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	<title>अन्तर्राष्ट्रीय &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>अन्तर्राष्ट्रीय &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>ट्रंप सरकार का बड़ा कदम, &#8216;इंडो-पैसिफिक कमांड&#8217; का नाम बदला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:43:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[इंडो-पैसिफिक कमांड]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="419" height="329" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-55.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-55.jpg 419w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-55-300x236.jpg 300w" sizes="(max-width: 419px) 100vw, 419px" />अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया है। इसके साथ ही 2018 में लिया गया आठ साल पुराना फैसला भी पलट दिया गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह बदलाव कमांड &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="419" height="329" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-55.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-55.jpg 419w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-55-300x236.jpg 300w" sizes="(max-width: 419px) 100vw, 419px" />
<p>अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया है। इसके साथ ही 2018 में लिया गया आठ साल पुराना फैसला भी पलट दिया गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह बदलाव कमांड के ऐतिहासिक गौरव और विरासत को सम्मान देने के लिए किया गया है। इस कमांड की स्थापना साल 1947 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन ने की थी।</p>



<p>रक्षा विभाग के बयान के अनुसार, &#8216;1 जनवरी 1947 को स्थापित यह कमांड 70 वर्षों से अधिक समय तक यूएस पैसिफिक कमांड के नाम से संचालित होती रही। यह अमेरिका की एकीकृत सैन्य कमांडों में सबसे पुरानी और सबसे बड़ी कमांड है।&#8217; गौरतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान ही वर्ष 2018 में इसका नाम बदलकर यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया गया था।</p>



<p><strong>ऐतिहासिक विरासत का सम्मान: पेंटागन<br></strong>अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कहा कि पुराने नाम की बहाली कमांड की गहरी ऐतिहासिक जड़ों को सम्मान देती है और प्रशांत क्षेत्र में तैनात सैन्यकर्मियों के बीच गर्व और सामूहिक भावना को मजबूत करेगी। बयान में कहा गया, &#8216;द्वितीय विश्व युद्ध के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने से लेकर कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और अनेक मानवीय अभियानों के समन्वय तक, यूएस पैसिफिक कमांड का नाम सैन्य विरासत और क्षेत्रीय साझेदारियों का प्रतीक रहा है।&#8221;</p>



<p><strong>भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला है दायरा<br></strong>रक्षा विभाग के मुताबिक, नाम बदलने के बावजूद कमांड के अधिकार क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका संचालन क्षेत्र अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है। पेंटागन ने साफ किया कि कमांड का मूल मिशन और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र एवं खुले क्षेत्र को बनाए रखने की प्रतिबद्धता पहले की तरह जारी रहेगी।</p>



<p><strong>2018 में क्यों बदला गया था नाम?<br></strong>साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक परस्पर जुड़ाव को देखते हुए यह बदलाव किया गया है। मैटिस ने उस समय कहा था कि यह कमांड &#8216;बॉलीवुड से हॉलीवुड तक और पेंगुइन से ध्रुवीय भालुओं तक&#8217; फैले विशाल क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालती है और अमेरिका की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में इसकी अहम भूमिका है।</p>



<p><strong>क्या हैं इसके मायने?<br></strong>साल 2018 में जब यूएस पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर इंडो पैसिफिक कमांड किया गया था तो इसे अमेरिका और भारत के रणनीतिक रिश्तों में आ रही तेजी के तौर पर देखा गया था। बीते कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच कई ऐसे समझौते हुए, जिससे दोनों देशों के रणनीतिक संबंध काफी मजबूत हुए थे। हालांकि ट्रंप सरकार के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास आई है। पहले टैरिफ को लेकर और फिर ऑपरेशन सिंदूर में युद्धविराम के मुद्दे पर भारत और अमेरिकी सरकार के बीच मतभेद दिखे। इस सबके बीच अब अमेरिका का इंडो पैसिफिक कमांड का नाम बदलना कई सवाल खड़े कर रहा है।</p>
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		<title>जी7 शिखर सम्मेलन: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यों पकड़ा पीएम मोदी का हाथ? </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:37:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[जी7 शिखर सम्मेलन]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54.jpg 810w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54-300x171.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54-768x439.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैमिली फोटो में हिस्सा लिया, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीढ़ियां चढ़ते समय उनका हाथ पकड़ा। भारत-अमेरिका के बीच आज द्विपक्षीय बैठक की संभावना है। जी7 शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54.jpg 810w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54-300x171.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54-768x439.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैमिली फोटो में हिस्सा लिया, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीढ़ियां चढ़ते समय उनका हाथ पकड़ा। भारत-अमेरिका के बीच आज द्विपक्षीय बैठक की संभावना है।</p>



<p>जी7 शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज यानी 17 जून को द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। इस द्विपक्षीय बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य और अमेरिका से ऊर्जा आयात जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को लेकर उत्सुक हैं और दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत हो सकती है।</p>



<p>सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में है। वार्ताएं लगातार आगे बढ़ रही हैं और आने वाले कुछ सप्ताह में इस समझौते पर काम पूरा होने की उम्मीद है। दोनों देशों ने लगभग एक वर्ष तक चली बातचीत के बाद फरवरी में एक अंतरिम व्यापार समझौता किया था। व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की है कि पीएम मोदी और ट्रंप की बैठक में प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।</p>



<p><strong>आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?<br></strong>इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान ‘नई साझेदारियां बनाने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर मजबूत करने’ विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक आपस में जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर हो गई है। ऐसे में यह विषय और भी अहम हो जाता है। लेकिन कोई भी साझेदारी तभी सफल हो सकती है, जब उसकी नींव भरोसे पर टिकी हो।</p>



<p>उन्होंने कहा, आपसी भरोसा आज सबसे अहम रणनीतिक संपत्ति है। लेकिन दुख की बात है कि आज दुनिया में संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि भरोसे की कमी है और हमारे साझेदारियों का भविष्य इसी भरोसे को फिर से बनाने पर निर्भर करता है।</p>



<p>प्रधानमंत्री ने कहा, भारत में हम दुनिया को एक परिवार के रूप में देखते हैं। हमारा अनुभव बताता है कि विकास तभी सबसे प्रभावी होता है, जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा होता है। इसी सिद्धांत पर हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां आधारित हैं, जैसे अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा सहनशील अवसंरचना गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, मिशन लाइफ और ‘एक पेड़ मां के नाम’।</p>
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		<title>यूएस-ईरान समझौते के बाद होर्मुज से जल्द निकलेंगे 34 भारतीय जहाज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Jun 2026 10:59:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय जहाज]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="435" height="315" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/6-43.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/6-43.jpg 435w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/6-43-300x217.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 435px) 100vw, 435px" />अमेरिका ईरान समझौते का असर दिखना शुरू हो गया है और होर्मुज पर लगी पाबंदियों में थोड़ी नरमी देखी जा रही है। ऐसे में होर्मुज में फंसे भारत के 34 जहाजों के भी जल्द होर्मुज पार करने की उम्मीद है, जिससे देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="435" height="315" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/6-43.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/6-43.jpg 435w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/6-43-300x217.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 435px) 100vw, 435px" />
<p>अमेरिका ईरान समझौते का असर दिखना शुरू हो गया है और होर्मुज पर लगी पाबंदियों में थोड़ी नरमी देखी जा रही है। ऐसे में होर्मुज में फंसे भारत के 34 जहाजों के भी जल्द होर्मुज पार करने की उम्मीद है, जिससे देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।</p>



<p>अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित होगी। इसका असर भी दिखना शुरू हो गया है। दरअसल तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) ला रहे भारतीय टैंकर दिशा ने सुरक्षित होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लिया है। भारत आ रहे 34 अन्य जहाजों के भी जल्द होर्मुज पार करने की उम्मीद है। ये जहाज पश्चिम एशिया संकट के चलते होर्मुज में फंसे हैं।</p>



<p><strong>करोड़ों किसानों और उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत<br></strong>होर्मुज में फंसे 34 जहाजों में से 16 जहाज ऐसे हैं, जो फर्टिलाइजर लेकर भारत आ रहे हैं। इन 16 जहाजों में से 8 पर यूरिया, चार पर डाइ-अमोनियम फॉस्फेट और तीन पर सल्फर और एक पर अमोनिया लदा है। अगर समझौते के तहत सबकुछ सही रहता है और होर्मुज खुलता है तो जल्द ही भारत के करोड़ों किसानों को खेती के लिए फर्टिलाइजर मिल सकते हैं। हालांकि अभी हालात सामान्य होने में वक्त लग सकता है।</p>



<p><strong>तुरंत पूर्ण राहत के आसार नहीं<br></strong>पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया गया। पश्चिम एशिया की कई अहम रिफाइनरियां और गैस प्लांट हमलों में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं। जिससे युद्ध समाप्त होने के बाद भी आपूर्ति सामान्य होने में कई महीनों का वक्त लग सकता है। कतर का रास लफ्फान प्लांट हमले में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुआ है और वहां से ईंधन आपूर्ति सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। भारत के इस गैस प्लांट से एलपीजी आपूर्ति का कॉन्ट्रैक्ट है, ऐसे में हालात सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा।</p>



<p>भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से करीब आधा हिस्सा पश्चिम एशिया से ही आपूर्ति होता है। साथ ही भारत के कुल आयात की 60 प्रतिशत से ज्यादा एलएनजी भी होर्मुज से गुजरकर भारत आती है। यही वजह है कि पश्चिम एशिया संकट के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत को होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो गई। होर्मुज से पार हुआ दिशा टैंकर 18 जून तक भारत आ सकता है और इस पर 62,370 टन एलएनजी है।</p>
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		<title>इजरायल को लेकर बदले ट्रंप के सुर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 09:31:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[इजरायल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="344" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/yutiu.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/yutiu.jpg 723w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/yutiu-300x167.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते के एलान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने दावा किया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर हवाई हमला करके इस शांति समझौते को लगभग पटरी से उतार दिया था, जिसकी वजह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="344" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/yutiu.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/yutiu.jpg 723w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/yutiu-300x167.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते के एलान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने दावा किया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर हवाई हमला करके इस शांति समझौते को लगभग पटरी से उतार दिया था, जिसकी वजह से वाशिंगटन और तेहरान के बीच यह समझौता होने में देरी हुई।</p>



<p>&#8216;द न्यूयॉर्क टाइम्स&#8217; को दिए एक फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने नेतन्याहू को एक बहुत ही मुश्किल इंसान बताया। उन्होंने कहा कि इजरायल को इस शांति समझौते के लिए अमेरिका का बहुत शुक्रगुजार होना चाहिए, क्योंकि इस डील ने ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोक दिया है। ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि&nbsp;ईमानदारी से कहूं तो उन्हें हमारा आभारी होना चाहिए। क्योंकि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो इजरायल दो घंटे भी नहीं टिक पाता।</p>



<h3 class="wp-block-heading">19 जून को स्विट्जरलैंड में साइन होगी डील</h3>



<p>अमेरिका और ईरान दोनों ने साफ किया है कि लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों को&nbsp;तुरंत और स्थायी रूप से खत्म किया जाएगा। यह ऐतिहासिक समझौता 19 जून को स्विट्जरलैंड में साइन होने वाला है।</p>



<p>इस डील के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य के कमर्शियल समुद्री रास्ते को खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर गाइडलाइंस (नियम) तय की जाएंगी। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस समझौते के बाद यह समुद्री व्यापारिक रास्ता हमेशा के लिए टोल-फ्री हो जाएगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इजरायल के लिए स्वीकार करना क्यों है मुश्किल?</h3>



<p>बता दें कि इस पूरी शांति बातचीत में इजरायल को शामिल नहीं किया गया था, और इजरायल ने इस समझौते की खबर पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया भी नहीं दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के लिए इस डील को स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि उनके पास ईरान और लेबनान के हिजबुल्लाह जैसे उसके समर्थित संगठनों के साथ जंग जारी रखने के अपने घरेलू राजनीतिक कारण हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ट्रंप की चेतावनी- बात नहीं मानी तो वसूलेंगे 20% रेवेन्यू</h3>



<p>ट्रंप ने इंटरव्यू में चेतावनी भी दी कि अगर ईरान सरकार तय समय सीमा के भीतर अंतिम परमाणु समझौते पर राजी नहीं होती है, तो अमेरिकी सेना ईरान पर फिर से हमले शुरू कर देगी। यही नहीं, ट्रंप ने एक अनोखा प्रस्ताव रखते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में अमेरिका मिडिल ईस्ट का रक्षक बन जाएगा, लेकिन इसके बदले में पूरे क्षेत्र की कमाई (रेवेन्यू) का 20 प्रतिशत हिस्सा लेगा।</p>



<p>जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या सऊदी अरब और यूएई जैसे अमेरिकी सहयोगी देश अमेरिका को एक &#8216;पेड पुलिस फोर्स&#8217; बनाने की इस बात पर सहमत हैं, तो उन्होंने सीधा जवाब न देते हुए सिर्फ इतना कहा कि उन्होंने अभी इस मुद्दे पर बातचीत शुरू ही की है। उन्होंने कहा कि ऐसा सिर्फ तब होगा, अगर ईरान दुश्मन बना रहता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ईरान के नए सुप्रीम लीडर पर बदला ट्रंप का सुर</h3>



<p>इसके अलावा दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने ईरान के मौजूदा नेतृत्व और वहां के नए सर्वोच्च नेता आयतल्लाह मोजतबा खमेनेई को व्यावहारिक बताया। ट्रंप का यह रुख युद्ध के शुरुआती दिनों से बिल्कुल अलग है, जब उन्होंने ईरानी जनता से अपील की थी कि अमेरिकी और इजरायली बमबारी खत्म होने के बाद वे उठ खड़े हों और अपनी सरकार का तख्तापलट कर दें।</p>
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		<title>ईरान को 300 अरब डॉलर देगा अमेरिका, ट्रंप को क्या मिलेगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 09:22:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ईरान]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/98yuij.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/98yuij.jpg 729w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/98yuij-300x167.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है और शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस पर आधिकारिक मुहर भी लग जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इस समझौते को लेकर कितने बेताब थे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह ईरान को 300 अरब डॉलर का पुननिर्माण पैकेज देने के लिए तैयार हो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/98yuij.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/98yuij.jpg 729w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/98yuij-300x167.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है और शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस पर आधिकारिक मुहर भी लग जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इस समझौते को लेकर कितने बेताब थे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह ईरान को 300 अरब डॉलर का पुननिर्माण पैकेज देने के लिए तैयार हो गए।</p>



<p>इस समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी मेहर ने अमेरिका-ईरान के बीच 14 सूत्रीय सहमति पत्र का मसौदा पब्लिश किया है।&nbsp;समझौता ज्ञापन के मसौदे में कई मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत रोकने, ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंध हटाने, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज का प्रावधान शामिल है।</p>



<p>बता दें कि&nbsp;इस दस्तावेज को वॉशिंगटन या तेहरान ने आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया है लेकिन उम्मीद है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ईरानी अधिकारियों द्वारा घोषित शुरुआती समझौते के बाद यह एक व्यापक शांति प्रक्रिया का आधार बनेगा।&nbsp;इस मेमोरैंडम पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाने हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">महीनों की बातचीत के बाद समझौते को दिया गया अंतिम रूप</h2>



<p>सामने आई जानकारी से पता चलता है कि यह समझौता दुश्मनी खत्म करने और बातचीत के दूसरे दौर के लिए माहौल बनाने पर केंद्रित है। इस दूसरे दौर में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और आर्थिक सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।</p>



<p>ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने पुष्टि की है कि महीनों की बातचीत के बाद एक समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दिया गया है। परिषद ने इसे &#8220;इस्लामाबाद वार्ता&#8221; का नाम दिया है, जो मध्यस्थता की कोशिशों में पाकिस्तान की भूमिका को दर्शाता है।</p>



<p>काउंसिल ने एक बयान में कहा, &#8220;ईरान ने अपने शहीद नेता की अगुवाई में अमेरिकी जायोनी दुश्मन पर अपनी बढ़त साबित कर दी है। इस्लामिक रिपब्लिक के सुप्रीम लीडर (ईश्वर उनकी रक्षा करे) के निर्देशों, सभी लोगों के समर्थन और इस्लाम के योद्धाओं की अथक कोशिशों के साथ-साथ कई महीनों तक चली मुश्किल और गहन बातचीत के बाद और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के फैसले के आधार पर ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने की बातचीत (इस्लामाबाद बातचीत) पर &#8216;मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग&#8217; (समझौता ज्ञापन) का मसौदा 14 जून की शाम को अंतिम रूप दिया गया।&#8221;</p>



<p>बयान में आगे कहा गया, &#8220;हुए समझौतों के आधार पर लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य अभियान आज रात से ही तुरंत और हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे और इसके अलावा ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी भी तुरंत और पूरी तरह से खत्म कर दी जाएगी।&#8221;</p>



<p>इसमें आगे कहा गया, &#8220;इस &#8216;मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग&#8217; पर आधिकारिक तौर पर शुक्रवार, 19 जून को हस्ताक्षर किए जाएंगे।&#8221; ईरान ने यह भी संकेत दिया कि अंतिम समझौते पर बातचीत तभी शुरू होगी जब वॉशिंगटन मेमोरेंडम में बताए गए अहम वादों को पूरा कर लेगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">14 सूत्रीय शांति समझौते को समझें</h2>



<p><em><strong>मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, मेमोरैंडम के ड्राफ्ट में कई प्रावधान शामिल किए गए हैं-</strong></em></p>



<p>लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करना।<br>ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल न देने और ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने का अमेरिका का वादा।<br>30 दिनों के अंदर नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह खत्म करना।<br>ईरान के आस-पास के इलाकों से अमेरिकी सेना को हटाना।<br>30 दिनों के अंदर ईरान की व्यवस्था के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना।<br>ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े एक्सपोर्ट पर लगी पाबंदियों को रोकना।<br>एनर्जी एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई तक ईरान की पूरी पहुंच।<br>ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण प्लान पेश करने का अमेरिका और उसके सहयोगियों का वादा।<br>परमाणु मुद्दों और पाबंदियों में बड़ी राहत पर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों का बातचीत का समय।<br>परमाणु हथियार न बनाने के लिए &#8216;परमाणु अप्रसार संधि&#8217; (Nuclear Non-Proliferation Treaty) के तहत ईरान का फिर से वादा।<br>इस इलाके में सैन्य तैनाती न बढ़ाने और बातचीत के दौरान नई पाबंदियां न लगाने का अमेरिका का वादा।<br>बातचीत के दौरान ईरान की फ्रीज की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति को जारी करना, जिसमें से आधी रकम बातचीत शुरू होने से पहले जारी की जाएगी।<br>समझौते के लागू होने की निगरानी के लिए एक निगरानी तंत्र बनाना।<br>संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के जरिए अंतिम समझौते को मंजूरी देना।</p>



<p>न्यूज एजेंसी मेहर ने यह भी बताया कि अंतिम बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी जब तक तीन शर्तें पूरी नहीं हो जातीं। पहली ईरान के फ्रीज किए गए फंड का आधा हिस्सा जारी करना, दूसरी ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंधों को रोकना और तीसरी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना।</p>



<h2 class="wp-block-heading">न्यूक्लियर प्रोग्राम का मसला अभी भी अनसुलझा</h2>



<p>ट्रंप के इस एलान के बावजूद कि ईरान के साथ डील &#8220;अब पूरी हो चुकी है&#8221;, सामने आए मेमोरैंडम से ऐसा लगता है कि न्यूक्लियर से जुड़े सबसे विवादित मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।</p>



<p>खबरों के मुताबिक, इस दस्तावेज में ईरान के परमाणु हथियार न बनाने के वादे को दोहराया गया है, लेकिन इसमें यूरेनियम संवर्धन (enrichment) की सीमा, परमाणु सुविधाओं को खत्म करने या मौजूदा दायित्वों से परे अतिरिक्त निरीक्षण तंत्र के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।</p>



<p>इसके बजाय उम्मीद है कि मेमोरेंडम के लागू होने के बाद एक अलग 60-दिन की प्रक्रिया के दौरान इन मुद्दों पर बातचीत होगी। खबरों के अनुसार, इस ड्राफ्ट में भविष्य की बातचीत का दायरा भी सीमित किया गया है।</p>



<p>ईरान के मुताबिक, चर्चा केवल संवर्धित परमाणु सामग्री, संवर्धन गतिविधियों, प्रतिबंधों में ढील और आर्थिक पुनर्निर्माण तक सीमित रहेगी। खबरों के अनुसार, ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को उसके समर्थन को एजेंडे से बाहर रखा गया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आखिरी बातचीत से पहले ईरान ने रखीं शर्तें</h2>



<p>ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने पहले कहा था कि आखिरी समझौते पर बातचीत तभी शुरू होगी जब तेहरान यह पुष्टि कर देगा कि वॉशिंगटन ने मेमोरेंडम के तहत अपने वादे पूरे कर लिए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया ने यह भी बताया कि फ्रीज किए गए एसेट्स को रिलीज करना, सेंक्शन में राहत और समुद्री पाबंदियों को हटाना किसी भी विस्तृत बातचीत के लिए जरूरी शर्तें हैं।</p>



<p>हालांकि रिपोर्ट किए गए मेमोरेंडम में दुश्मनी खत्म करने के लिए एक बड़ा फ्रेमवर्क बताया गया है, लेकिन जरूरी डिटेल्स अभी भी वेरिफाई नहीं हुए हैं और दोनों सरकारों ने अभी तक पूरा टेक्स्ट ऑफिशियली पब्लिश नहीं किया है।</p>
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