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	<title>अक्टूबर 2020 में अद्भुत ब्लू मून : जानिए शरद पूर्णिमा का साइंस &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>अक्टूबर 2020 में अद्भुत ब्लू मून : जानिए शरद पूर्णिमा का साइंस</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Oct 2020 06:08:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="271" height="186" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/gthng-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/gthng-1.jpg 271w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/gthng-1-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 271px) 100vw, 271px" />हिन्दू धर्म में पूर्णिमा का अमावस्या से भी ज्यादा महत्व है। वर्ष में 24 पूर्णिमाएं होती हैं जिनमें से कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा का महत्व ज्यादा है। आओ जानते हैं अश्विन मास में आने वाली शरद पूर्णिमा क्यों है महत्वपूर्ण और क्या है इसका साइंस। इस बार शरद पूर्णिमा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="271" height="186" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/gthng-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/gthng-1.jpg 271w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/gthng-1-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 271px) 100vw, 271px" />
<p>हिन्दू धर्म में पूर्णिमा का अमावस्या से भी ज्यादा महत्व है। वर्ष में 24 पूर्णिमाएं होती हैं जिनमें से कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा का महत्व ज्यादा है। आओ जानते हैं अश्विन मास में आने वाली शरद पूर्णिमा क्यों है महत्वपूर्ण और क्या है इसका साइंस। इस बार शरद पूर्णिमा अक्टूबर माह 2020 के अंतिम सप्ताह के शनिवार को है।<br></p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img decoding="async" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/10/gthng.jpg" alt="" class="wp-image-387566" width="567" height="389" /></figure>



<p><strong>ब्लू मून :</strong> शरद पूर्णिमा का चांद नीला दिखाई देता है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहते है। पश्&#x200d;चिम जगत में इसे ब्लू मून कहा जाता है। कहते हैं कि नीला चांद वर्ष में एक बार ही दिखाई देता है। एक साल में 12 बार और एक शताब्दी में लगभग 41 बार ब्लू मून दिखता है जबकि हर तीन साल में 13 बार फूल मून होता है।</p>



<p>सामान्य तौर पर हर माह एक बार पूर्णिमा और एक बार अमावस्या होती है लेकिन इस बार एक ही माह में दो बार आसमान में पूरा चांद दिखाई देगा। उल्लेखनीय है कि 1 अक्टूबर को पूर्णिमा थी और अब 31 अक्टूबर को पूर्णिमा होगी। चंद्र मास की अवधि 29 दिन, 12 घंटे, 44 मिनट और 38 सेकेंड की होती है, इसलिए एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा होने के लिए पहली पूर्णिमा उस महीने की पहली या दूसरी तारीख को होनी चाहिए।</p>



<p>30 दिन वाले महीने में पिछली बार 30 जून, 2007 को ब्लू मून दिखाई दिया था और अगली बार यह 30 सितंबर 2050 को होगा। वर्ष 2018 में दो बार ऐसा अवसर आया जब ब्लू मून की घटना हुई। उस दौरान पहला ब्लू मून 31 जनवरी जबकि दूसरा 31 मार्च को हुआ। शनिवार शरद पूर्णिमा की रात को आसमान में ब्लू मून अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप समेत एशिया के कई देशों में दिखाई देगा। इस रात को चांद आम दिनों की अपेक्षा आकार में 14 फीसद बड़ा और चमकदार दिखाई देगा। इसके बाद अगला ब्लू मून 31 अगस्त 2023 को दिखाई देगा।</p>



<p><strong>शरद पूर्णिमा का महत्व :</strong> पौराणिक मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात को चांद पूरी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। इस दिन चांदनी सबसे तेज प्रकाश वाली होती है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत गिरता है। ये किरणें सेहत के लिए काफी लाभदायक मानी जाती है। शरद पूर्णिमा के दौरान चातुर्मास लगा होता है जिसमें भगवान विष्णु सो रहे होते हैं। चातुर्मास का यह अंतिम चरण होता है। शरद पूर्णिमा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन दिनों से सुबह और शाम को सर्दी का अहसास होने लगता है।</p>



<p><strong>पूर्णिमा का मनोविज्ञान :</strong> पूर्णिमा की रात मन ज्यादा बेचैन रहता है और नींद कम ही आती है। कमजोर दिमाग वाले लोगों के मन में आत्महत्या या हत्या करने के विचार बढ़ जाते हैं।</p>



<p><strong>पूर्णिमा का साइंस :</strong> चांद का धरती के जल से संबंध है। जब पूर्णिमा आती है तो समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है, क्योंकि चंद्रमा समुद्र के जल को ऊपर की ओर खींचता है। मानव के शरीर में भी लगभग 85 प्रतिशत जल रहता है। पूर्णिमा के दिन इस जल की गति और गुण बदल जाते हैं।</p>



<p>वैज्ञानिकों के अनुसार इस दिन चन्द्रमा का प्रभाव काफी तेज होता है इन कारणों से शरीर के अंदर रक्&#x200d;त में न्यूरॉन सेल्स क्रियाशील हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में इंसान ज्यादा उत्तेजित या भावुक रहता है। एक बार नहीं, प्रत्येक पूर्णिमा को ऐसा होता रहता है तो व्यक्ति का भविष्य भी उसी अनुसार बनता और बिगड़ता रहता है।</p>



<p>जिन्हें मंदाग्नि रोग होता है या जिनके पेट में चय-उपचय की क्रिया शिथिल होती है, तब अक्सर सुनने में आता है कि ऐसे व्यक्&#x200d;ति भोजन करने के बाद नशा जैसा महसूस करते हैं और नशे में न्यूरॉन सेल्स शिथिल हो जाते हैं जिससे दिमाग का नियंत्रण शरीर पर कम, भावनाओं पर ज्यादा केंद्रित हो जाता है। ऐसे व्यक्&#x200d;तियों पर चन्द्रमा का प्रभाव गलत दिशा लेने लगता है। इस कारण पूर्णिमा व्रत का पालन रखने की सलाह दी जाती है।</p>
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