्ण विष्णु जी के ही अवतार हैं इसलिए इस दिन उनकी पूजा भी फलदायी होती है। ऐसे में भक्त इस मौके पर मुरलीधर के सामने दीपक जलाकर पीले फूल माखन मिश्री और तुलसी दल अर्पित करें।</p>



<p>अपरा एकादशी को बेहद शुभ माना जाता है। यह ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। इसे ‘अचला एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह व्रत 23 मई यानी आज के दिन रखा जा रहा है। इस दिन साधक भगवान विष्णु की विधिपूर्वक उपासना और व्रत करते हैं। वहीं, इस मौके पर कान्हा की पूजा भी परम फलदायी मानी जाती है, क्योंकि श्रीकृष्ण नारायण के आठवें अवतार हैं। ऐसे में इस मौके पर स्नान के बाद मुरलीधर के सामने दीपक जलाएं। उनका ध्यान करें।</p>



<p>इसके बाद उन्हें पीले फूल, माखन और मिश्री तुलसी दल के साथ अर्पित करें। कृष्ण चालीसा और उनके वैदिक मंत्रों का जप करें। अंत में आरती करें। इससे घर में सदैव के लिए सुख और शांति का वास होगा।</p>



<p><strong>।।कृष्ण चालीसा का पाठ।।</strong></p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong><br>बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम।<br>अरुण अधर जनु बिम्बा फल,पिताम्बर शुभ साज॥<br>जय मनमोहन मदन छवि,कृष्णचन्द्र महाराज।<br>करहु कृपा हे रवि तनय,राखहु जन की लाज॥</p>



<p><strong>॥ चौपाई ॥<br></strong>जय यदुनन्दन जय जगवन्दन।<br>जय वसुदेव देवकी नन्दन॥<br>जय यशुदा सुत नन्द दुलारे।<br>जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥<br>जय नट-नागर नाग नथैया।<br>कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया॥<br>पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो।<br>आओ दीनन कष्ट निवारो॥<br>वंशी मधुर अधर धरी तेरी।<br>होवे पूर्ण मनोरथ मेरो॥<br>आओ हरि पुनि माखन चाखो।<br>आज लाज भारत की राखो॥<br>गोल कपोल, चिबुक अरुणारे।<br>मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥<br>रंजित राजिव नयन विशाला।<br>मोर मुकुट वैजयंती माला॥<br>कुण्डल श्रवण पीतपट आछे।<br>कटि किंकणी काछन काछे॥<br>नील जलज सुन्दर तनु सोहे।<br>छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥<br>मस्तक तिलक, अलक घुंघराले।<br>आओ कृष्ण बाँसुरी वाले॥<br>करि पय पान, पुतनहि तारयो।<br>अका बका कागासुर मारयो॥<br>मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला।<br>भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला॥<br>सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई।<br>मसूर धार वारि वर्षाई॥<br>लगत-लगत ब्रज चहन बहायो।<br>गोवर्धन नखधारि बचायो॥<br>लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई।<br>मुख महं चौदह भुवन दिखाई॥<br>दुष्ट कंस अति उधम मचायो।<br>कोटि कमल जब फूल मंगायो॥<br>नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें।<br>चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें॥<br>करि गोपिन संग रास विलासा।<br>सबकी पूरण करी अभिलाषा॥<br>केतिक महा असुर संहारयो।<br>कंसहि केस पकड़ि दै मारयो॥<br>मात-पिता की बन्दि छुड़ाई।<br>उग्रसेन कहं राज दिलाई॥<br>महि से मृतक छहों सुत लायो।<br>मातु देवकी शोक मिटायो॥<br>भौमासुर मुर दैत्य संहारी।<br>लाये षट दश सहसकुमारी॥<br>दै भिन्हीं तृण चीर सहारा।<br>जरासिंधु राक्षस कहं मारा॥<br>असुर बकासुर आदिक मारयो।<br>भक्तन के तब कष्ट निवारियो॥<br>दीन सुदामा के दुःख टारयो।<br>तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो॥<br>प्रेम के साग विदुर घर मांगे।<br>दुर्योधन के मेवा त्यागे॥<br>लखि प्रेम की महिमा भारी।<br>ऐसे श्याम दीन हितकारी॥<br>भारत के पारथ रथ हांके।<br>लिए चक्र कर नहिं बल ताके॥<br>निज गीता के ज्ञान सुनाये।<br>भक्तन ह्रदय सुधा वर्षाये॥<br>मीरा थी ऐसी मतवाली।<br>विष पी गई बजाकर ताली॥<br>राना भेजा सांप पिटारी।<br>शालिग्राम बने बनवारी॥<br>निज माया तुम विधिहिं दिखायो।<br>उर ते संशय सकल मिटायो॥<br>तब शत निन्दा करी तत्काला।<br>जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥<br>जबहिं द्रौपदी टेर लगाई।<br>दीनानाथ लाज अब जाई॥<br>तुरतहिं वसन बने नन्दलाला।<br>बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥<br>अस नाथ के नाथ कन्हैया।<br>डूबत भंवर बचावत नैया॥<br>सुन्दरदास आस उर धारी।<br>दयादृष्टि कीजै बनवारी॥<br>नाथ सकल मम कुमति निवारो।<br>क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥<br>खोलो पट अब दर्शन दीजै।<br>बोलो कृष्ण कन्हैया की जै॥</p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong><br>यह चालीसा कृष्ण का,पाठ करै उर धारि।<br>अष्ट सिद्धि नवनिधि फल,लहै पदारथ चारि॥</p>
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		<title>अपरा एकादशी के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें, घर में होगा देवी लक्ष्मी का आगमन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 May 2025 05:02:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[अपरा एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="490" height="327" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-376-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-376.jpg 490w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-376-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 490px) 100vw, 490px" />अपरा एकादशी व्रत बहुत फलदायी माना जाता है। इस साल यह 23 मई को रखा जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है और इस दिन भगवान शिव की पूजा भी होती है। कहते हैं कि अपरा एकादशी का व्रत करने से सभी कष्टों का नाश होता है और पुण्य फल की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="490" height="327" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-376-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-376.jpg 490w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-376-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 490px) 100vw, 490px" />
<p>अपरा एकादशी व्रत बहुत फलदायी माना जाता है। इस साल यह 23 मई को रखा जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है और इस दिन भगवान शिव की पूजा भी होती है। कहते हैं कि अपरा एकादशी का व्रत करने से सभी कष्टों का नाश होता है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।</p>



<p>अपरा एकादशी व्रत हिंदू धर्म में बड़ा महत्व रखता है। यह ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस साल यह एकादशी (Apara Ekadashi 2025) 23 मई, दिन शुक्रवार यानी कल मनाई जा रही है। यह दिन भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित है।</p>



<p>वहीं, इस दिन भगवान शिव की पूजा भी फलदायी मानी गई है, तो आइए यहां जानते हैं कि इस पावन तिथि पर शिवलिंग पर क्या चढ़ाना शुभ माना जाता है?</p>



<p><strong>अपरा एकादशी का धार्मिक महत्व<br></strong>प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत विधि-विधान से करने से व्यक्ति के सभी कष्टों का नाश होता है और उसे अपार पुण्य फल की प्राप्ति होती है, जो कि इसके नाम से ही पता चल रहा है। कहते हैं कि इस दिन उपवास जरूर रखना चाहिए। इससे विष्णु जी खुश होते हैं।</p>



<p><strong>शिवलिंग पर चढ़ाएं ये विशेष चीजें (Offer These Special Things To Shivling)<br>बेलपत्र –&nbsp;</strong>भगवान शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय है। ऐसे में अपरा एकादशी के दिन शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाएं। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान शिव खुश होते हैं और भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं।</p>



<p><strong>दूध –</strong>&nbsp;शिवलिंग पर दूध चढ़ाने से मानसिक दुखों से मुक्ति मिलती है। ये भी कहते हैं कि अपरा एकादशी के दिन दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने से दरिद्रता का नाश होता है और घर में सुख और समृद्धि आती है।</p>



<p><strong>धतूरा और भांग –&nbsp;</strong>भोलेनाथ को धतूरा और भांग चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से जीवन की सारी नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। साथ ही घर में सकारात्मकता ऊर्जा का वास होता है।</p>



<p><strong>शमी के फूल –</strong>&nbsp;शमी के पत्ते भगवान शिव को चढ़ाने से शनिदेव की कृपा मिलती है, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और धन लाभ के योग बनते हैं।</p>



<p><strong>अक्षत –</strong>&nbsp;शिवलिंग पर अक्षत चढ़ाना भी बहुत लाभकारी माना जाता है। इससे धन की वृद्धि होती है और घर में अन्न-धन की कभी कमी नहीं होती।</p>



<p><strong>अंत में दीपक जलाएं –</strong>&nbsp;शाम के समय शिवलिंग के पास घी का दीपक जलाना बहुत ही शुभ होता है। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और मां लक्ष्मी का वास होता है।</p>



<p><strong>पूजा विधि (Apara Ekadashi 2025 Puja Vidhi)</strong><br>अपरा एकादशी के दिन सुबह उठें और स्नान करें। व्रत का संकल्प लें। एक वेदी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें तुलसी दल, पीले फूल, फल, मिठाई और पंचामृत अर्पित करें। विष्णु चालीसा और वैदिक मंत्रों का जप करें। अपरा एकादशी कथा का पाठ करें। अंत में आरती करें। अगले दिन व्रत का पारण प्रसाद से करें।</p>
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