<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>धर्म &#8211; Live Halchal</title>
	<atom:link href="https://livehalchal.com/category/devotional/faith/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<description>Latest News, Updated News, Hindi News Portal</description>
	<lastBuildDate>Tue, 11 Aug 2026 05:18:18 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.6</generator>

<image>
	<url>https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg</url>
	<title>धर्म &#8211; Live Halchal</title>
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>आरती के बाद जल का आचमन क्यों है जरूरी?</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%9c%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%9a%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b/680730</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 05:18:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[आचमन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=680730</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="407" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-9.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-9.jpg 769w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-9-300x197.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-9-310x205.jpg 310w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />सनातन शास्त्रों में पूजा-पाठ का अधिक महत्व बताया गया है। विशेष नियम का पालन करने से ही साधक को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और ईश्वर की कृपा बरसती है। पूजा के दौरान देवी-देवताओं की आरती करने का विधान है। आरती के बाद की थाली के चारों तरफ जल घुमाकर उसका आचमन करना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="407" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-9.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-9.jpg 769w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-9-300x197.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-9-310x205.jpg 310w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सनातन शास्त्रों में पूजा-पाठ का अधिक महत्व बताया गया है। विशेष नियम का पालन करने से ही साधक को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और ईश्वर की कृपा बरसती है। पूजा के दौरान देवी-देवताओं की आरती करने का विधान है।</p>



<p>आरती के बाद की थाली के चारों तरफ जल घुमाकर उसका आचमन करना या उसे भक्तों पर छिड़कना एक अधिक महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है। आरती के बाद आचमन करने के पीछे का खास रहस्य है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आचमन क्यों किया जाता है और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। अगर नहीं पता, ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं इसके बारे में।</p>



<p><strong>क्यों किया जाता है आचमन?<br></strong>आरती के समय दीपक और कपूर को जलाया जाता है, जिसे अग्नि तत्व का प्रतीक माना जाता है। देवी-देवताओं की आरती करने के बाद ताप को शांत करने और भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए आरती के चारों तरफ जल को घुमाया जाता है।</p>



<p><strong>शरीर की होती है शुद्धि<br></strong>धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा से पहले भी आचमन किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि प्रभु की पूजा के लिए शरीर और मन दोनों का पवित्र होना बहुत जरूरी है। अगर व्यक्ति का शरीर और मन शुद्ध नहीं होता है, तो उसका पूजा-पाठ में मन नहीं लगता, जिसकी वजह से पूजा अधूरी मानी जाती है।</p>



<p><strong>आचमन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान<br></strong>आचमन करते समय आपका मुख भगवान के सामने होना चाहिए।<br>इस दौरान मंत्रों का जप करना चाहिए।<br>आचमन के जल को तीन बार जल पिया जाता है और चौथी बार हाथ धोए जाते हैं।<br>आचमन को खड़े होकर या फिर चलते हुए नहीं करना चाहिए।<br>इस एक पवित्र स्थान पर ही करना चाहिए।<br>आचमन को कुशा या ऊनी आसन पर बैठकर करना शुभ माना जाता है।<br>आचमन का जल हाथ में अधिक नहीं लेना चाहिए। ज्यादा जल लेने से नीचे जमीन पर गिर सकता है। जल बहुत अधिक मात्रा में न पिएं।<br>आचमन के लिए तांबे, पीतल, चांदी के पात्र का ही प्रयोग करना चाहिए। प्लास्टिक या फिर लोहे का बर्तन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।<br>आचमन का जल पीने के बाद इसे उसे अपने ऊपर छिड़कते है। इससे व्यक्ति के शरीर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पितरों की शांति करने के लिए हरियाली अमावस्या पर लगाएं ये पौधे</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf/680725</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 05:07:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाली अमावस्या]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=680725</guid>

					<description><![CDATA[<img width="575" height="456" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-21.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-21.jpg 575w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-21-300x238.jpg 300w" sizes="(max-width: 575px) 100vw, 575px" />हिंदू धर्म में सावन में पड़ने वाली हरियाली अमावस्या को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन पितरों और महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="575" height="456" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-21.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-21.jpg 575w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-21-300x238.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 575px) 100vw, 575px" />
<p>हिंदू धर्म में सावन में पड़ने वाली हरियाली अमावस्या को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन पितरों और महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को है।</p>



<p>हिंदू धर्म और गरुड़ पुराण के अनुसार, हरियाली अमावस्या के दिन कुछ विशेष पौधे लगाने से पितर प्रसन्न होते हैं, जिससे परिवार के सदस्यों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि हरियाली अमावस्या के दिन पितरों को तृप्त करने के लिए कौन से पौधे लगाने चाहिए।</p>



<p><strong>अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए पौधे<br>पीपल का पेड़-&nbsp;</strong>धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीपल के पेड़ की जड़ में ब्रह्मा जी, तने में भगवान विष्णु और सबसे ऊपरी हिस्से में महादेव का वास माना जाता है। इसके अलावा इस पेड़ में पितरों का भी वास माना गया है। हरियाली अमावस्या के दिन पीपल का पेड़ लगाने से व्यक्ति की कुंडली में से पितृ दोष की समस्या दूर होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। शनिवार के दिन पेड़ के पास दीपक जलाकर पूजा करने से शनि की साढ़े साती और ढैय्या से मुक्ति मिलती है। साथ ही सभी दुख दूर होते हैं।</p>



<p><strong>बरगद का पेड़-&nbsp;</strong>धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरियाली अमावस्या के अवसर पर बरगद का पेड़ लगाने से पितर अधिक प्रसन्न होते हैं और परिवार के लोगों को अपना आशीर्वाद देते हैं। हिंदू धर्म में बरगद के पेड़ को दीर्घायु और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस पेड़ की पूजा और परिक्रमा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती हैं और व्यक्ति के जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस पेड़ को पूर्व या उत्तर दिशा में लगाना शुभ माना जाता है।</p>



<p><strong>बेलपत्र का पौधा-&nbsp;</strong>सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस महीने में पूजा के दौरान शिव जी को बेलपत्र चढ़ाने का अधिक महत्व है। इससे साधक को जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। ऐसा माना जाता है कि हरियाली अमावस्या के दिन बेलपत्र का पौधा लगाने से महादेव की कृपा से पितरों को जन्म-मरण के चक्र से छुटकारा मिलता है। इस पौधे में उत्तर-पूर्व दिशा या पूर्व दिशा में लगाया जा सकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सावन की बारिश और भगवान शिव का क्या है गहरा नाता?</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5/680680</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 04:56:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शिव]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=680680</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="389" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-7.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-7.jpg 814w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-7-300x189.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-7-768x484.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />क्या आपने कभी सोचा है कि सावन का महीना आते ही बारिश क्यों होने लगती है? क्या मन में ये सवाल आता है कि भगवान शिव का बारिश से क्या नाता हो सकता है? वास्तव में इस महीने से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य हैं जो सावन और शिव के संबंध को दिखाते हैं। इस मौसम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="389" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-7.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-7.jpg 814w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-7-300x189.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-7-768x484.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>क्या आपने कभी सोचा है कि सावन का महीना आते ही बारिश क्यों होने लगती है? क्या मन में ये सवाल आता है कि भगवान शिव का बारिश से क्या नाता हो सकता है? वास्तव में इस महीने से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य हैं जो सावन और शिव के संबंध को दिखाते हैं।</p>



<p>इस मौसम में पड़ने वाली बारिश की हर एक बूंद का एक अलग महत्व होता है और शिव महापुराण ही नहीं बल्कि स्कंद पुराण में भी इस बात का जिक्र मिलता है कि सावन में ही बारिश क्यों होती है और इस बारिश का भगवान शिव से कैसे एक अनोखा जुड़ाव है। आइए आपको बताते हैं बारिश के इस मौसम और भगवान शिव के बीच के संबंध के बारे में कुछ जरूरी बातें।</p>



<p><strong>भगवान शिव और सावन की बारिश का संबंध<br></strong>सावन हिंदू पंचांग का पांचवा महीना है जो अक्सर जुलाई या अगस्त के बीच आता है। इस समय धरती पर मानसून भी दस्तक देता है और बारिश की बूंदें पृथ्वी पर गिरने लगती हैं।</p>



<p>धार्मिक दृष्टिकोण से यह बारिश केवल मौसम की दस्तक नहीं मानी जाती है बल्कि शिव महापुराण में लिखा है कि इस महीने जल का गिरना भगवान शिव के जलाभिषेक का प्रतीक भी होता है। इस दौरान मनुष्य ही नहीं बल्कि देवतागण भी भगवान शिव का बारिश के रूप में जलाभिषेक करते हैं।</p>



<p><strong>सावन और शिव जी के संबंध से जुड़ी पौराणिक कथा<br></strong>प्राचीन काल की बात है जब देवता और असुरों ने मिलकर अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया। इस समुद्र मंथन में सबसे पहले हलाहल विष निकला जिसमें इतनी शक्ति थी कि वह संपूर्ण विश्व का विनाश कर सकता था। उस समय भगवान शिव ने इस विष को होने कंठ में रोक लिया और तभी से वो नीलकंठ कहलाए।</p>



<p>हलाहल विष इतना शक्तिशाली था कि भगवान शिव का कंठ भी इसके प्रभाव से जलने लगा और जब वह विष उनके कंठ में रुका तो उसकी तेज अग्नि से पूरे ब्रह्मांड में अग्निकांड शुरू हो गया। संपूर्ण पृथ्वी में अग्नि उत्पन्न हो गई, वनों में आग लग गई, इस ज्वाला से पर्वत पिघलने लगे और नदियां सूखने लगी। सभी जीव-जंतु भी इस अग्नि से मरने लगे।</p>



<p>उस समय देवताओं ने इंद्र देव से प्रार्थना की और वर्षा का आग्रह किया। उस समय आकाश में डमरू की ध्वनि सी गूंज उठी और शिव तांडव होने लगा। उस समय इंद्र देव ने बारिश की और बारिश की हर एक बूंद शिव के कंठ में उठती अग्नि को शांत करती गई। जैसे-जैसे बारिश की बूंदें शिव जी के शरीर पर पड़ीं उनके कंठ की ज्वाला शांत होती गई। उसी समय से आज भी सावन के महीने में बारिश होती है और इस पावन महीने को शिव जी का महीना माना जाता है।</p>



<p><strong>सावन का महीना शिव जी को समर्पित होता है<br></strong>सावन में भगवान शिव की पूजा केवल एक परंपरा नहीं है बल्कि यह एक ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ने का माध्यम भी माना जाता है। मुख्य रूप से सावन महीने के सभी सोमवार शिव पूजा के लिए प्रमुख माने जाते हैं और इस दिन भक्त भगवान शिव का श्रद्धा से जलाभिषेक करते हैं। जो भक्त सावन में सच्चे मन से शिव का पूजन और जलाभिषेक करता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।</p>



<p>वास्तव में सावन और शिव का संबंध अटूट है और प्राचीन समय से चली आ रही ये परंपरा आज भी मौजूद है जब हर सावन में बारिश होती है और भक्त शिव जी का पूजन श्रद्धा भाव से करते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सावन शिवरात्रि पर इन 5 आसान उपायों से प्रसन्न हो जाते हैं भोलेनाथ</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%87%e0%a4%a8-5-%e0%a4%86%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8/680677</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Aug 2026 04:51:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[सावन शिवरात्रि]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=680677</guid>

					<description><![CDATA[<img width="595" height="469" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-6.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-6.jpg 595w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-6-300x236.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 595px) 100vw, 595px" />सावन का महीना भगवान शिव को कितना प्रिय है, ये तो हम सभी जानते हैं। और जब बात सावन महीने की शिवरात्रि की हो, तो इसकी अहमियत कई गुना बढ़ जाती है। इस बार सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को पड़ रही है। शिव जी बहुत भोले हैं, उन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी दिखावे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="595" height="469" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-6.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-6.jpg 595w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/2-6-300x236.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 595px) 100vw, 595px" />
<p>सावन का महीना भगवान शिव को कितना प्रिय है, ये तो हम सभी जानते हैं। और जब बात सावन महीने की शिवरात्रि की हो, तो इसकी अहमियत कई गुना बढ़ जाती है। इस बार सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को पड़ रही है। शिव जी बहुत भोले हैं, उन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी दिखावे या बड़े आडंबर की जरूरत नहीं होती।</p>



<p>अगर आप सच्चे मन से कुछ छोटे-छोटे उपाय भी कर लें, तो भोलेनाथ आपकी हर मुराद पूरी कर देते हैं। आइए सीधे जानते हैं वो 5 आसान उपाय जो सावन शिवरात्रि के दिन आपको जरूर करने चाहिए:</p>



<p><strong>सुबह जलाभिषेक से करें दिन की शुरुआत<br></strong>शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। इसके बाद तांबे के लोटे में साफ जल लें, उसमें थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं और शिवलिंग पर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए अर्पित करें। अगर संभव हो तो साथ में बेलपत्र जरूर चढ़ाएं। सुबह के समय किया गया ये आसान सा जलाभिषेक आपकी सारी परेशानियां दूर कर सकता है।</p>



<p><strong>चार प्रहर में करें शिवलिंग का अभिषेक<br></strong>अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो शिवरात्रि की रात के चारों प्रहर में पूजा जरूर करें। हर प्रहर में दूध, दही, घी और शहद से शिवलिंग का अभिषेक करें। जो लोग चार प्रहर की पूजा करते हैं, उनके जीवन से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं।</p>



<p><strong>रात में जागरण और शिव चालीसा का पाठ<br></strong>शिवरात्रि में रात के समय सोने की बजाय जागरण करने का विशेष महत्व बताया गया है। रात में भगवान शिव के भजनों को सुनें या गाएं और शिव चालीसा का पाठ जरूर करें। मान्यता है कि शिवरात्रि की रात में भगवान शिव पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं और अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं।</p>



<p><strong>घर के मुख्य द्वार और ईशान कोण का उपाय<br></strong>वास्तु में ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को भगवान का स्थान माना गया है। शिवरात्रि की शाम को अपने घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ घी के दीपक जलाएं। इसके साथ ही घर के ईशान कोण में भी एक दीया जरूर रखें। इससे घर की सारी नेगेटिव एनर्जी बाहर चली जाती है और सुख-समृद्धि आती है।</p>



<p><strong>सफेद चंदन से त्रिपुंड बनाएं<br></strong>भोलेनाथ को सफेद रंग और चंदन की शीतलता बहुत पसंद है। पूजा के समय शिवलिंग पर सफेद चंदन से तीन लाइनों वाला ‘त्रिपुंड’ बनाएं। इसके बाद उसी चंदन से अपने माथे पर भी तिलक लगाएं। इससे आपका मन शांत रहेगा और तनाव दूर होगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आज कामिका एकादशी 2026 व्रत, यहां पढ़ें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण का समय</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a5%80-2026-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%af%e0%a4%b9%e0%a4%be/680578</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Aug 2026 05:50:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[कामिका एकादशी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=680578</guid>

					<description><![CDATA[<img width="533" height="463" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-15.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-15.jpg 533w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-15-300x261.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 533px) 100vw, 533px" />प्रत्येक महीने 2 एकादशी का व्रत रखा जाता है। जिसमें एक शुक्ल पक्ष और दूसरी कृष्ण पक्ष में आती है। श्रावण मास में भी दो एकादशी की तिथि है। जिसमें कामिका एकादशी सावन माह के कृष्ण पक्ष को मनाई जाएगी। इस साल यह व्रत 09 अगस्त, रविवार के दिन रखा जाएगा। वही इस व्रत का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="533" height="463" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-15.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-15.jpg 533w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/08/1-15-300x261.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 533px) 100vw, 533px" />
<p>प्रत्येक महीने 2 एकादशी का व्रत रखा जाता है। जिसमें एक शुक्ल पक्ष और दूसरी कृष्ण पक्ष में आती है। श्रावण मास में भी दो एकादशी की तिथि है। जिसमें कामिका एकादशी सावन माह के कृष्ण पक्ष को मनाई जाएगी।</p>



<p>इस साल यह व्रत 09 अगस्त, रविवार के दिन रखा जाएगा। वही इस व्रत का पारण अगले दिन यानी 10 तारीख को रखा जाना है। आइए जानते हैं कामिका एकादशी से जुड़ी सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, आरती, मंत्र, पारण का समय और भगवान विष्णु के प्रिय भोग के बारे में।</p>



<p><strong>कामिका एकादशी 2026 तिथि<br></strong>एकादशी तिथि- 08 अगस्त 2026 को दोपहर 01 बजकर 59 मिनट पर<br>एकादशी तिथि का समापन- 09 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजकर 04 मिनट पर<br>एकादशी व्रत पारण समय- 10 अगस्त 2026 सोमवार को सुबह 6 बजे से लेकर 8 बजे तक</p>



<p><strong>कामिका एकादशी 2026 पूजा विधि<br></strong>कामिका एकादशी के पवित्र मौके पर सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए।</p>



<p>इसके बाद साफ वस्त्र धारण करें। पूजा कक्ष को साफ करते हुए भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। इसके बाद भगवान की मूर्ति का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल के मिश्रण) से स्नान कराना। इसके बाद भगवान को नए और साफ कपड़े पहनाएं। उन्हें चंदन का तिलक लगाना शुभ माना जाता है।</p>



<p>इसके बाद भोग के तौर पर उन्हें पीले रंग से जुड़ी चीजों का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके लिए केसर युक्त हलवा, तुलसी, पंचामृत, आम-केले और मखाने की खीर अत्यंत प्रिय है।</p>



<p><strong></strong>कामिका एकादशी का व्रत उत्तम फल प्रदान करता है। इस एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा इस दिन तीर्थ स्थलों पर स्नान-दान करना आध्यात्मिक नजरिए से बेहद शुभ माना जाता है।</p>



<p>कामिका एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि की पूजा करने से पितरों के भी कष्ट दूर होते हैं। श्रावण माह में भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति द्वारा गंधर्वों और नागों की पूजा हो जाती है।</p>



<p><strong>एकादशी व्रत 2026 कथा<br></strong>एकादशी व्रत का वर्णन पद्म पुराण में देखने को मिलता है, जहां खुद भगवान श्रीकृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर को एक कथा सुनाते हुए कहते हैं कि, एक समय की बात एक गांव में क्रोधी ठाकुर नाम का एक जमींदार रहता था जो अपनी बात मनवाने के लिए किसी भी हद तक जाने में संकोच नहीं करता था। एक दिन किसी बात को लेकर उस जमींदार का झगड़ा एक ब्राह्मण से हो गया। गुस्से में आकर ठाकुर ने उस ब्राह्मण की हत्या कर दी।</p>



<p>ब्राह्मण हत्या करने के बाद ठाकुर को अपने किए पर बड़ा पछतावा हुआ। उसने ब्राह्मण का अंतिम संस्कार करने की इच्छा जताई लेकिन अन्य ब्राह्मणों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि, तुम पर ब्रह्म हत्या का पाप है, जब तक तुम इस पाप से मुक्त नहीं हो जाते, तब तक तुम समाज से बेदखल रहोगे।</p>



<p>ठाकुर ने अपनी मुक्ति का उपाय पाने के लिए एक ऋषि से मदद मांगी। उन्होंने उसे कामिका एकादशी व्रत रखने की सलाह दी। उन्होंने ठाकुर को बताया कि, अगर तुम इस व्रत का विधिवत पालन करते हो, तो तुम्हें ब्रह्म हत्या के पाप से छुटकारा मिल जाएगा।</p>



<p>ऋषि के कहने पर ठाकुर ने एकादशी व्रत का पालन किया और भगवान विष्णु की पूजा-अराधना की। रात को जब वो सोने गया तब उसे सपने में भगवान श्रीहरि ने दर्शन दिए कि, तुम ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त हो चुके हो। इस तरह कामिका एकादशी के पुण्य प्रभाव से उस क्रोधी ठाकुर को न सिर्फ ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिली बल्कि उसे अंत में मोक्ष की प्राप्ति हुई।</p>



<p><strong>कामिका एकादशी 2026 मंत्र<br></strong>कामिका एकादशी के मौके पर भगवान विष्णु से जुड़े इन मंत्रों का जाप आपको आध्यात्मिक लाभ देने के साथ भगवन की कृपा के पात्र भी बनाएगा।</p>



<p>ऊं श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥</p>



<p>ऊं नमोः भगवते वासुदेवाय नमः।</p>



<p>ऊं नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:</p>



<p>अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय</p>



<p>त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप</p>



<p>श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥</p>



<p><strong>कामिका एकादशी 2026 आरती<br></strong>ऊं जय जगदीश हरे…</p>



<p>ऊं जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।</p>



<p>भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥</p>



<p>ऊं जय जगदीश हरे…</p>



<p>जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।</p>



<p>स्वामी दुःख विनसे मन का।</p>



<p>सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥</p>



<p>ऊं जय जगदीश हरे…</p>



<p>मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।</p>



<p>स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।</p>



<p>तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥</p>



<p>ऊं जय जगदीश हरे…</p>



<p>तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।</p>



<p>स्वामी तुम अन्तर्यामी।</p>



<p>पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥</p>



<p>ऊं जय जगदीश हरे…</p>



<p>तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।</p>



<p>स्वामी तुम पालन-कर्ता।</p>



<p>मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥</p>



<p>ऊं जय जगदीश हरे…</p>



<p>तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।</p>



<p>स्वामी सबके प्राणपति।</p>



<p>किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥</p>



<p>ऊं जय जगदीश हरे…</p>



<p>दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।</p>



<p>स्वामी तुम ठाकुर मेरे।</p>



<p>अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥</p>



<p>ऊं जय जगदीश हरे…</p>



<p>विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।</p>



<p>स्वामी पाप हरो देवा।</p>



<p>श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा॥</p>



<p>ऊं जय जगदीश हरे…</p>



<p>श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।</p>



<p>स्वामी जो कोई नर गावे।</p>



<p>कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥</p>



<p>ऊं जय जगदीश हरे…</p>



<p><strong>मां लक्ष्मी की आरती<br></strong>ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता</p>



<p>तुम को निश दिन सेवत, हर विष्णु विधाता</p>



<p>ऊं जय लक्ष्मी माता।।</p>



<p>उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता</p>



<p>सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता</p>



<p>ऊं जय लक्ष्मी माता।।</p>



<p>दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पति दाता</p>



<p>जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धि धन पाता</p>



<p>ऊं जय लक्ष्मी माता।।</p>



<p>तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभ दाता</p>



<p>कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता</p>



<p>ऊं जय लक्ष्मी माता।।</p>



<p>जिस घर तुम रहती सब सद्&#x200d;गुण आता</p>



<p>सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता</p>



<p>ऊं जय लक्ष्मी माता।।</p>



<p>तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता</p>



<p>खान पान का वैभव, सब तुमसे आता</p>



<p>ऊं जय लक्ष्मी माता।।</p>



<p>शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता</p>



<p>रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता</p>



<p>ऊं जय लक्ष्मी माता।।</p>



<p>महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता</p>



<p>उर आनंद समाता, पाप उतर जाता</p>



<p>ऊं जय लक्ष्मी माता।।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
