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	<title>मध्यप्रदेश &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>मध्यप्रदेश &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>इंदौर की रेवती रेंज टेकरी पर लगाए 51 हजार पौधे, जुटे हजारों शहरवासी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 11:05:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[रेवती रेंज टेकरी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-5.jpg 826w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-5-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-5-768x431.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />इंदौर की रेवती रेंज टेकरी पर 51 हजार पौधे लगाने का अभियान रविवार सुबह भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष की मौजूदगी में हुआ। इस मौके पर आयोजित समारोह में संतोष ने कहा कि इंदौर स्वच्छता में पहले स्थान पर है और हरियाली में भी नए कीर्तिमान बना चुका है। इंदौर में एक दिन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-5.jpg 826w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-5-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-5-768x431.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>इंदौर की रेवती रेंज टेकरी पर 51 हजार पौधे लगाने का अभियान रविवार सुबह भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष की मौजूदगी में हुआ। इस मौके पर आयोजित समारोह में संतोष ने कहा कि इंदौर स्वच्छता में पहले स्थान पर है और हरियाली में भी नए कीर्तिमान बना चुका है। इंदौर में एक दिन में सबसे ज्यादा पौधे लगाने का रिकॉर्ड बना है और अब लगातार हरियाली बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।</p>



<p>51 हजार पौधे लगाने के लिए रेवती रेंज पर हजारों शहरवासी सुबह से आने लगे थे। दोपहर तक पौधे लगाने का सिलसिला जारी रहा। दो साल पहले रेवती रेंज पर 12 लाख पौधे लगाए गए थे, जो एक दिन में एक स्थान पर लगाए जाने वाले सर्वाधिक पौधों का विश्व रिकॉर्ड था।</p>



<p>अब फिर उन पौधों की गिनती की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने पौधे जीवित हैं। यदि बड़ी संख्या में पौधे जीवित मिलते हैं तो फिर एक और विश्व रिकॉर्ड का दावा किया जा सकता है। शनिवार को भी रेवती रेंज में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने पौधे लगाए थे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि रेवती रेंज में &#8216;एक पेड़ मां के नाम&#8217; बगिया भी बनाई गई है।</p>



<p><strong>स्कूली बच्चे भी हुए शामिल<br></strong>एक साथ 51 हजार पौधे लगाने के अभियान में रविवार को स्कूली बच्चे भी शामिल हुए। पथरीली जमीन होने के कारण एक दिन पहले ही पौधों के लिए गड्ढे खोदे गए थे। बच्चों ने उनमें पौधे लगाकर मिट्टी डाली। टेकरी पर पौधों को पानी देने के लिए एक टंकी का भी निर्माण किया जा रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट से टेकरी तक एक पाइपलाइन बिछाई जा रही है और उपचारित जल को टंकी तक पहुंचाया जाएगा, ताकि पौधों को पानी मिल सके।</p>
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		<title>सीएम  मोहन यादव ने किया तिरंगा यात्रा का शुभारंभ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 11:01:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हर घर तिरंगा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-16.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-16.jpg 828w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-16-300x167.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-16-768x429.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />मध्यप्रदेश में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के शुभारंभ के मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का रविवार को अलग अंदाज देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले अपने निवास पर तिरंगा फहराया। इसके बाद वे बुलेट पर सवार होकर तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए टीटी नगर स्टेडियम के लिए रवाना हुए। बारिश के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-16.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-16.jpg 828w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-16-300x167.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-16-768x429.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>मध्यप्रदेश में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के शुभारंभ के मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का रविवार को अलग अंदाज देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले अपने निवास पर तिरंगा फहराया। इसके बाद वे बुलेट पर सवार होकर तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए टीटी नगर स्टेडियम के लिए रवाना हुए। बारिश के बावजूद उन्होंने यात्रा जारी रखी और रास्ते में बच्चों से संवाद भी किया।</p>



<p>मुख्यमंत्री के निवास से तिरंगा यात्रा शुरू हुई। उनके साथ सुरक्षा में तैनात जवान और निवास का स्टाफ भी मौजूद था। बारिश शुरू होने के बाद भी मुख्यमंत्री बुलेट से टीटी नगर की ओर रवाना हुए। यहां पहुंचने के बाद राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री ने छात्रों, युवाओं और नागरिकों को संबोधित कर देशसेवा और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी का आह्वान किया।</p>



<p><strong>बारिश में भी कम नहीं हुआ युवाओं का उत्साह<br></strong>टीटी नगर स्टेडियम से शुरू हुई तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। बारिश के बावजूद युवाओं का उत्साह कम नहीं हुआ। हाथों में तिरंगा लेकर युवाओं ने भारत माता की जय के नारे लगाए और राष्ट्र सर्वोपरि का संदेश दिया। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाए गए भारत छोड़ो आंदोलन ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी। क्रांतिकारियों के संघर्ष और बलिदान के साथ अहिंसक आंदोलनों ने देश में आजादी की भावना को मजबूत किया। इसके परिणामस्वरूप अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा और देश स्वतंत्र हुआ। उन्होंने कहा कि तिरंगा देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है। युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।</p>



<p><strong>बच्चों को देखकर रुके मुख्यमंत्री<br></strong>मुख्यमंत्री के निवास से बुलेट पर शुरू हुई यात्रा और बारिश के बीच बच्चों के साथ उनका संवाद इस कार्यक्रम का खास आकर्षण रहा। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत प्रदेशभर में लोगों से अपने घरों पर तिरंगा फहराने और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति की भावना के साथ भागीदारी करने की अपील की जा रही है।</p>



<p>तिरंगा यात्रा के दौरान रास्ते में बच्चों को देखकर मुख्यमंत्री रुके और उनसे बातचीत की। उन्होंने बच्चों से कहा कि बच्चों, बारिश हो रही है, आप सब भीग जाओगे। इस पर बच्चों ने उत्साह के साथ जवाब दिया कि “हमें बारिश में भीगना पसंद है। बच्चों का उत्साह देखकर मुख्यमंत्री उनके साथ कुछ दूर पैदल भी चले और उन्हें तिरंगा भेंट किया।</p>



<p><strong>शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को किया याद<br></strong>मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी हमें शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से मिली है। हमें उनका स्मरण करते हुए अपने उत्तरदायित्व का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना के साथ आगे बढ़े और हमेशा स्वतंत्र एवं सशक्त बना रहे, यही हमारी कामना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा के माध्यम से देशभर में युवा, बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं देशसेवा का संकल्प ले रहे हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि वे आजीवन देश की सेवा और राष्ट्रहित के लिए काम करने का संकल्प लें।</p>



<p><strong>मुख्यमंत्री निवास पर भी फहराया तिरंगा<br></strong>मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास पर तिरंगा फहराकर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की भी शुरुआत की। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपने घरों पर तिरंगा फहराने और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति की भावना के साथ भागीदारी करने की अपील की।</p>
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		<title>सीताराम डाक कांवड़ यात्रा: रामेश्वरम से इंदौर तक 2100 किलोमीटर दौड़ते हुए करेंगे सफर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 06 Aug 2026 06:52:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[सीताराम डाक कांवड़ यात्रा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="436" height="371" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-1.jpg 436w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-1-300x255.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 436px) 100vw, 436px" />इंदौर के बावड़ी वाले बालाजी मंदिर की डाक कांवड़ यात्रा इस बार रामेश्वरम से 2,100 किलोमीटर की सबसे लंबी यात्रा होगी। 300 कांवड़िये सात दिन में लगातार दौड़ते हुए इंदौर पहुंचेंगे। 2015 से शुरू हुई यह परंपरा युवाओं में आस्था और सेवा का अनूठा उदाहरण बन चुकी है। सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="436" height="371" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-1.jpg 436w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-1-300x255.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 436px) 100vw, 436px" />
<p>इंदौर के बावड़ी वाले बालाजी मंदिर की डाक कांवड़ यात्रा इस बार रामेश्वरम से 2,100 किलोमीटर की सबसे लंबी यात्रा होगी। 300 कांवड़िये सात दिन में लगातार दौड़ते हुए इंदौर पहुंचेंगे। 2015 से शुरू हुई यह परंपरा युवाओं में आस्था और सेवा का अनूठा उदाहरण बन चुकी है।</p>



<p>सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है, पवित्र नदियों से जल पात्रों में भरकर कंधों पर कांवड़ लेकर यात्री भोलेनाथ को जल अर्पण करते हैं। सावन के महीने में कावड़ का और शिव मंदिरों में जल अर्पण का प्राचीन काल से खास महत्व है। यह हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। मालवा और निमाड़ में नर्मदा से जल लेकर कांवड़ यात्री उज्जैन महाकालेश्वर आते हैं। वहीं, इंदौर के विजय नगर क्षेत्र से बावड़ी वाले बालाजी मंदिर द्वारा डाक कांवड़ यात्रा आयोजित की जा रही है। यह तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम से 2100 किलोमीटर का सफर नॉन स्टॉप तय कर इंदौर पहुंचेगी। 10 अगस्त सोमवार को कांवड़ यात्री रामेश्वरम पहुंचेंगे और 15 अगस्त से यह सुपर फास्ट कांवड़ यात्रा आरंभ होगी, जो 21 अगस्त तक इंदौर पहुंचने की संभावना है।</p>



<p><strong>300 कांवड़िये शामिल होंगे, एक घंटे में 12 किमी<br></strong>इस सावन में रामेश्वरम से इंदौर की यह डाक कांवड़ यात्रा सबसे लंबी होगी। इसमें करीब 300 कांवड़ यात्री रहेंगे। 171 घंटे यानी सात दिन में यह यात्रा पूरी होगी। प्रति घंटे बारह किलोमीटर की गति से कांवड़ यात्रा चलेगी।</p>



<p><strong>2015 से आरंभ हुआ था सिलसिला, रामजी महाराज प्रणेता<br></strong>इस डाक कांवड़ यात्रा का सिलसिला वर्ष 2015 से आरंभ हुआ था। मंदिर के महंत रामजी महाराज इस यात्रा के प्रेरणा स्त्रोत हैं, उन्ही के मार्गदर्शन में डाक कांवड़ यात्रा आयोजित की जाती है। रामजी महाराज का कहना है कि युवा भक्तों की टोली डाक कांवड़ में शामिल रहती है, जो तय दूरी से कांवड़ लेकर दौड़ती है। कांवड़ यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाता है। डाक कांवड़ यात्रा 11 से 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलती है।</p>



<p><strong>अब तक पांच डाक कावड़ यात्रा निकाल चुके<br></strong>बावड़ी वाले बालाजी मंदिर समिति द्वारा अब तक पांच डाक कांवड़ यात्राएं निकाली जा चुकी हैं। वर्ष 2025 में अयोध्या से इंदौर 1100 किलोमीटर, वर्ष 2024 में द्वारका से इंदौर 1100 किलोमीटर, 2023 में गंगोत्री धाम से इंदौर 1500 किलोमीटर, 2022 में अमरकंटक से इंदौर 900 किलोमीटर और 2021 में ओंकारेश्वर से इंदौर 90 किलोमीटर की डाक कांवड़ यात्रा निकाली जा चुकी हैं। इस वर्ष अभी तक की सबसे लंबी दूरी की डाक कांवड़ यात्रा आयोजित की जा रही है।</p>



<p><strong>क्या कहते हैं डाक कांवड़ यात्री<br></strong>सुनील भिड़े और अनिल यादव आरंभ से डाक कांवड़ से जुड़े हैं। इनका कहना है कि सीताराम जी महाराज द्वारा काफी अच्छा इंतजाम किया जाता है। कांवड़ यात्रियों को कोई तकलीफ नहीं रहती है। उनकी सुविधाओं का पूर्ण ध्यान रखा जाता है।</p>



<p><strong>चार प्रकार की होती है कांवड़ यात्रा<br></strong>सामान्य कावड़ यात्रा: इसमें कावड़ यात्री नदी से कांवड़ में जल भरकर शिव को अर्पित करते हैं। इसमें कांवड़ जमीन पर नहीं रखी जाती है, बल्कि रात्रि विश्राम के वक्त स्टैंड पर रखी जाती है।<br>खड़ी कांवड़ यात्रा: खड़ी कांवड़ लेकर यात्री चलते हैं और मुख्य कांवड़ यात्री की मदद के लिए अन्य साथी रहते हैं।<br>दंडवत कांवड़ यात्रा: ऐसी यात्रा भी कुछ क्षेत्रों में श्रद्धा भाव से की जाती है। इसमें जल लेकर यात्री गंतव्य स्थान जहां जल अर्पण करना है वहां तक दंडवत करते हुए जाता है।<br>डाक कांवड़ यात्रा: इसमें यात्री जल लेकर दौड़ते हुए जल अर्पण के लिए पहुंचते हैं।</p>
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		<title>मध्य प्रदेश: झाबुआ में दिखी सीएम मोहन यादव की सादगी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 10:29:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="355" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/34-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/34-2.jpg 811w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/34-2-300x172.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/34-2-768x441.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने झाबुआ के थांदला में एक जनजातीय परिवार के घर पहुंचकर गोदड़ी पर बैठकर पत्तल में पारंपरिक भोजन किया। उन्होंने परिवार से आत्मीय संवाद किया और जनजातीय संस्कृति व परंपराओं का सम्मान किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को झाबुआ जिले के थांदला में जनजातीय समाज के प्रति अपने आत्मीय &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="355" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/34-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/34-2.jpg 811w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/34-2-300x172.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/34-2-768x441.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने झाबुआ के थांदला में एक जनजातीय परिवार के घर पहुंचकर गोदड़ी पर बैठकर पत्तल में पारंपरिक भोजन किया। उन्होंने परिवार से आत्मीय संवाद किया और जनजातीय संस्कृति व परंपराओं का सम्मान किया।</p>



<p>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को झाबुआ जिले के थांदला में जनजातीय समाज के प्रति अपने आत्मीय जुड़ाव का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रदेश स्तरीय स्व-सहायता समूहों के क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री जनजातीय परिवार के सदस्य बसंत सिंह बामनिया के घर पहुंचे और उनके परिवार के साथ आत्मीय समय बिताया। इस दौरान उन्होंने परिवार के बीच पूरी सहजता से बैठकर संवाद किया और जनजातीय संस्कृति को करीब से जाना।</p>



<p>मुख्यमंत्री ने किसी विशेष व्यवस्था के बजाय पारंपरिक जनजातीय जीवनशैली को अपनाते हुए गोदड़ी पर बैठकर पत्तल में भोजन किया। मिट्टी और गारे से बने घर के आंगन में परिवार की महिलाओं द्वारा प्रेमपूर्वक परोसे गए पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया। उन्होंने विशेष रूप से उड़द की दाल और स्थानीय व्यंजन पानिया की सराहना करते हुए परिवार की आत्मीय मेहमाननवाजी की प्रशंसा की।</p>



<p><strong>बहनों ने मुख्यमंत्री की कलाई पर राखी बांधी<br></strong>रक्षाबंधन से पहले सावन माह की पावन बेला में जनजातीय समुदाय की बहनों ने मुख्यमंत्री की कलाई पर राखी बांधी और उनके सुखद एवं मंगलमय जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने भी बहनों को शुभकामनाएं देते हुए महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के प्रति प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।</p>



<p><strong>सीएम ने जनजातीय समाज की परंपराओं पर चर्चा की<br></strong>मुख्यमंत्री ने परिवार के बच्चों से भी आत्मीय बातचीत की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान नन्हे शिवांश को उन्होंने विशेष स्नेह-दुलार दिया। भोजन के बाद उन्होंने परिवार से आजीविका, शिक्षा, शासन की योजनाओं और जनजातीय समाज की परंपराओं पर चर्चा की।</p>



<p>बसंत सिंह बामनिया ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिल चुका है, लेकिन परिवार आज भी अपने पुराने मिट्टी-गारे के घर में रहना पसंद करता है। उनका कहना है कि यह घर उनकी पीढ़ियों की यादों, परंपराओं और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है, जहां उन्हें आज भी आत्मीय सुकून मिलता है।</p>
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		<title> महाकाल मंदिर का वो प्राचीन धाम, जहां हर श्रद्धालु कर सकता है शिवलिंग का स्पर्श; सीएम यादव ने की ये अपील</title>
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		<pubDate>Sun, 02 Aug 2026 10:26:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[महाकाल मंदिर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="394" height="434" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/12-3.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/12-3.jpg 394w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/12-3-272x300.jpg 272w" sizes="auto, (max-width: 394px) 100vw, 394px" />उज्जैन के महाकाल मंदिर में जहां गर्भगृह में प्रवेश सभी श्रद्धालुओं के लिए संभव नहीं है, वहीं मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन जूना महाकाल मंदिर में वर्षभर भगवान शिव का स्पर्श, जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी श्रद्धालुओं से यहां दर्शन-पूजन करने की अपील कर चुके हैं। कालों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="394" height="434" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/12-3.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/12-3.jpg 394w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/12-3-272x300.jpg 272w" sizes="auto, (max-width: 394px) 100vw, 394px" />
<p>उज्जैन के महाकाल मंदिर में जहां गर्भगृह में प्रवेश सभी श्रद्धालुओं के लिए संभव नहीं है, वहीं मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन जूना महाकाल मंदिर में वर्षभर भगवान शिव का स्पर्श, जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी श्रद्धालुओं से यहां दर्शन-पूजन करने की अपील कर चुके हैं।</p>



<p>कालों के काल बाबा श्री महाकाल के दरबार में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन की अभिलाषा लेकर पहुंचते हैं। हर भक्त के मन में एक ही इच्छा होती है। बाबा महाकाल का स्पर्श करें, अपने हाथों से जल और पूजन सामग्री अर्पित करें। लेकिन विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में सभी श्रद्धालुओं का प्रवेश वर्जित होने के कारण कई भक्तों की यह इच्छा अधूरी रह जाती है।</p>



<p>ऐसे श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है कि महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण में ही अति प्राचीन जूना महाकाल मंदिर स्थित है। लोकमान्यता है कि राजा विक्रमादित्य की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें यहीं वृद्ध स्वरूप में दर्शन दिए थे। इसी कारण इसे जूना महाकाल कहा जाता है।</p>



<p>इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल श्रावण ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष श्रद्धालु भगवान शिव का स्पर्श कर सकते हैं। वे स्वयं जल चढ़ा सकते हैं, पंचामृत अभिषेक कर सकते हैं और पूजा-अर्चना भी कर सकते हैं।</p>



<p><strong>‘जो महाकाल का स्पर्श नहीं कर पाए, वह जूना महाकाल जरूर जाएं’<br></strong>मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी कहा है कि जो श्रद्धालु बाबा महाकाल का स्पर्श नहीं कर पाए या पंचामृत अभिषेक नहीं कर सके, वे निराश न हों। महाकाल मंदिर प्रांगण में ही स्थित जूना महाकाल के प्राचीन मंदिर में वे भगवान शिव के वृद्ध स्वरूप के दर्शन, पूजन और पंचामृत अभिषेक कर सकते हैं। मंदिर में अभिषेक कराने वाले पंडित आकाश रावल बताते हैं कि जूना महाकाल की महिमा अत्यंत निराली है। यहां आकर पूजन-अर्चन करने वाले सभी श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।</p>



<p><strong>जानिए, कितना प्राचीन है जूना महाकाल?<br></strong>इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप लगभग 287 वर्ष पुराना है। वहीं, महाकालेश्वर मंदिर का वर्तमान स्वरूप वर्ष 1732 में सिंधिया राजवंश के सचिव रामचंद्र बाबा शेंडवी ने बनवाया था। इसके बाद समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार और विकास कार्य किए गए।</p>



<p>इतिहास में उल्लेख मिलता है कि इससे लगभग एक हजार वर्ष पहले राजा भोज के वंशज उदयादित्य ने भी महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। वहीं, यह भी उल्लेख है कि ईसा पूर्व उज्जैन के राजा चंद्रप्रद्योत भी यहां पूजा-अर्चना करने आते थे। इससे स्पष्ट होता है कि उस समय भी यहां भगवान शिव का प्राचीन मंदिर विद्यमान था।</p>
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