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	<title>धर्म &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>धर्म &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>हनुमान चालीसा की पहली चौपाई में छिपा है जीवन की सफलता का सबसे बड़ा मूलमंत्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Sep 2026 05:42:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="378" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-27.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-27.jpg 890w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-27-300x184.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-27-768x470.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से हनुमान चालीसा का पाठ करने से जीवन के भय, संकट और नकारात्मकता दूर होती है और हनुमान जी की कृपा से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। हनुमान चालीसा की हर चौपाई में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="378" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-27.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-27.jpg 890w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-27-300x184.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-27-768x470.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से हनुमान चालीसा का पाठ करने से जीवन के भय, संकट और नकारात्मकता दूर होती है और हनुमान जी की कृपा से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।</p>



<p>हनुमान चालीसा की हर चौपाई में कई रहस्य छिपे हैं। लेकिन क्या आपने कभी इसकी पहली चौपाई के गहरे अर्थ और उसमें छिपे रहस्य पर ध्यान दिया है? ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इस महत्वपूर्ण चौपाई का मतलब।</p>



<p><strong>हनुमान चालीसा की पहली चौपाई (Jai Hanuman Gyan Gun Sagar Lyrics)</strong></p>



<p><strong>जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।<br>जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥</strong></p>



<p>हनुमान चालीसा की इस पहली पंक्ति का अर्थ है कि हे श्री हनुमान जी! आपकी जय हो, आप ज्ञान और गुणों के अथाह सागर हैं। हे वानरों के स्वामी! आपकी जय हो। आपका यश और प्रकाश तीनों लोकों में फैला हुआ है।</p>



<p><strong>जीवन के लिए बड़ी सीख<br></strong>हनुमान चालीसा की इस पहली चौपाई से हमें जीवन में एक बड़ा सबक मिलता है। इस चौपाई से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में व्यक्ति के पास चाहे कितनी भी ताकत, पद और ज्ञान हो, उसे सदैव हनुमान जी की तरह ही विनम्र बने रहना चाहिए। अहंकार से दूर रहकर ही इंसान का यश तीनों लोकों में फैल सकता है।</p>



<p><strong>हनुमान चालीसा की पहली चौपाई पढ़ने के लाभ<br></strong>धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान चालीसा की पहली चौपाई का पाठ करने से स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है और ज्ञान की प्राप्ति होती है। साथ ही हनुमान जी की कृपा से समाज में मान-सम्मान मिलता है। इसके अलावा भक्त को मानसिक शांति मिलती है। मन का भटकाव और अज्ञान दूर होता है, जिससे एकाग्रता बढ़ती है।</p>



<p><strong>इन बातों का रखें ध्यान<br></strong>हनुमान चालीसा का पाठ करने से पहले स्नान करें और साफ कपड़े धारण करें।<br>पाठ के दौरान मन को इधर-उधर न भटकाएं। अपना पूरा ध्यान प्रभु के चरणों में रखें।<br>हनुमान चालीसा का पाठ करते समय जल्दबाजी न करें।<br>उच्चारण स्पष्ट और शुद्ध होना चाहिए। गलत शब्दों का प्रयोग करने से बचें।<br>पाठ के दिनों में या पाठ करने से पहले मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।</p>
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		<title>भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए किस धागे से बनाएं अनंत सूत्र?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Sep 2026 05:08:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान विष्णु]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="394" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/1-41.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/1-41.jpg 885w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/1-41-300x191.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/1-41-768x489.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी के पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है। वैदिक पंचांग के अनुसार, अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi 2026) आज यानी 25 सितंबर को मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रीहरि की पूजा करने से साधक को जीवन में सभी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="394" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/1-41.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/1-41.jpg 885w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/1-41-300x191.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/1-41-768x489.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी के पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है। वैदिक पंचांग के अनुसार, अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi 2026) आज यानी 25 सितंबर को मनाई जा रही है।</p>



<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रीहरि की पूजा करने से साधक को जीवन में सभी सुख मिलते हैं और प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। इस अवसर पर पूजा के बाद कलाई पर 14 गांठों वाला पवित्र अनंत सूत्र बांधा जाता है।</p>



<p>ये 14 गांठें भगवान विष्णु द्वारा निर्मित 14 लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि अनंत चतुर्दशी के दिन सूत या रेशम, किस धागे से अनंत सूत्र बनाना चाहिए? ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।</p>



<p><strong>किस धागे से बनाना चाहिए अनंत सूत्र?<br></strong>अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए हाथ में अनंत सूत्र बांधा जाता है। इस दिन शुभ फल की प्राप्ति के लिए सूती या रेशमी धागे से अनंत सूत्र बनाया जा सकता है। मान्यताओं के अनुसार, अनंत सूत्र बनाने के लिए ये दोनों ही धागे पवित्र माने जाते हैं।</p>



<p><strong>अनंत सूत्र के नियम<br></strong>अनंत सूत्र बनाने के लिए धागे को हल्दी या कुमकुम से रंगा हुआ होना चाहिए।<br>एक बात का विशेष ध्यान रखें कि अनंत सूत्र काले धागे से न बनाएं, क्योंकि काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। इसलिए अनंत सूत्र बांधते समय रंग का विशेष ध्यान रखें।<br>शास्त्रों के अनुसार, पुरुषों को अनंत सूत्र अपने सीधे हाथ की कलाई पर और महिलाओं को उल्टे हाथ की कलाई पर बांधना चाहिए।<br>अनंत सूत्र को हाथ में बांधने से पहले इसे जगत के पालनहार भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें। इस पर रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित कर इसकी पूजा करें। इसके बाद ही अनंत सूत्र को हाथ में बांधें।<br>अनंत सूत्र को 14 दिनों तक हाथ में बांधकर रखने का विधान है। 14 दिन पूरे होने के बाद इसे हाथ से उतारकर किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर दें या फिर इसे तुलसी या पीपल के पेड़ के पास रख दें।<br>जिस दिन अनंत सूत्र धारण करें, उस दिन व्रत रखना चाहिए या फिर पूर्ण रूप से सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।</p>
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		<title>अनंत चतुर्दशी पर पंचामृत में भगवान विष्णु को खोजने की परंपरा क्यों है?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 05:14:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[अनंत चतुर्दशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="551" height="499" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-25.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-25.jpg 551w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-25-300x272.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 551px) 100vw, 551px" />हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी तिथि का काफी महत्व माना जाता है। द्रिक पंचांग के हिसाब से हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को ‘अनंत चतुर्दशी’ (Anant Chaturdashi 2026) पर्व मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 25 सितंबर 2026, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। अनंत चतुर्दशी का व्रत जगत के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="551" height="499" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-25.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-25.jpg 551w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/2-25-300x272.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 551px) 100vw, 551px" />
<p>हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी तिथि का काफी महत्व माना जाता है। द्रिक पंचांग के हिसाब से हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को ‘अनंत चतुर्दशी’ (Anant Chaturdashi 2026) पर्व मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 25 सितंबर 2026, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा।</p>



<p>अनंत चतुर्दशी का व्रत जगत के पालनहार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। इस खास मौके पर भक्त विधि-विधान से पूजा करने के साथ ईश्वर से सुख, शांति, धन और समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं। इसके साथ ही रेशम, कुशा सूती के सूत्र में 14 गांठें लगाई जाने की परंपरा निभाई जाती है।</p>



<p>अनंत चतुर्दशी पर्व का संबंध भगवान गणेश से भी है, क्योंकि इस दिन 10 दिवसीय गणेशोत्सव का भी समापन होता है और श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा का विधिपूर्वक विसर्जन करते हैं।</p>



<p>अनंत चतुर्दशी के मौके पर सदियों से कई परंपराएं चली आ रही हैं, जिनमें पंचामृत में अनंत भगवान को ढूंढने की परंपरा भी शामिल है। आइए जानते हैं इस खास परंपरा के बारे में।</p>



<p><strong>अनंत चतुर्दशी पर भगवान को खोजने की परंपरा<br></strong>हिंदू पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, अनंत चतुर्दशी का व्रत समुद्र मंथन की धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी मानी जाती है। इस दिन पूजा के दौरान अनंत भगवान को खीरे में बांधकर दूध, दही, घी, शहद और चीनी से बने पंचामृत में रखकर खोजने की परंपरा निभाई जाती है।</p>



<p>इस दौरान श्रद्धालु अनंत भगवान को खोजते हैं। इस परंपरा को समुद्र मंथन की घटना से जोड़कर देखा जाता है। मान्यताओं के मुताबिक, समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और राक्षसों ने मिलकर समुद्र को मथा था, जिससे अमृत और विष समेत कई अमूल्य चीजें बाहर निकली थी।</p>



<p>अमृत का संबंध भगवान शिव से भी जोड़कर देखा जाता है, क्योंकि मंथन से निकले विष को शिव ने धारण किया था, जिस वजह से उन्हें ‘नीलकंठ’ के नाम से बुलाया जाने लगा। मान्यताओं के मुताबिक, अनंत चतुर्दशी के मौके पर भगवान विष्णु अनंत रूप में प्रकट हुए थे और भक्तों की रक्षा की थी। इसी परंपरा के कारण सदियों से इस दिन अनंत चतुर्दशी का व्रत और पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।</p>



<p><strong>अनंत चतुर्दशी 2026 डेट<br></strong>भाद्रपद माह की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 24 सितंबर 2026, रात 11 बजकर 18 मिनट से<br>भाद्रपद माह की चतुर्दशी तिथि का समापन 25 सितंबर 2026, रात 11 बजकर 6 मिनट तक</p>



<p>उदया तिथि के हिसाब से अनंत का चतुर्दशी का व्रत 25 सितंबर, शुक्रवार को रखा जाएगा।</p>



<p><strong>अनंत चतुर्दशी 2026 पूजा मुहूर्त (Anant Chaturdashi Puja Muhurat)<br></strong>अनंत चतुर्दशी पूजन मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 28 मिनट से रात्रि 11 बजकर 06 मिनट तक<br>ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 36 मिनट से 5 बजकर 24 मिनट तक<br>अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर को 12 बजकर 37 मिनट तक<br>विजय मुहूर्त- दोपहर 2 बजकर 14 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 2 मिनट तक<br>गोधूलि मुहूर्त- शाम 6 बजकर 15 मिनट से शाम 6 बजकर 39 मिनट तक<br>रवि योग- सुबह 6 बजकर 12 मिनट से सुबह 11 बजकर 22 मिनट तक</p>



<p><strong>गणेशोत्सव का समापन<br></strong>अनंत चतुर्दशी के दिन भक्त भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने के साथ व्रत भी रखते हैं। इस दौरान 14 गांठों वाला अनंत सूत्र भी पहना जाता है।</p>



<p>इन गांठों को भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप और जीवन में स्थिरता और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि, अनंत सूत्र पहनने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में आने वाले संकट भी दूर होते हैं। इसके साथ ही 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन भी गणेश विसर्जन भी किया जाता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>परिवर्तिनी एकादशी 2026: अगर पारण का शुभ मुहूर्त निकल गया तो कब करें?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Sep 2026 05:39:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[परिवर्तिनी एकादशी 2026]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="462" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/5-8.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/5-8.jpg 664w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/5-8-300x224.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली परिवर्तिनी एकादशी (Parivartini Ekadashi 2026) का हिंदू धर्म में बेहद खास महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चातुर्मास की अपनी निद्रा के दौरान करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस साल यह व्रत कल यानी 22 सितंबर 2026 को रखा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="462" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/5-8.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/5-8.jpg 664w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/5-8-300x224.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली परिवर्तिनी एकादशी (Parivartini Ekadashi 2026) का हिंदू धर्म में बेहद खास महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चातुर्मास की अपनी निद्रा के दौरान करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस साल यह व्रत कल यानी 22 सितंबर 2026 को रखा गया।</p>



<p>एकादशी का व्रत रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी अगले दिन यानी द्वादशी को सही विधि और मुहूर्त में व्रत खोलना (पारण करना) होता है। अगर पारण सही तरीके से न किया जाए, तो व्रत अधूरा माना जाता है। चलिए जानते हैं पारण के दौरान कौन सी गलती भारी नहीं पड़नी चाहिए।</p>



<p><strong>व्रत खोलने का शुभ समय<br></strong>इस बार व्रत का पारण 23 सितंबर यानी बुधवार के दिन किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, सुबह 5:38 बजे से लेकर 8:04 बजे तक का समय व्रत खोलने के लिए सबसे शुभ माना गया है। लेकिन, अगर आप व्रत इस दौरान नहीं खोल पाए तो 23 सितंबर की रात 10:50 बजे द्वादशी तिथि समाप्त हो जाएगी, उससे पहले अपना व्रत खोल लें। अलग-अलग शहरों के सूर्योदय के हिसाब से पारण के समय में थोड़ा-बहुत अंतर आ सकता है।</p>



<p><strong>हरि वासर में व्रत खोलने की मनाही क्यों?<br></strong>धार्मिक नियमों के अनुसार, ‘हरि वासर’ की अवधि में कभी भी व्रत नहीं खोलना चाहिए। द्वादशी तिथि के शुरुआती समय को हरि वासर कहा जाता है। पारण हमेशा इसके खत्म होने के बाद, द्वादशी तिथि में ही करना बेहतर माना जाता है।</p>



<p><strong>पारण की आसान विधि<br></strong>व्रत के अगले दिन यानी पारण वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।<br>घर के मंदिर की सफाई करके भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करें।<br>भगवान को जल, चंदन, पीले फूल और तुलसी दल जरूर चढ़ाएं।<br>धूप-दीप जलाकर मंत्रों का जप करें और सबसे पहले भगवान को भोग लगाएं।</p>



<p><strong>पारण के दिन क्या खाएं और क्या दान करें?<br></strong>पूजा पूरी होने के बाद, भगवान को चढ़ाए गए प्रसाद और जल को ग्रहण करके ही अपना व्रत खोलें। लेकिन, इस बात का ध्यान रखें कि इतने लंबे उपवास के बाद तुरंत भारी या तला-भुना खाना न खाएं। शुरुआत में दूध, फल या हल्का सात्विक भोजन ही लें ताकि आपका पाचन ठीक रहे।</p>



<p>व्रत खोलने के बाद किसी जरूरतमंद को अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, फल, कपड़े या पीले रंग की चीजों का दान जरूर करें। इससे भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।</p>
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		<title>सभी एकादशियों में क्यों सबसे खास है परिवर्तिनी एकादशी?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Sep 2026 05:23:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[परिवर्तिनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="509" height="454" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/4-9.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/4-9.jpg 509w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/4-9-300x268.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 509px) 100vw, 509px" />वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 22 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी ( Parivartini Ekadashi 2026) मनाई जा रही है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना और व्रत करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही सभी पाप &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="509" height="454" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/4-9.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/4-9.jpg 509w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/09/4-9-300x268.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 509px) 100vw, 509px" />
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 22 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी ( Parivartini Ekadashi 2026) मनाई जा रही है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना और व्रत करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही सभी पाप दूर होते हैं। इस दिन पूजा करने के बाद अन्न-धन का दान जरूर करना चाहिए।</p>



<p>ऐसा माना जाता है कि एकादशी के दिन दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और जीवन में कोई कमी नहीं होती है। परिवर्तिनी एकादशी सभी एकादशियों से बिल्कुल अलग और विशेष मानी जाती है। अब इस बात को जानकर आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर किस कारण से यह परिवर्तिनी एकादशी खास मानी जाती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको इसके पीछे की वजह बताते हैं।</p>



<p><strong>क्यों खास है परिवर्तिनी एकादशी?<br></strong>आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा में चले जाते हैं और भाद्रपद शुक्ल पक्ष की परिवर्तिनी एकादशी के दिन अपनी करवट बदलते हैं। इसलिए इस एकादशी को सभी एकादशियों से विशेष माना जाता है। योगनिद्रा की अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इस एकादशी के दिन प्रभु करवट बदलते हैं। इसी वजह से इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। देश के कई हिस्सों में इस एकादशी को जलझूलनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है।</p>



<p><strong>कब मनाई जाती है परिवर्तिनी एकादशी?<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर परिवर्तिनी एकादशी मनाई जाती है। यह तिथि भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और उन्हें प्रसन्न करने के लिए शुभ मानी जाती है।</p>



<p><strong>कब से कब तक रहेगा चातुर्मास?<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई 2026 (देवशयनी एकादशी) से हुई है। वहीं, इसका समापन 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के दिन होगा। चातुर्मास के दौरान शुभ और मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है, जैसे- विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन आदि।</p>



<p><strong>परिवर्तिनी एकादशी के दिन न करें ये काम<br></strong>एकादशी के दिन चावल खाना सख्त मना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चावल खाने से व्रत का पुण्य समाप्त हो जाता है। इसके अलावा तामसिक भोजन का सेवन न करें।</p>



<p>भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना अशुभ माना जाता है। पूजा के लिए हमेशा एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख लेने चाहिए।</p>
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