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	<title>धर्म &#8211; Live Halchal</title>
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	<lastBuildDate>Sun, 12 Apr 2026 05:51:49 +0000</lastBuildDate>
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	<title>धर्म &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>रविवार के दिन ऐसे करें सूर्य देव की पूजा, चमक जाएगी सोई हुई किस्मत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 05:51:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[सूर्य देव]]></category>
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					<description><![CDATA[सनातन धर्म में सूर्य देव को ‘प्रत्यक्ष देवता’ माना गया है, क्योंकि वे साक्षात दिखाई देते हैं। वहीं, ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को सफलता, मान-सम्मान, पिता और आरोग्य का कारक माना जाता है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि अगर इस दिन पूरी श्रद्धा और सही विधि से सूर्य &#8230;]]></description>
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<p>सनातन धर्म में सूर्य देव को ‘प्रत्यक्ष देवता’ माना गया है, क्योंकि वे साक्षात दिखाई देते हैं। वहीं, ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को सफलता, मान-सम्मान, पिता और आरोग्य का कारक माना जाता है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि अगर इस दिन पूरी श्रद्धा और सही विधि से सूर्य उपासना की जाए, तो व्यक्ति की सोई हुई किस्मत चमक सकती है और जीवन के हर क्षेत्र में उसे विजय प्राप्त होती है। ऐसे में भगवान सूर्य की विधिवत पूजा करें और आरती से पूजा का समापन करें।</p>



<p><strong>रविवार के दिन क्या न करें?</strong><br>सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए जितनी जरूरी पूजा है, उतने ही जरूरी कुछ नियम भी हैं। रविवार के दिन सूर्यास्त के बाद नमक का सेवन करने से बचना चाहिए। साथ ही, इस दिन बाल कटवाना या तेल मालिश करना भी शुभ नहीं माना जाता। इसके अलावा तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) से दूरी बनाए रखें।</p>



<p><strong>।भगवान सूर्य देव की आरती।। (Bhagwan Surya Dev Ji Ki Aarti)</strong></p>



<p>ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।</p>



<p>जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।</p>



<p>धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।</p>



<p>अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।</p>



<p>फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।</p>



<p>गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।</p>



<p>स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।</p>



<p>प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।</p>



<p>वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।</p>



<p>ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।</p>



<p>जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।</p>



<p>धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>पूर्णिमा की रात दीपक के ये गुप्त उपाय बना सकते हैं आपको मालामाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 05:42:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[पूर्णिमा]]></category>
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					<description><![CDATA[हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ माना जाता है और जब यह वैशाख महीने में आती है, तो इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसे ‘बुध पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष विधान है। ऐसी मान्यता है कि &#8230;]]></description>
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<p>हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ माना जाता है और जब यह वैशाख महीने में आती है, तो इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसे ‘बुध पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष विधान है।</p>



<p>ऐसी मान्यता है कि इस दिन (Vaishakh Purnima 2026) देवी-देवता पृथ्वी पर आते हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। वहीं, इस दिन को लेकर कई सारे उपाय बताए गए हैं, जिन्हें करने से घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है। ऐसे में आइए उन चमत्कारी उपाय को जानते हैं।</p>



<p><strong>करें दीपक के ये खास उपाय (Vaishakh Purnima 2026)</strong></p>



<p><strong>मुख्य द्वार</strong><br>घर का मुख्य द्वार वह स्थान है, जहां से सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। ऐसे में वैशाख पूर्णिमा की रात मुख्य द्वार के दोनों ओर घी के दीपक जलाएं। ऐसा करने से घर में शुभता का आगमन होता है। साथ ही परिवार में खुशहाली आती है।</p>



<p><strong>तुलसी के पास</strong><br>तुलसी को हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। इन्हें भगवान विष्णु की प्रिया और माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में वैशाख पूर्णिमा की रात तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जरूर जलाएं। इससे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।</p>



<p><strong>रसोई घर</strong><br>रसोई घर को अन्नपूर्णा देवी का स्थान माना जाता है। ऐसे में वैशाख पूर्णिमा की रात रसोई में चूल्हे के पास या पानी के बर्तन के पास एक दीपक जलाकर रखें। इससे मां अन्नपूर्णा खुश होती हैं और घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती है।</p>



<p><strong>पानी का स्थान</strong><br>घर में पानी के स्रोत जैसे पानी की टंकी, नल के पास या बालकनी में जहां आप पानी रखते हैं, वहां भी दीपक जरूर जलाएं। जल को धन का प्रतीक माना जाता है। इस स्थान को रोशन करने से घर में धन की स्थिरता बनी रहती है।</p>



<p><strong>ध्यान रखें ये बातें<br></strong>दीपक जलाते समय मन पवित्र रखें।<br>दीपक में शुद्ध घी या तिल के तेल का प्रयोग करें।<br>तामसिक चीजों से परहेज करें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मोहिनी एकादशी व्रत से होगा सभी पापों का नाश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 05:22:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मोहिनी एकादशी व्रत]]></category>
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					<description><![CDATA[एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत किया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi 2026) मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत किया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi 2026) मनाई जाती है।</p>



<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं कि कब मनाई जाएगी मोहिनी एकादशी।</p>



<p><strong>मोहिनी एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Mohini Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 26 अप्रैल को शाम 06 बजकर 06 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, तिथि का समापन 27 अप्रैल को शाम 06 बजकर 15 मिनट पर होगा। ऐसे में 27 अप्रैल को मोहिनी एकादशी मनाई जाएगी।</p>



<p><strong>मोहिनी एकादशी 2026 व्रत पारण का समय (Mohini Ekadashi 2026 Vrat Paran Time)<br></strong>द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण करने का समय सुबह 05 बजकर 43 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 21 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय व्रत का पारण किया जा सकता है। इसके बाद अन्न-धन आदि चीजों का दान करें।</p>



<p>ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 17 मिनट से 05 बजकर 01 मिनट तक<br>विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 23 मिनट तक<br>गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 53 मिनट से 07 बजकर 14 मिनट तक<br>निशिता मुहूर्त – रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 40 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्य और चंद्रमा की स्थिति<br></strong>सूर्योदय का समय- प्रातः 05 बजकर 44 मिनट पर<br>सूर्यास्त का समय- सायं 06 बजकर 54 मिनट पर<br>चंद्रोदय का समय- दोपहर 03 बजकर 47 मिनट पर<br>चंद्रास्त का समय- रात 03 बजकर 32 मिनट पर</p>



<p><strong>मोहिनी एकादशी पूजा सामग्री (Mohini Ekadashi Puja Samagri)<br></strong>नारियल<br>चंदन<br>गंगाजल<br>आम के पत्ते<br>कुमकुम<br>फूल<br>मिठाई<br>अक्षत<br>पंचमेवा<br>धूप<br>दीप<br>फल<br>लौंग<br>चौकी<br>सुपारी<br>तुलसी दल<br>पीला कपड़ा<br>भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा</p>



<p><strong>इन बातों का रखें ध्यान<br></strong>एकादशी के दिन किसी से वाद-विवाद न करें।<br>किसी के बारे में गलत न सोचें।<br>काले रंग के कपड़े धारण न करें।<br>तुलसी के पत्ते न तोड़ें।<br>घर में साफ-सफाई का ध्यान रखें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आम के पत्तों के बिना क्यों अधूरा है हर मांगलिक कार्य</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 05:00:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मांगलिक कार्य]]></category>
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					<description><![CDATA[पूजा में आम के पत्तों से लेकर आम के पेड़ की लड़की तक का इस्तेमाल जरूरी रूप से किया जाता है। हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य जैसे पूजा-पाठ या गृह प्रवेश आदि में आम्रपल्लव यानी आम के पत्तों का इस्तेमाल होता है, जिसे धार्मिक दृष्टि से बहुत ही शुभ माना गया है। चलिए जानते &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पूजा में आम के पत्तों से लेकर आम के पेड़ की लड़की तक का इस्तेमाल जरूरी रूप से किया जाता है। हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य जैसे पूजा-पाठ या गृह प्रवेश आदि में आम्रपल्लव यानी आम के पत्तों का इस्तेमाल होता है, जिसे धार्मिक दृष्टि से बहुत ही शुभ माना गया है। चलिए जानते हैं इसके बारे में।</p>



<p><strong>किसका प्रतीक हैं आम के पत्ते?<br></strong>पूजा के कलश से लेकर मुख्य द्वार पर लगे तोरण में आम के पत्तों को इस्तेमाल किया जाता है। हिंदू धर्म में आम के पत्तों को पवित्रता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। वास्तु शास्त्र में भी मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाना विशेष लाभकारी माना गया है। इससे नकारात्मक ऊर्जा का घर में प्रवेश नहीं होता। साथ ही इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, जिससे घर में सुख-सौभाग्य आता है।</p>



<p><strong>इसलिए उपयोग किए जाते हैं आम के पत्ते<br></strong>आम के ताजे पत्ते नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने का काम करते हैं। जिससे घर का वातावरण शुद्ध होता है और सुख-शांति बनी रहती है। हिंदू धर्म में पूजा के दौरान कलश के ऊपर आम के पत्ते रखने के बाद नारियर रखा जाता है।</p>



<p>पौराणिक मान्यता के अनुसार, कलश के ऊपर रखे आम के पत्ते देवताओं के अंगों का प्रतीक हैं। वहीं नारियल उनके सिर का प्रतिनिधित्व करता है। इसके साथ ही घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों की माला यानी तोरण लगाना मंगल कार्य में देवों को आमंत्रित करने का संकेत माना जाता है।</p>



<p><strong>क्या हैं अन्य मान्यताएं<br></strong>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आम के पत्ते हनुमान जी को प्रिय माने गए हैं। ऐसे में यदि इनका इस्तेमाल शुभ कार्यों में किया जाए, तो इससे हनुमान जी की कृपा साधक व उसके परिवार पर बनी रहती है। साथ ही आम के पत्तों में मां लक्ष्मी का भी वास माना जाता है, जिस कारण शुभ कार्यों में या फिर आम के पत्तों का तोरण बनाकर मुख्य द्वार पर लगाने से लक्ष्मी मां का भी वास घर में होता है।</p>



<p><strong>इस तरह से पूजा में होते हैं इस्तमाल<br></strong>शुभ कार्यों में मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाया जाता है।<br>पूजा में जल कलश में आम के पत्ते रखने के बाद नारियल रखा जाता है।<br>यज्ञ की वेदी को सजाने में भी आम के पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है।<br>आप के पत्ते से ही आरती या हवन के बाद जल छिड़का जाता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मासिक कालाष्टमी पर जरूर करें ये खास उपाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 04:51:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मासिक कालाष्टमी]]></category>
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					<description><![CDATA[वैदिक पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को &#8216;मासिक कालाष्टमी&#8217; के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में आज यानी शुक्रवार 10 अप्रैल को वैशाख कालाष्टमी का संयोग बन रहा है। भगवान काल भैरव की पूजा निशिता मुहूर्त (मध्यरात्रि) में करना विशेष फलदायी माना गया है। जहां यह तिथि तंत्र-मंत्र &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को &#8216;मासिक कालाष्टमी&#8217; के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में आज यानी शुक्रवार 10 अप्रैल को वैशाख कालाष्टमी का संयोग बन रहा है।</p>



<p>भगवान काल भैरव की पूजा निशिता मुहूर्त (मध्यरात्रि) में करना विशेष फलदायी माना गया है। जहां यह तिथि तंत्र-मंत्र के साधकों के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है, वहीं गृहस्थ लोगों के लिए भी भैरव बाबा की भक्ति सुख-शांति का मार्ग खोलती है। चलिए पढ़ते हैं इस दिन के कुछ विशेष उपाय।</p>



<p><strong>दूर होंगे जीवन के सभी कष्ट<br></strong>यदि आप लंबे समय से परेशानियों से घिरे हैं, तो आज यह विशेष उपाय जरूर आजमा सकते हैं। इसके लिए कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को गुड़ वाली रोटी खिलाएं। माना जाता है कि कालाष्टमी के दिन इस उपाय को करने से काल भैरव की असीम कृपा प्राप्त होती है और दुखों का नाश होता है।</p>



<p><strong>दूर होता है मन का डर<br></strong>कालाष्टमी के मौके पर भैरव देव के मंदिर जाकर चौमुखी सरसों के तेल का दीपक जलाएं और काले तिल, उड़द की दाल, व काले कपड़े आदि का दान करें। ऐसा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा (विशेषकर रात्रि में) करने से शनि दोष, नकारात्मक ऊर्जा और भय आदि से मुक्ति मिलती है।</p>



<p><strong>नकारात्मक ऊर्जा का होगा नाश<br></strong>यदि आप घर में क्लेश या नकारात्मक ऊर्जा से परेशान हैं, तो कालाष्टमी पर किया गया ये उपाय आपके काम आ सकता है। इसके लिए कालाष्टमी की पूजा में भैरव बाबा को मीठी रोटी (गुड़ या शक्कर की) का भोग लगाएं। ऐसा करने से बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव खत्म होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।</p>



<p><strong>रखें इन बातों का ध्यान<br></strong>काल भैरव की पूजा में सात्विक आचरण अपनाएं और मांसाहार और शराब के सेवन से बचें।<br>पूजा के दौरान मन को शांत रखें और मन में नकारात्मक विचार न लाएं।<br>काल भैरव न्याय के देवता हैं, इसलिए किसी भी निर्बल व्यक्ति को कष्ट न पहुंचाएं।<br>पशु विशेषकर कुत्ते आदि को परेशान न करें, क्योंकि यह भगवान काल भैरव को प्रिय है।<br>किसी का अपमान या विवाद करने से भी आपको काल भैरव की कृपा प्राप्त नहीं होती।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>इस मासिक जन्माष्टमी पर जरूर करें श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 05:28:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
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					<description><![CDATA[वैशाख माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी आज यानी 9 अप्रैल को मनाई जा रही है। इस दिन पर पूजा का मुहूर्त रात 12 बजे से देर रात 12 बजकर 45 मिनट तक रहने वाला है। यदि आप कान्हा जी की विशेष कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो वैशाख माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण &#8230;]]></description>
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<p>वैशाख माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी आज यानी 9 अप्रैल को मनाई जा रही है। इस दिन पर पूजा का मुहूर्त रात 12 बजे से देर रात 12 बजकर 45 मिनट तक रहने वाला है। यदि आप कान्हा जी की विशेष कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो वैशाख माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण चालीसा का पाठ जरूर करें।</p>



<p><strong>श्रीकृष्ण चालीसा<br>दोहा</strong></p>



<p>बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम।</p>



<p>अरुण अधर जनु बिम्बा फल,पिताम्बर शुभ साज॥</p>



<p>जय मनमोहन मदन छवि,कृष्णचन्द्र महाराज।</p>



<p>करहु कृपा हे रवि तनय,राखहु जन की लाज॥</p>



<p><strong>चौपाई</strong></p>



<p>जय यदुनंदन जय जगवंदन। जय वसुदेव देवकी नन्दन॥</p>



<p>जय यशुदा सुत नन्द दुलारे। जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥</p>



<p>जय नटनागर, नाग नथइया॥ कृष्ण कन्हइया धेनु चरइया॥</p>



<p>पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो। आओ दीनन कष्ट निवारो॥</p>



<p>वंशी मधुर अधर धरि टेरौ। होवे पूर्ण विनय यह मेरौ॥</p>



<p>आओ हरि पुनि माखन चाखो। आज लाज भारत की राखो॥</p>



<p>गोल कपोल, चिबुक अरुणारे। मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥</p>



<p>राजित राजिव नयन विशाला। मोर मुकुट वैजन्तीमाला॥</p>



<p>कुंडल श्रवण, पीत पट आछे। कटि किंकिणी काछनी काछे॥</p>



<p>नील जलज सुन्दर तनु सोहे। छबि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥</p>



<p>मस्तक तिलक, अलक घुँघराले। आओ कृष्ण बांसुरी वाले॥</p>



<p>करि पय पान, पूतनहि तार्यो। अका बका कागासुर मार्यो॥</p>



<p>मधुवन जलत अगिन जब ज्वाला। भै शीतल लखतहिं नंदलाला॥</p>



<p>सुरपति जब ब्रज चढ़्यो रिसाई। मूसर धार वारि वर्षाई॥</p>



<p>लगत लगत व्रज चहन बहायो। गोवर्धन नख धारि बचायो॥</p>



<p>लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई। मुख मंह चौदह भुवन दिखाई॥</p>



<p>दुष्ट कंस अति उधम मचायो॥ कोटि कमल जब फूल मंगायो॥</p>



<p>नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें। चरण चिह्न दै निर्भय कीन्हें॥</p>



<p>करि गोपिन संग रास विलासा। सबकी पूरण करी अभिलाषा॥</p>



<p>केतिक महा असुर संहार्यो। कंसहि केस पकड़ि दै मार्यो॥</p>



<p>मातपिता की बन्दि छुड़ाई । उग्रसेन कहँ राज दिलाई॥</p>



<p>महि से मृतक छहों सुत लायो। मातु देवकी शोक मिटायो॥</p>



<p>भौमासुर मुर दैत्य संहारी। लाये षट दश सहसकुमारी॥</p>



<p>दै भीमहिं तृण चीर सहारा। जरासिंधु राक्षस कहँ मारा॥</p>



<p>असुर बकासुर आदिक मार्यो। भक्तन के तब कष्ट निवार्यो॥</p>



<p>दीन सुदामा के दुःख टार्यो। तंदुल तीन मूंठ मुख डार्यो॥</p>



<p>प्रेम के साग विदुर घर माँगे। दर्योधन के मेवा त्यागे॥</p>



<p>लखी प्रेम की महिमा भारी। ऐसे श्याम दीन हितकारी॥</p>



<p>भारत के पारथ रथ हाँके। लिये चक्र कर नहिं बल थाके॥</p>



<p>निज गीता के ज्ञान सुनाए। भक्तन हृदय सुधा वर्षाए॥</p>



<p>मीरा थी ऐसी मतवाली। विष पी गई बजाकर ताली॥</p>



<p>राना भेजा साँप पिटारी। शालीग्राम बने बनवारी॥</p>



<p>निज माया तुम विधिहिं दिखायो। उर ते संशय सकल मिटायो॥</p>



<p>तब शत निन्दा करि तत्काला। जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥</p>



<p>जबहिं द्रौपदी टेर लगाई। दीनानाथ लाज अब जाई॥</p>



<p>तुरतहि वसन बने नंदलाला। बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥</p>



<p>अस अनाथ के नाथ कन्हइया। डूबत भंवर बचावइ नइया॥</p>



<p>सुन्दरदास आ उर धारी। दया दृष्टि कीजै बनवारी॥</p>



<p>नाथ सकल मम कुमति निवारो। क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥</p>



<p>खोलो पट अब दर्शन दीजै। बोलो कृष्ण कन्हइया की जै॥</p>



<p><strong>दोहा</strong></p>



<p>यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि।</p>



<p>अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वरूथिनी एकादशी पर किन गलतियों से रूठ सकती हैं मां लक्ष्मी?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 05:20:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
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					<description><![CDATA[वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादसी को वरूथिनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी मोक्ष, सौभाग्य व पापों से मुक्ति दिलाने वाली मानी गई है। इस दिन व्रत करना और विधि-विधान से भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा करना शुभ माना गया है। ऐसे में घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादसी को वरूथिनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी मोक्ष, सौभाग्य व पापों से मुक्ति दिलाने वाली मानी गई है। इस दिन व्रत करना और विधि-विधान से भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा करना शुभ माना गया है। ऐसे में घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए एकादशी पर इन विशेष नियमों का ध्यान जरूर रखें।</p>



<p><strong>न करें ये गलतियां<br></strong>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी तिथि पर माता तुलसी, भगवान विष्णु के निमित्त निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसे में इस दिन भूल से भी तुलसी में जल अर्पित न हीं करना चाहिए, अन्यथा इससे तुलसी माता का व्रत खंडित हो सकता है।<br>एकादशी पर तुलसी दल तोड़ने से बचना चाहिए। ऐसे में आप पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले यानी द्वादशी तिथि पर ही तोड़कर रख सकते हैं।<br>एकादशी के दिन बाल धोने की भी मनाही होती है। वहीं कुछ लोग इन दिन पर कंघी भी नहीं करते, क्योंकि एकादशी के दिन बालों का टूटना शुभ नहीं माना जाता।<br>एकादशी के दिन चावल का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।<br>एकादशी की पूजा में काले रंग के कपड़े न पहनें, क्योंकि यह नकारात्मकता को बढ़ावा देता है।</p>



<p><strong>जरूर करें ये काम<br></strong>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु तुलसी के बिना भोग स्वीकार नहीं करते। इसलिए एकादशी पर उनके भोग में तुलसी दल शामिल करना न भूलें। एकादशी पर सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें। ऐसा करने से विष्णु जी की विशेष कृपा की प्राप्ति होती है।</p>



<p><strong>करें भगवान विष्णु के मंत्रों का जप<br></strong>ॐ नमो भगवते वासुदेवाय</p>



<p>विष्णु भगवते वासुदेवाय मन्त्र<br>ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥</p>



<p><strong>ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥</strong></p>



<p>शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्<br>विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।<br>लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्<br>वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥</p>



<p><strong>करें इन चीजों का दान<br></strong>शास्त्रों में माना गया है कि वरूथिनी एकादशी पर दान करने से 10,000 वर्ष की तपस्या के समान फल मिलता है। ऐसे में इस दिन पर आप अपनी क्षमता के अनुसार, अन्न, जल, वस्त्र, तिल और गाय का दान कर सकते हैं। इससे साधक को विष्णु जी कृपा प्राप्त होती है, जिससे पापों से मुक्ति मिलती है और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही इस तिथि पर गरीबों को भोजन कराना और दीप दान करना भी अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भगवान शिव खोल देंगे बंद किस्मत के ताले, बुध प्रदोष व्रत के दिन जरूर करें शिव चालीसा का पाठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 05:22:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शिव]]></category>
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					<description><![CDATA[सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस व्रत को हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक को सभी भय &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस व्रत को हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है।</p>



<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक को सभी भय से मुक्ति मिलती है और महादेव की कृपा बरसती है।</p>



<p>अगर आप भी शिव जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो प्रदोष व्रत के दिन शिव चालीसा का पाठ जरूर करें और शिवलिंग का अभिषेक करें। ऐसा माना जाता है कि इन कामों को करने से साधक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है।</p>



<p><strong>इस उपाय से दूर होगी विवाह की बाधा<br></strong>अगर आपके विवाह में कोई बाधा आ रही है, तो प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करें और व्रत रखें। शिव चालीसा और कथा का पाठ करें। अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से विवाह में कोई बाधा से मुक्ति मिलती है और मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।</p>



<p><strong>शिव चालीसा<br>॥ दोहा ॥</strong></p>



<p>जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल मूल सुजान।</p>



<p>कहत अयोध्यादास तुम,देहु अभय वरदान॥</p>



<p><strong>॥ चौपाई ॥</strong></p>



<p>जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥</p>



<p>भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥</p>



<p>अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥</p>



<p>वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे॥</p>



<p>मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥</p>



<p>कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥</p>



<p>नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥</p>



<p>कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥</p>



<p>देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥</p>



<p>किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥</p>



<p>तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥</p>



<p>आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥</p>



<p>त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥</p>



<p>किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥</p>



<p>दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥</p>



<p>वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥</p>



<p>प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला॥</p>



<p>कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥</p>



<p>पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥</p>



<p>सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥</p>



<p>एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥</p>



<p>कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥</p>



<p>जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥</p>



<p>दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥</p>



<p>त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो॥</p>



<p>लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट ते मोहि आन उबारो॥</p>



<p>मात-पिता भ्राता सब होई।संकट में पूछत नहिं कोई॥</p>



<p>स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥</p>



<p>धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥</p>



<p>अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥</p>



<p>शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥</p>



<p>योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥</p>



<p>नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥</p>



<p>जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥</p>



<p>ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥</p>



<p>पुत्र होन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥</p>



<p>पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥</p>



<p>त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा॥</p>



<p>धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥</p>



<p>जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे॥</p>



<p>कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥</p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong></p>



<p>नित्त नेम उठि प्रातः ही,पाठ करो चालीसा।</p>



<p>तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश॥</p>



<p>मगसिर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान।</p>



<p>स्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अधूरा रह सकता है आपका मंगलवार व्रत, पूजा से जुड़े इन नियमों का जरूर करें पालन</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2/667947</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 05:21:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मंगलवार व्रत]]></category>
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					<description><![CDATA[मंगलवार व्रत की विधि सरल है, जो सुबह से शुरू होकर शाम तक चलती है। मंगलवार का व्रत न केवल संकटों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि इससे कुंडली में मंगल दोष भी शांत किया जा सकता है। इसके साथ ही साधक के साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यदि आप मंगलवार व्रत का पूर्ण &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>मंगलवार व्रत की विधि सरल है, जो सुबह से शुरू होकर शाम तक चलती है। मंगलवार का व्रत न केवल संकटों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि इससे कुंडली में मंगल दोष भी शांत किया जा सकता है। इसके साथ ही साधक के साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यदि आप मंगलवार व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करना चाहते हैं, तो शास्त्रों में वर्णित इस विधि और नियमों का पालन जरूर करें।</p>



<p><strong>मंगलवार व्रत की विधि –<br></strong>सूर्योदय से पूर्व यानी ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।<br>इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनें, क्योंकि यह रंग हनुमान जी और मंगल ग्रह को प्रिय माना गया है।<br>पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र करें। इसके बाद भगवान गणेश और हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।<br>गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल, पान के 11 या 21 पत्तों की माला और लाल फूल अर्पित करें।<br>भोग के रूप में हनुमान जी को बेसन के लड्डू या बूंदी अर्पित करनी चाहिए। साथ ही आप मौसमी फल भी चढ़ा सकते हैं।<br>सबसे पहले श्री गणेश की वंदना करें, फिर हनुमान जी की आराधना करें।<br>अंत में मंगलवार व्रत की कथा का पाठ करें।</p>



<p><strong>करना न भूलें ये काम<br></strong>हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त हैं। ऐसे में बिना राम नाम के हनुमान जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। हनुमान जी को शीघ्र प्रसन्न करने के लिए पूजा के दौरान ‘राम’ नाम का जप जरूर करें। इसके साथ ही आप सुंदरकांड का पाठ भी कर सकते हैं।<br>इस दिन भूखों को अन्न और जरूरतमंदों को वस्त्र का दान करने से साधक के पुण्य फलों में वृद्धि होती है।<br>पूर्ण फल की प्राप्ति के लिए लगातार 21 मंगलवार तक इस विधि का पालन करते हुए वर्त करना चाहिए और अंतिम मंगलवार को विधि-विधान से उद्यापन करना चाहिए।ॉ</p>



<p><strong>इन नियमों और सावधानियों का रखें ध्यान<br></strong>व्रत के दौरान साधारण नमक का सेवन वर्जित है। इसके अलावा प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा का विचार भी मन में न लाएं।<br>इस दिन शारीरिक व मानसिक पवित्रता बनाए रखें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।<br>यदि पूरे दिन निराहार रहना आपके लिए संभव न हो, तो आप शाम की पूजा के बाद गेहूं और गुड़ से बना भोजन कर सकते हैं। बस उसमें नमक का प्रयोग नहीं होना चाहिए।<br>किसी से वाद-विवाद, अपशब्द बोलना या क्रोध करने जैसे कार्यों से बचना चाहिए, वरना आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।<br>मंगलवार के दिन बाल और नाखून काटने से बचें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>एकादशी के दिन इस खास विधि से करें देवी लक्ष्मी की पूजा</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%bf-%e0%a4%b8/667944</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 05:03:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[देवी लक्ष्मी]]></category>
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					<description><![CDATA[वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरूथिनी एकादशी कहा जाता है। शास्त्रों में इस एकादशी का महत्व कन्यादान और सालों की तपस्या के समान पुण्यकारी बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति वरूथिनी एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करता है, उसे न केवल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरूथिनी एकादशी कहा जाता है। शास्त्रों में इस एकादशी का महत्व कन्यादान और सालों की तपस्या के समान पुण्यकारी बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति वरूथिनी एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करता है, उसे न केवल सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है, बल्कि उसके घर की तिजोरी कभी खाली नहीं रहती।</p>



<p>इस साल वरूथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi 2026) का संयोग बेहद शुभ नक्षत्रों में बन रहा है, जो आर्थिक उन्नति के द्वार खोलने वाला है। आइए जानते हैं इस दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के अचूक उपाय, जो इस प्रकार हैं –</p>



<p><strong>ब्रह्म मुहूर्त पूजा<br></strong>एकादशी के दिन सूर्योदय से पूहले उठकर स्नान करें। अगर हो पाए तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। साफ और पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करें, क्योंकि ये रंग मां लक्ष्मी और विष्णु जी को बेहद प्रिय हैं।</p>



<p><strong>श्री यंत्र और मां लक्ष्मी का अभिषेक<br></strong>पूजा घर में भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। इस दिन चांदी के सिक्के या श्री यंत्र का अभिषेक गाय के कच्चे दूध और गंगाजल से करें। अभिषेक के बाद केसर का तिलक लगाएं।</p>



<p><strong>अष्टलक्ष्मी<br></strong>शाम के समय घर के मंदिर में गाय के घी का नौ मुखी दीपक जलाएं। मां लक्ष्मी के सम्मुख कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। माना जाता है कि वरूथिनी एकादशी पर कनकधारा का पाठ करने से रुका हुआ धन वापस मिल जाता है।</p>



<p><strong>मंत्र का जाप व आरती<br></strong>कमलगट्टे की माला से इस ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। अंत में आरती करें।</p>



<p><strong>॥ कनकधारा स्तोत्रम् ॥ (Kanakadhara Stotram)<br></strong>अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्तीभृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम्।</p>



<p>अङ्गीकृताऽखिल-विभूतिरपाङ्गलीलामाङ्गल्यदाऽस्तु मम मङ्गळदेवतायाः॥1॥</p>



<p>मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेःप्रेमत्रपा-प्रणहितानि गताऽऽगतानि।</p>



<p>मालादृशोर्मधुकरीव महोत्पले यासा मे श्रियं दिशतु सागरसम्भवायाः॥2॥</p>



<p>विश्वामरेन्द्रपद-वीभ्रमदानदक्षआनन्द-हेतुरधिकं मुरविद्विषोऽपि।</p>



<p>ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणर्द्धमिन्दीवरोदर-सहोदरमिन्दिरायाः॥3॥</p>



<p>आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दआनन्दकन्दमनिमेषमनङ्गतन्त्रम्।</p>



<p>आकेकरस्थित-कनीनिकपक्ष्मनेत्रंभूत्यै भवेन्मम भुजङ्गशयाङ्गनायाः॥4॥</p>



<p>बाह्वन्तरे मधुजितः श्रित कौस्तुभे याहारावलीव हरिनीलमयी विभाति।</p>



<p>कामप्रदा भगवतोऽपि कटाक्षमाला,कल्याणमावहतु मे कमलालयायाः॥5॥</p>



<p>कालाम्बुदाळि-ललितोरसि कैटभारे-धाराधरे स्फुरति या तडिदङ्गनेव।</p>



<p>मातुः समस्तजगतां महनीयमूर्ति-भद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनायाः॥6॥</p>



<p>प्राप्तं पदं प्रथमतः किल यत् प्रभावान्माङ्गल्यभाजि मधुमाथिनि मन्मथेन।</p>



<p>मय्यापतेत्तदिह मन्थर-मीक्षणार्धंमन्दाऽलसञ्च मकरालय-कन्यकायाः॥7॥</p>



<p>दद्याद् दयानुपवनो द्रविणाम्बुधारामस्मिन्नकिञ्चन विहङ्गशिशौ विषण्णे।</p>



<p>दुष्कर्म-घर्ममपनीय चिराय दूरंनारायण-प्रणयिनी नयनाम्बुवाहः॥8॥</p>



<p>इष्टाविशिष्टमतयोऽपि यया दयार्द्र दृष्ट्यात्रिविष्टपपदं सुलभं लभन्ते।</p>



<p>दृष्टिः प्रहृष्ट-कमलोदर-दीप्तिरिष्टांपुष्टिं कृषीष्ट मम पुष्करविष्टरायाः॥9॥</p>



<p>गीर्देवतेति गरुडध्वजभामिनीतिशाकम्भरीति शशिशेखर-वल्लभेति।</p>



<p>सृष्टि-स्थिति-प्रलय-केलिषु संस्थितायैतस्यै नमस्त्रिभुवनैकगुरोस्तरुण्यै॥10॥</p>



<p>श्रुत्यै नमोऽस्तु नमस्त्रिभुवनैक-फलप्रसूत्यैरत्यै नमोऽस्तु रमणीय गुणाश्रयायै।</p>



<p>शक्त्यै नमोऽस्तु शतपत्र निकेतनायैपुष्ट्यै नमोऽस्तु पुरुषोत्तम-वल्लभायै॥11॥</p>



<p>नमोऽस्तु नालीक-निभाननायैनमोऽस्तु दुग्धोदधि-जन्मभूत्यै।</p>



<p>नमोऽस्तु सोमामृत-सोदरायैनमोऽस्तु नारायण-वल्लभायै॥12॥</p>



<p>नमोऽस्तु हेमाम्बुजपीठिकायैनमोऽस्तु भूमण्डलनायिकायै।</p>



<p>नमोऽस्तु देवादिदयापरायैनमोऽस्तु शार्ङ्गायुधवल्लभायै॥13॥</p>



<p>नमोऽस्तु देव्यै भृगुनन्दनायैनमोऽस्तु विष्णोरुरसि स्थितायै।</p>



<p>नमोऽस्तु लक्ष्म्यै कमलालयायैनमोऽस्तु दामोदरवल्लभायै॥14॥</p>



<p>नमोऽस्तु कान्त्यै कमलेक्षणायैनमोऽस्तु भूत्यै भुवनप्रसूत्यै।</p>



<p>नमोऽस्तु देवादिभिरर्चितायैनमोऽस्तु नन्दात्मजवल्लभायै॥15॥</p>



<p>सम्पत्कराणि सकलेन्द्रिय-नन्दनानिसाम्राज्यदान विभवानि सरोरुहाक्षि।</p>



<p>त्वद्-वन्दनानि दुरिताहरणोद्यतानिमामेव मातरनिशं कलयन्तु नान्यत्॥16॥</p>



<p>यत्कटाक्ष-समुपासनाविधिःसेवकस्य सकलार्थसम्पदः।</p>



<p>सन्तनोति वचनाऽङ्गमानसैःस्त्वां मुरारि-हृदयेश्वरीं भजे॥17॥</p>



<p>सरसिज-निलये सरोजहस्तेधवळतरांशुक-गन्ध-माल्यशोभे।</p>



<p>भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञेत्रिभुवन-भूतिकरि प्रसीद मह्यम्॥18॥</p>



<p>दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्टस्वर्वाहिनीविमलचारु-जलप्लुताङ्गीम्।</p>



<p>प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेषलोकाधिराजगृहिणीम मृताब्धिपुत्रीम्॥19॥</p>



<p>कमले कमलाक्षवल्लभेत्वं करुणापूर-तरङ्गितैरपाङ्गैः।</p>



<p>अवलोकय मामकिञ्चनानांप्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः॥20॥</p>



<p>स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहंत्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्।</p>



<p>गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनोभवन्ति ते भुविबुधभाविताशयाः॥21॥</p>



<p>॥ श्रीमदाध्यशङ्कराचार्यविरचितं श्री कनकधारा स्तोत्रम् समाप्तम् ॥</p>
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