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	<title>कारोबार &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>कारोबार &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>सोना, पेट्रोल और विदेश यात्रा.. ये कैसे पहुंचाते हैं विदेशी मुद्रा भंडार को नुकसान</title>
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		<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:28:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[विदेशी मुद्रा भंडार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/jguyui.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/jguyui.jpg 798w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/jguyui-300x168.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/jguyui-768x429.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 10 मई को देशवासियों से 3 खास अपील की। इनमें एक साल तक सोने की खरीदी टालने (Gold Buying), गैर जरूरी विदेश यात्राएं (Foreign travel) ना करने और पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) की बचत के लिए वर्क फ्रॉम होम शुरू करने और कार पूलिंग व पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/jguyui.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/jguyui.jpg 798w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/jguyui-300x168.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/jguyui-768x429.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 10 मई को देशवासियों से 3 खास अपील की। इनमें एक साल तक सोने की खरीदी टालने (Gold Buying), गैर जरूरी विदेश यात्राएं (Foreign travel) ना करने और पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) की बचत के लिए वर्क फ्रॉम होम शुरू करने और कार पूलिंग व पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने की सलाह शामिल है। पीएम मोदी ने यह अपील, पश्चिम एशिया में जारी संकट और उसके चलते कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों व सप्लाई चेन के प्रभावित होने के मद्देनजर की है।</p>



<p>दरअसल, भारत अपनी जरुरत का 80 फीसदी कच्चा तेल (Crude Import) आयात करता है और जब भी तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो देश का आयात बिल बढ़ जाता है, क्योंकि क्रूड के इंपोर्ट के लिए भुगतान डॉलर में होता है। चूंकि, जियोपॉलिटिकल तनाव के चलते डॉलर मजबूत हो रहा है इसलिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Indias Forex Reserve) पर इसका बड़ा असर देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की तरह यही थ्योरी, गोल्ड पर भी लागू होती है क्योंकि भारत में बड़ी मात्रा में हर साल सोने का आयात किया जाता है।</p>



<p><strong>पीएम मोदी की अपील और उसके मायने<br></strong>क्या आप जानते हैं एक विदेश यात्रा पर (चाहे यूरोप की हो या अमेरिका व अन्य एशियाई देशों की) औसतन भारतीयों का कितना पैसा खर्च होता है, अगर भारतीय एक साल तक सोना की खरीदारी नहीं करें या भारतीय बाजारों में गोल्ड की डिमांड कम रहने से कीमतों पर क्या असर होगा? इसके अलावा, अगर पेट्रोल-डीजल की बचत के लिए, लोग वर्क फ्रॉम होम, कार पुलिंग या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें तो विदेशी मुद्रा भंडार को कितनी राहत मिल सकती है? आइये इन तीनों सवालों के जवाब आंकड़ों व एक्सपर्ट्स से समझने की कोशिश करते हैं।</p>



<p><strong>सोना कैसे डालता विदेशी मुद्रा भंडार पर असर?<br></strong>पेट्रोल की तरह सोने के लिए भी भारत, अन्य देशों पर निर्भर है और हर साल भारी मात्रा में गोल्ड इंपोर्ट करता है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का खरीदार है। पिछले वर्ष, भारत ने अकेले सोने पर लगभग 72 अरब डॉलर खर्च किए – यानी लगभग 6 अरब डॉलर प्रति माह। दरअसल, आयातित सोने की उपभोक्ता मांग सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था से डॉलर के आउटफ्लो को बढ़ाती है। इसलिए, बड़े पैमाने पर सोने का आयात भारत के चालू खाता घाटे पर दबाव डालता है और डॉलर की मांग बढ़ाता है। डॉलर के प्रचलन में आने से भारतीय रुपया कमजोर होता है, जिससे सोना और भी महंगा हो जाता है।</p>



<p>केडिया एडवाइजरी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की हालिया अपील, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आयात बिलों में वृद्धि के बीच भारत के बाह्य क्षेत्र की स्थिरता को लेकर बढ़ती चिंताओं से प्रेरित प्रतीत होती है। पिछले कुछ वर्षों में, भारतीय रुपया 2021 में लगभग 74-75 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर से गिरकर 2026 में 95 रुपये से नीचे आ गया है, जो इसके मूल्य में लगभग 27-28% की गिरावट को दर्शाता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, मध्य पूर्व में तनाव और आयात से डॉलर के बहिर्वाह में वृद्धि, विशेष रूप से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को लेकर नए सिरे से अनिश्चितता के बाद, इस दबाव को और बढ़ा दिया है।</p>



<p>कमोडिटी फर्म, केडिया एडवाइजरी के फाउंडर, अजय केडिया ने कहा, &#8220;भारत कच्चे तेल, खाद्य तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उर्वरकों के आयात पर काफी हद तक निर्भर है, जो आर्थिक विकास और घरेलू खपत के लिए बेहद जरूरी हैं। हालांकि, सोने का आयात मुख्य रूप से निवेश, आभूषण और फैशन की मांग से जुड़ा है इसलिए गोल्ड की खरीदी को टाला जा सकता है और क्योंकि यह रोजमर्रा की जरुरत का हिस्सा नहीं है।&#8221;</p>



<p>भारत हर साल बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है, 2021 में आयात 1,067 टन से अधिक रहा, जबकि सबसे कम आयात वाले वर्ष में भी आयात 430 टन से अधिक था। दीर्घकालिक वार्षिक औसत लगभग 800 टन के आसपास बना हुआ है, जिससे विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह और चालू खाता संतुलन पर काफी दबाव पड़ता है।</p>



<p>यह चिंता ऐसे समय में और भी मायने रखती जब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, 6 मार्च 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 728.49 अरब डॉलर तक पहुंचने के बाद, आयात लागत में वृद्धि और मुद्रा दबाव के कारण अस्थिरता दिखाते हुए 690.69 अरब डॉलर के करीब आ गया है। कमजोर रुपया सीधे तौर पर आयात की घरेलू लागत को बढ़ाता है, विशेष रूप से कच्चे तेल और सोने की, जिससे बाहरी जोखिम बढ़ जाते हैं।</p>



<p><strong>नहीं खरीदा एक साल तक गोल्ड, तो क्या होगा?<br></strong>FY26 में भारत का कुल आयात बिल: $775 बिलियन<br>इनमें 4 कमोडिटी की कुल लागत : $240+ बिलियन<br>क्रूड ऑयल: $134.7 बिलियन<br>गोल्ड: $72 बिलियन<br>खाने का तेल: $19.5 बिलियन<br>फर्टिलाइजर्स: $14.5 बिलियन</p>



<p>ये चार वस्तुएं भारत के कुल आयात का 31.1 प्रतिशत हिस्सा हैं लेकिन इनमें अकेले सोने का आयात कुल इंपोर्ट का करीब 10 प्रतिशत है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से इन वस्तुओं का उपयोग कम करने का आग्रह किया है।</p>



<p>यदि भारतीय एक वर्ष के लिए सोने की खरीद में कमी लाते हैं तो गोल्ड इंपोर्ट में 30-40% की गिरावट से भी 20-25 अरब डॉलर की बचत हो सकती है। 50% की गिरावट से 36 अरब डॉलर की बचत हो सकती है। खास बात है कि यह अनुमानित चालू खाता संख्या का लगभग आधा है। एक वर्ष तक सोना न खरीदने से भारत से डॉलर का आउटफ्लो सीधे तौर पर अरबों डॉलर तक कम हो सकता है।</p>



<p><strong>पेट्रोल पर कैसे बचेगा सरकार का पैसा?<br></strong>भारत, वर्तमान में अपनी जरुरत का 89% तेल आयात करता है। सोने की कीमतों के साथ तेल की कीमतों में वृद्धि (पिछले एक वर्ष में लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 113 डॉलर तक) सीधे तौर पर डॉलर के आउटफ्लो को बढ़ाती है। चूंकि, FY26 में भारत ने क्रूड ऑयल के आयात पर $134.7 बिलियन खर्च किए थे और अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो यह आंकड़ा तेजी से बढ़ेगा और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर बुरा असर डालेगा।</p>



<p>इंडिपेंडेंट कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने कहा, अगर देश में पेट्रोल-डीजल की डिमांड कम हुई तो खपत कम होगी और सरकार पर ज्यादा क्रूड इंपोर्ट करने का दबाव नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार लगातार पेट्रोलियम प्रोडक्ट पर निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को प्रमोट कर रही है, और आने वाले दिनों में लोग तेजी से ई-व्हीकल की ओर शिफ्ट हो सकते हैं, सरकारी खजाने और पर्यावरण की सुरक्षा, दोनों के लिहाज से अच्छा होगा।</p>



<p><strong>अब विदेशी मुद्रा भंडार का गणित समझें<br></strong>ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 690.69 अरब डॉलर है। आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी में भंडार बढ़कर लगभग 728 अरब डॉलर हो गया था, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने के कारण अप्रैल में यह घटकर लगभग 691 अरब डॉलर रह गया।<br>वहीं दूसरी ओर, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अनुमान लगाया है कि भारत का चालू खाता घाटा (CA) 2026 में बढ़कर 84.5 अरब डॉलर हो सकता है, जो जीडीपी का लगभग 2 प्रतिशत है। चालू खाते में वृद्धि का सीधा सा मतलब है- आने वाले डॉलरों की तुलना में जाने वाले डॉलरों की संख्या अधिक होगी।</p>



<p><strong>विदेश यात्राओं पर होने वाला औसत खर्च<br></strong>टूर एंड ट्रैवल एजेंसी SOTC की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय टूरिस्ट के लिए 2026 में एक सप्ताह की फॉरेन ट्रिप का औसत खर्च आम तौर पर ₹50,000 से ₹1.5 लाख प्रति व्यक्ति के बीच रहता है।</p>



<p>हालांकि, यह खर्च दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए ₹2 लाख से अधिक हो सकता है, जबकि यूरोप या अमेरिका के लिए यह कॉस्ट ₹2 लाख से अधिक हो सकती है। चूंकि, डॉलर की कीमत बढ़ रहती है और रुपया कमजोर हो रहा है, ऐसे में विदेश यात्रा और विदेश में पढ़ाई करना, दोनों महंगा हो जाता है इसलिए इन पैकेज और विदेश में अन्य खर्च बढ़ सकते हैं।</p>



<p>वहीं, true yatri की रिपोर्ट के अनुसार, भारत से बजट वाली यूरोप ट्रिप (7 दिन का खर्च) ₹80,000 – ₹1,30,000 प्रति व्यक्ति आता है।<br>10 दिन के लिए यह खर्च ₹1,50,000 – ₹2,50,000 प्रति व्यक्ति होगा।<br>जबकि, लक्जरी ट्रिप (10-15 दिन) के लिए यह बजट ₹3,00,000 – ₹6,00,000+ प्रति व्यक्ति तक जा सकता है।</p>



<p><strong>फ्लाइट फेयर<br></strong>दिल्ली/मुंबई &#8211; लंदन, पेरिस या फ्रैंकफर्ट: ₹25,000 – ₹65,000<br>दिल्ली/मुंबई &#8211; एम्स्टर्डम या रोम: ₹40,000 – ₹70,000<br>चेन्नई/बेंगलुरु &#8211; यूरोप: ₹45,000 – ₹75,000</p>



<p>फ्लाइट फेयर, वीजा फीस और होटल फेयर व अन्य खर्चों को मिलाकर ट्रैवल एजेंसी फॉरेन ट्रिप प्लान तैयार करती हैं, जिनकी कीमत 50 हजार से 3 लाख रुपये प्रति व्यक्ति तक जा सकती है। इसमें यूरोप, अमेरिका व अन्य एशियाई देशों की यात्रा शामिल है।</p>
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		<title>साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट समेत रोजमर्रा के सामान होंगे महंगे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 12:16:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
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<p>&nbsp;आम लोगों के लिए एक टेंशन देने वाली खबर है। जनता को महंगाई का झटका लग सकता है। दरअसल साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट, पैकेट बंद खाने की चीजों और पेय प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं। देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियां, जो कि रोजमर्रा के यूज वाले सामान बनाती हैं, बढ़ती लागत से मुनाफे पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा सकती हैं। ये बढ़ोतरी धीरे-धीरे होने की संभावना है। बता दें कि एफएमसीजी कंपनियों के अधिकारियों ने हालिया तिमाही नतीजों के बाद इशारा दिया कि पहले ही तीन से पांच प्रतिशत तक कीमतें बढ़ चुकी हैं और लागत का दबाव जारी रहा तो ये ट्रेंड आगे भी जारी रह सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>इन वजहों से बढ़ेंगे रेट</strong></h3>



<p>एफएमसीजी कंपनियों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई, जिसके नतीजे में कच्चे माल, लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग लागत बढ़ी। वहीं साथ ही रुपये में कमजोरी ने भी दबाव बढ़ाया है।<br>अब इन फैकटर्स का असर फूड प्रोडक्ट्स, पर्सनल केयर, पेय उत्पादों और घरेलू उपयोग के सामान समेत कई क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>घट रहा पैकेट का साइज</strong></h3>



<p>कंपनियां मुनाफा बनाए रखने के लिए कीमतें बढ़ाने के साथ पैकेट बंद उत्पादों में मात्रा कम करने की रणनीति भी अपना रही हैं। हालांकि पांच, 10 और 15 रुपये वाले छोटे पैक बाजार में बनाए रखने की कोशिश की जा रही है ताकि बिक्री पर असर कम पड़े।<br>कंपनियां कॉस्ट कम करने के लिए छूट और प्रमोशन खर्चों में कटौती, स्टोरेज मैनेजमेंट को मजबूत करने और सप्लाई चेन को अधिक कुशल बनाने जैसे कदम उठा रही हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर बढ़ती लागत का कुछ बोझ पड़ सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>डाबर-ब्रिटानिया के सामने चुनौती</strong></h3>



<p>डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा के मुताबिक कंपनी इस वित्त वर्ष में करीब 10 प्रतिशत महंगाई का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए कंपनी विभिन्न कारोबार सेगमेंट्स में औसतन चार प्रतिशत तक कीमतें बढ़ा चुकी है और कॉस्ट कंट्रोल के उपाय भी कर रही है।<br>वहीं ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज भी इशारा दे चुकी है कि ईंधन और पैकेजिंग लागत में करीब 20 प्रतिशत वृद्धि के कारण जल्द ही कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं। कंपनी के एमडी-सीईओ रक्षित हरगेव के अनुसार कंपनी सीधे दाम बढ़ाने और पैक के वजन में कमी, दोनों विकल्पों पर विचार कर रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>ऑपरेशनल कॉस्ट हो रही प्रभावित</strong></h3>



<p>ब्रिटानिया के पास गुड डे, मेरी गोल्ड, मिल्क बिकीज और टाइगर जैसे ब्रांड हैं। हरगेव ने कहा कि बड़े पैक वाले उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की जाएगी। साथ ही एलपीजी, पीएनजी और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले लैमिनेट की बढ़ती कीमतें ऑपरेशनल कॉस्ट को प्रभावित कर रही हैं।<br>हिंदुस्तान यूनिलीवर ने भी संकेत दिए हैं कि यदि जिंसों की कीमतों में दबाव बना रहा तो कंपनी आगे और कीमतें बढ़ा सकती है। एचयूएल के प्रमुख ब्रांड में सर्फ एक्सल, ब्रुक बॉन्ड, लाइफबॉय, डव, क्लिनिक प्लस, सनसिल्क, लैक्मे जैसे ब्रांड हैं।<br>एचयूएल के सीएफओ निरंजन गुप्ता के मुताबिक, ‘‘अभी तक हमारे ऊपर महंगाई का आठ से 10 प्रतिशत का बोझ पड़ा है। हमने पोर्टफोलियो दर पोर्टफोलियो आधार पर कीमतों में दो से पांच प्रतिशत तक की वृद्धि की है।’’</p>
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			</item>
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		<title>बैंकों और क्रिप्टोकरेंसी कंपनियों में पैसों को लेकर छिड़ी आर-पार की लड़ाई!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 12:02:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[क्रिप्टोकरेंसी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="284" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/78yukh.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/78yukh.jpg 793w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/78yukh-300x138.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/78yukh-768x353.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />अमेरिका में क्रिप्टोकरेंसी के नियमन (Cryptocurrency Regulation) को लेकर एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। लंबे समय से लटके क्लैरिटी एक्ट (CLARITY Act) को अगले हफ्ते सीनेटरों के सामने विचार के लिए पेश किया जाएगा। यदि यह कानून बन जाता है, तो यह तेजी से बढ़ते डिजिटल एसेट सेक्टर के लिए स्पष्ट नियामक नियम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="284" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/78yukh.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/78yukh.jpg 793w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/78yukh-300x138.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/78yukh-768x353.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>अमेरिका में क्रिप्टोकरेंसी के नियमन (Cryptocurrency Regulation) को लेकर एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। लंबे समय से लटके क्लैरिटी एक्ट (CLARITY Act) को अगले हफ्ते सीनेटरों के सामने विचार के लिए पेश किया जाएगा। यदि यह कानून बन जाता है, तो यह तेजी से बढ़ते डिजिटल एसेट सेक्टर के लिए स्पष्ट नियामक नियम लाएगा और क्रिप्टोकरेंसी कंपनियों तथा बैंकिंग उद्योग के बीच चल रहे लंबे गतिरोध को खत्म कर सकता है। सीनेट बैंकिंग कमेटी के चेयरमैन टिम स्कॉट ने बताया कि इस महत्वपूर्ण बिल पर 14 मई को वाशिंगटन डी.सी. के डर्कसेन सीनेट कार्यालय भवन में एक अहम बैठक होगी।</p>



<p><strong>क्रिप्टो इंडस्ट्री के लिए क्या तय करेगा CLARITY Act?<br></strong>यह बिल डिजिटल संपत्तियों के लिए स्पष्ट नियामक दिशानिर्देश स्थापित करने का लक्ष्य रखता है। इसके तहत मुख्य रूप से स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाएगा कि कौन सी क्रिप्टो संपत्तियां &#8216;प्रतिभूति&#8217; (Securities) की श्रेणी में आती हैं और कौन सी &#8216;वस्तु&#8217; की श्रेणी में हैं।</p>



<p>इसके अलावा इन डिजिटल एसेट्स की निगरानी और नियमन कौन सी सरकारी एजेंसी करेगी, क्रिप्टो एक्सचेंज, ब्रोकर और डीलर के काम करने के नियम क्या होंगे और ग्राहकों की सुरक्षा (Consumer Protection) के लिए किन कड़े मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा शामिल हैं।</p>



<p>क्रिप्टो उद्योग लंबे समय से इस कानून की मांग कर रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि अमेरिका में डिजिटल एसेट्स के भविष्य और क्रिप्टो कंपनियों की बुनियादी समस्याओं को सुलझाने के लिए यह बेहद जरूरी है।</p>



<p><strong>स्टेबलकॉइन्स के इस्तेमाल पर क्या कहता है नया कानून?<br></strong>यह बिल क्रिप्टो फर्मों और पारंपरिक बैंकों के बीच &#8216;स्टेबलकॉइन्स&#8217; (अमेरिकी डॉलर से जुड़े डिजिटल टोकन) को लेकर चल रहे बढ़ते टकराव को भी सुलझाने का प्रयास करता है। रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस और डेमोक्रेटिक सीनेटर एंजेला आल्सोब्रूक्स के बीच हुए एक समझौते के तहत, अब क्रिप्टो कंपनियों को ग्राहकों को केवल उनके अकाउंट में स्टेबलकॉइन &#8216;होल्ड&#8217; करने (यानी सिर्फ रखने) पर ब्याज या रिवॉर्ड देने की अनुमति नहीं होगी। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि यह सुविधा पारंपरिक बैंक जमा (Bank Deposits) के बहुत करीब आ जाती है। हालांकि, स्टेबलकॉइन्स से जुड़ी अन्य गतिविधियों, जैसे- पेमेंट भेजने या ट्रांसफर करने पर रिवॉर्ड देने की पूरी छूट होगी।</p>



<p><strong>आपके डिजिटल वॉलेट पर इसका क्या होगा असर?<br></strong>आम क्रिप्टो वॉलेट यूज़र्स के लिए &#8216;CLARITY Act&#8217; का सीधा मतलब यह है कि अब आपको केवल अपने वॉलेट में स्टेबलकॉइन्स को पड़े रहने देने पर कोई पैसिव ब्याज नहीं मिलेगा। हालांकि, पेमेंट करने, पैसे ट्रांसफर करने और ब्लॉकचेन से जुड़ी अन्य गतिविधियों पर मिलने वाले कैशबैक या रिवॉर्ड पहले की तरह ही जारी रहेंगे।</p>



<p><strong>रिवॉर्ड पॉलिसी पर क्रिप्टो फर्म और बैंक क्यों हैं आमने-सामने?<br></strong>बैंकिंग समूह स्टेबलकॉइन पर रिवॉर्ड देने की नीति का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यह नीति क्रिप्टो कंपनियों को बहुत अधिक आजादी देती है, जिससे लोग अपना पैसा पारंपरिक सुरक्षित बैंकों से निकालकर स्टेबलकॉइन्स में जमा करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। दूसरी ओर, क्रिप्टो कंपनियों का कहना है कि थर्ड-पार्टी (जैसे क्रिप्टो एक्सचेंज) को स्टेबलकॉइन्स पर ब्याज देने से रोकना पूरी तरह से प्रतिस्पर्धा के खिलाफ है। कॉइनबेस (Coinbase) के मुख्य कानूनी अधिकारी पॉल ग्रेवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#8216;X&#8217; पर बैंकिंग लॉबी की आलोचना करते हुए लिखा कि यह बदलाव केवल प्रतिस्पर्धा को &#8220;खत्म करने&#8221; के लिए डिजाइन किया गया है।</p>



<p><strong>इस विवाद पर सीनेटरों का क्या रुख है?<br></strong>सीनेटर एंजेला आल्सोब्रूक्स और थॉम टिलिस ने एक संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वे इस बिल पर बैंकिंग लॉबी के रुख से सहमत नहीं हैं। दोनों सीनेटरों ने कहा, &#8220;हमारा समझौता क्रिप्टो कंपनियों को ग्राहकों को अन्य प्रकार के रिवॉर्ड देने की अनुमति देता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह &#8216;CLARITY Act&#8217; को द्विदलीय समर्थन के साथ पास करने का रास्ता साफ करता है, जो इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है। बैंकिंग उद्योग के कुछ लोग भले ही ऐसा न चाहते हों, लेकिन हम सम्मानपूर्वक उनसे असहमत हैं।&#8221;</p>



<p>अमेरिकी क्लैरिटी एक्ट का सीधा असर भारत के कानूनों पर नहीं पड़ेगा, लेकिन अमेरिका के ग्लोबल क्रिप्टो मार्केट पर दबदबे के कारण भारतीय निवेशकों पर इसका बड़ा अप्रत्यक्ष असर पड़ना तय है। भारतीय निवेशक अक्सर मार्केट की गिरावट से बचने के लिए अपने फंड को USDT या USDC जैसे स्टेबलकॉइन्स में रखते हैं और उन्हें विदेशी एक्सचेंजों (जैसे Binance, KuCoin) पर &#8216;स्टेक&#8217; करके पैसिव इनकम या ब्याज (Yield) कमाते हैं।</p>



<p><strong>इस कानून से भारतीय निवेशकों पर क्या असर?<br></strong>अगर अमेरिकी कानून के तहत स्टेबलकॉइन जारी करने वालों और एक्सचेंजों को सिर्फ होल्डिंग पर ब्याज देने से रोक दिया जाता है, तो ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स को अपनी पॉलिसी बदलनी पड़ेगी। इसका सीधा असर यह होगा कि भारतीय निवेशकों को भी स्टेबलकॉइन पर मिलने वाला 5% से 10% तक का सालाना ब्याज मिलना बंद या बहुत कम हो सकता है।</p>



<p><strong>स्टेबलकॉइन क्या है?<br></strong>स्टेबलकॉइन (Stablecoin) एक खास तरह की क्रिप्टोकरेंसी है, जिसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि उसकी कीमत हमेशा स्थिर (Stable) रहे। आम क्रिप्टोकरेंसी जैसे बिटकॉइन (Bitcoin) या इथेरियम (Ethereum) की कीमतों में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव (Volatility) होता है। एक ही दिन में इनकी कीमत 10-20% तक ऊपर या नीचे जा सकती है। इसी अस्थिरता से बचने के लिए स्टेबलकॉइन बनाए गए हैं।</p>



<p>अगर आप 100 डॉलर का स्टेबलकॉइन खरीदते हैं, तो उसकी कीमत हमेशा 100 डॉलर के आसपास ही रहेगी चाहे पूरा क्रिप्टो मार्केट गिर जाए या उठ जाए। Tether (USDT) दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय स्टेबलकॉइन है। वहीं USD Coin (USDC) को काफी सुरक्षित और पारदर्शी माना जाता है। यह किसी बैंक में रखे डॉलर के बजाय अन्य क्रिप्टो एसेट्स द्वारा बैक किया गया एक डीसेंट्रलाइज्ड स्टेबलकॉइन है।</p>
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		<title>चीन सहित 10 बड़ी कंपनियों को अमेरिका ने किया बैन</title>
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		<pubDate>Sat, 09 May 2026 09:28:24 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[अमेरिका]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="379" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/678yugh.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/678yugh.jpg 658w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/678yugh-300x184.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />ईरान को हथियार सप्लाई करने वाली इंटरनेशनल कंपनियों के खिलाफ अमेरिका के ट्रेजरी डिमार्टमेंट (US Treasury Department) ने सख्ती दिखाते हुए 10 लोगों और कंपनियों को बैन कर दिया है। इनमें चीन और हांगकांग में मौजूद कंपनियां भी शामिल हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने ईरान की सेना को हथियार और कच्चा माल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="379" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/678yugh.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/678yugh.jpg 658w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/678yugh-300x184.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>ईरान को हथियार सप्लाई करने वाली इंटरनेशनल कंपनियों के खिलाफ अमेरिका के ट्रेजरी डिमार्टमेंट (US Treasury Department) ने सख्ती दिखाते हुए 10 लोगों और कंपनियों को बैन कर दिया है। इनमें चीन और हांगकांग में मौजूद कंपनियां भी शामिल हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने ईरान की सेना को हथियार और कच्चा माल खरीदने में मदद की, जिनका इस्तेमाल ईरान के ‘शाहिद ड्रोन प्रोग्राम’ में होता है।</p>



<p>अपने बयान में, ट्रेजरी ने कहा कि वह ईरान के सैन्य-औद्योगिक नेटवर्क के खिलाफ आगे आर्थिक कार्रवाई करने के लिए तैयार है ताकि तेहरान के बढ़ते प्रभाव को रोका जा सके। साथ ही ये चेतावनी दी कि ईरान के अवैध व्यापार को बढ़ावा देने में शामिल विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को और अधिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है, बता दें कि इसमें चीन की स्वतंत्र &#8220;टीपॉट&#8221; तेल रिफाइनरियों से जुड़े संस्थान भी शामिल हैं।</p>



<p><strong>इन बड़ी कंपनियों पर लगा बैन<br></strong>US Treasury Department के सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि उन विदेशी कंपनियों को निशाना बनाना जारी रहेगा जो ईरान की सेना को हथियार सप्लाई करती हैं। जिन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें दुबई की Elite Energy FZCO, ईरान की Pishgam Electronic Safeh Co, हांगकांग की HK Hesin Industry Co Ltd और Mustad Ltd, बेलारूस की Armory Alliance LLC के साथ चीन की Hitex Insulation Ningbo Co Ltd और Yushita Shanghai International Trade Co Ltd जैसी कंपनियां शामिल हैं।</p>



<p>यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड (Donald Trump) ट्रंप के चीन दौरे से कुछ ही दिन पहले उठाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरे पर डोनाल्ड ट्रंप, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत करने वाले हैं।</p>



<p><strong>हर महीने 10 हजार ड्रोन बनाता है ईरान<br></strong>UK द्वारा फंडिंग &#8216;सेंटर फॉर इंफॉर्मेशन रेजिलिएंस&#8217; का हवाला देते हुए न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने जानकारी दी थी कि ईरान एक प्रमुख ड्रोन निर्माता देश है, उन्होंने अनुमान लगाया था कि वह हर महीने 10,000 तक ड्रोन बनाता है। इन तमाम गतिविधियों के बाद US Treasury Department ने 10 लोगों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही ये भी कहा कि वाशिंगटन अमेरिका को सुरक्षित रखने और अमेरिकी सेनाओं के खिलाफ निर्देशित हथियारों के प्रवाह को रोकने के लिए कार्रवाई करेगा।</p>
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		<title> एक साल में पैसा किया 7 गुना, अब देने जा रही 1 पर 2 बोनस शेयर; Titan वाला काम करती है ये कंपनी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 May 2026 09:01:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[Titan]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="306" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/kgoiyti.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/kgoiyti.jpg 794w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/kgoiyti-300x148.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/kgoiyti-768x380.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />शेयर बाजार में कई ऐसी छोटी कंपनियां हैं, जिन्होंने बेहद कम समय में निवेशकों को छप्परफाड़ रिटर्न देने का दम दिखाया है। ऐसी ही कंपनी डिवाइन हीरा ज्वैलर्स के शेयर (Divine Hira Jewellers Share) साबित हुए हैं। इस कंपनी ने महज एक साल के भीतर निवेशकों को 7 गुना से ज्यादा का रिटर्न दिया है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="306" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/kgoiyti.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/kgoiyti.jpg 794w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/kgoiyti-300x148.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/kgoiyti-768x380.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>शेयर बाजार में कई ऐसी छोटी कंपनियां हैं, जिन्होंने बेहद कम समय में निवेशकों को छप्परफाड़ रिटर्न देने का दम दिखाया है। ऐसी ही कंपनी डिवाइन हीरा ज्वैलर्स के शेयर (Divine Hira Jewellers Share) साबित हुए हैं। इस कंपनी ने महज एक साल के भीतर निवेशकों को 7 गुना से ज्यादा का रिटर्न दिया है। अब यह कंपनी अपने शेयरधारकों को 1 पर 2 (2:1) के अनुपात में बोनस शेयर (Bonus Share) का बड़ा तोहफा देने जा रही है। इसका सीधा मतलब है कि आपके पास पहले से मौजूद हर 1 शेयर के बदले 2 नए शेयर बिल्कुल मुफ्त बोनस के तौर पर मिलेंगे। अगर आपके पास इस कंपनी के 100 शेयर हैं, तो आपको 200 नए बोनस शेयर मिलेंगे। इस तरह आपके कुल शेयरों की संख्या बढ़कर 300 हो जाएगी। कंपनी ने इसके साथ ही अपने Q4 रिजल्ट भी जारी किए हैं, जिसमें कंपनी को 31% का प्रॉफिट हुआ है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या करती है &#8216;डिवाइन हीरा ज्वैलर्स&#8217; कंपनी?</h2>



<p>जुलाई 2022 में शुरू हुई डिवाइन हीरा ज्वैलर्स लिमिटेड मुख्य रूप से प्रीमियम 22 कैरेट सोने के आभूषणों की डिजाइनिंग और मार्केटिंग का काम करती है। कंपनी का मुख्य कारोबार मुंबई के प्रसिद्ध &#8216;झवेरी बाजार&#8217; से होता है। इसका बिजनेस मॉडल काफी हद तक शेयर बाजार की दिग्गज कंपनी &#8216;टाइटन&#8217; (Titan Share Price) जैसा ही है।</p>



<p>कंपनी के पोर्टफोलियो में मशीन-निर्मित और हाथ से बने हार, मंगलसूत्र, चेन, माला, अंगूठियां, पेंडेंट, कंगन और शादियों के आभूषण शामिल हैं। सोने के साथ-साथ यह ब्रांड एंटीक ज्वैलरी, चांदी के गहने, चांदी के बर्तन और 999 शुद्धता वाले सोने-चांदी के सिक्कों का होलसेल और रिटेल कारोबार भी करता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">इस बोनस शेयर देने वाले स्टॉक ने 6 महीने में डबल किया पैसा</h2>



<p>डिवाइन हीरा ज्वैलर्स के शेयरों ने शेयर बाजार में तूफानी तेजी दिखाई है। 431 करोड़ रुपये के मार्केट कैप (Market Cap) वाली इस कंपनी का शेयर वर्तमान में ₹330 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। इस शेयर ने 1 महीना में 13.83% की तेजी दिखाई है। 3 महीने में निवेशकों को 41.63% का मुनाफा हुआ है। 6 महीने में शेयर ने 163.89% की शानदार छलांग लगाई है। वहीं 1 साल में इस स्टॉक ने 663.01% (यानी करीब 7 गुना) का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">टाइटन और कल्याण ज्वैलर्स जैसे दिग्गजों के सामने कहां ठहरती है कंपनी?</h2>



<p>अगर पीयर कंपनियों (Peer Comparison) से तुलना करें, तो डिवाइन हीरा ज्वैलर्स अभी मार्केट कैप के लिहाज से बहुत छोटी कंपनी है। Titan Company का शेयर करीब ₹4509 पर ट्रेड कर रहा है और इसका मार्केट कैप 4,00,302 करोड़ रुपये है। इसका P/E रेशियो 77.76 है। Kalyan Jewellers का शेयर ₹424.55 पर ट्रेड कर रहा है। इसका मार्केट कैप 43,844 करोड़ रुपये और P/E 31.81 है। साथ ही Thangamayil Jewellers का शेयर ₹4246.70 पर है और मार्केट कैप 13,199 करोड़ रुपये है।</p>



<p>दिग्गजों के सामने डिवाइन हीरा ज्वैलर्स 431 करोड़ के मार्केट कैप के साथ एक &#8216;माइक्रो-कैप&#8217; कंपनी है, लेकिन इसके रिटर्न दिग्गजों से कहीं ज्यादा रहे हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">निवेशकों को किन रिस्क फैक्टर्स का रखना होगा ध्यान?</h2>



<p>भले ही शेयर ने 7 गुना रिटर्न दिया हो, लेकिन इसमें निवेश से पहले कुछ फंडामेंटल बातों को समझना जरूरी है। यह शेयर वर्तमान में अपनी बुक वैल्यू से 8.52 गुना अधिक पर ट्रेड कर रहा है, जो वैल्यूएशन के नजरिए से महंगा है। कंपनी लगातार मुनाफा कमा रही है, लेकिन इसके बावजूद यह अपने निवेशकों को कोई डिविडेंड नहीं दे रही है।</p>
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