बड़ीखबर – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Sat, 10 Oct 2026 11:20:50 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.10 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg बड़ीखबर – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32 तमिलनाडु में मिला 3200 साल पुराना कटोरा https://livehalchal.com/%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a5%81-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-3200-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0/684279 Sat, 10 Oct 2026 11:20:50 +0000 https://livehalchal.com/?p=684279 तमिलनाडु में सेलम के पास मेट्टूर बांध के जलमग्न क्षेत्र तेलुंगनूर में खुदाई के दौरान काले और लाल रंग की एक साबुत प्राचीन कटोरा मिला है। इसके साथ ही लोहे के हथियार, तांबे की वस्तुएं और एक संभावित स्टील की तलवार भी निकला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज 3200 साल से भी …]]>

तमिलनाडु में सेलम के पास मेट्टूर बांध के जलमग्न क्षेत्र तेलुंगनूर में खुदाई के दौरान काले और लाल रंग की एक साबुत प्राचीन कटोरा मिला है। इसके साथ ही लोहे के हथियार, तांबे की वस्तुएं और एक संभावित स्टील की तलवार भी निकला है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज 3200 साल से भी अधिक पुरानी लेखन प्रणाली या लिपि से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग दे सकती है। तमिलनाडु पुरातत्व विभाग द्वारा खोजी गई इस कटोरी पर बाएं से दाएं पांच ग्राफिती अंकित हैं। राज्य में अब तक मिली कलाकृतियों पर दर्ज निशानों में यह सबसे लंबी श्रृंखला है।

पुरातत्वविदों का मानना है कि यह लिपि का कोई शुरुआती रूप हो सकता है, क्योंकि एक अन्य कटोरी पर भी यही पांचों चिह्न अलग क्रम में मिले हैं। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यह छठी शताब्दी ईसा पूर्व की तमिल-ब्राह्मी लिपि का शुरुआती रूप हो सकता है।

सिंधु घाटी सभ्यता से गहरा संबंध
सेलम के पास स्थित तेलुंगनूर और मांगाडू लौह युग के दो जुड़वां स्थल हैं, जिनका समय 1600 ईसा पूर्व से 1200 ईसा पूर्व के बीच का माना गया है। यह कालखंड सिंधु घाटी सभ्यता का अंतिम दौर था।

तमिलनाडु पुरातत्व विभाग के सलाहकार के. राजन ने बताया कि 1960 के दशक में भारतीय पुरातत्व विभाग को चेंगलपट्टू के पास सानूर में अलग-अलग क्रम में तीन ग्राफिती चिह्न मिले थे। अब दो अलग-अलग क्रमों में पांच-पांच चिह्न मिले हैं, जिनका अर्थ समझना अभी बाकी है।

तमिलनाडु में अब तक कई स्थलों से करीब 16000 ग्राफिती वाले मिट्टी के बर्तन के टुकड़े मिल चुके हैं। एक हालिया अध्ययन के अनुसार, कोडुमनाल, कीलाडी, थुलुक्कड़पट्टी और किलनामंडी जैसे तमिलनाडु के स्थलों और सिंधु घाटी सभ्यता के स्थलों पर मिले चिह्नों में 90 प्रतिशत तक समानता है।

सिंधु घाटी सभ्यता का अस्तित्व 3300 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है। इसके अलावा, तमिल-ब्राह्मी शिलालेखों और बर्तनों पर अक्षरों के अंत में बने चिह्न भी प्राचीन संचार व्यवस्था की ओर इशारा करते हैं।

कई दुर्लभ और प्राचीन हथियार भी मिली
इस स्थान से केवल मिट्टी के बर्तन ही नहीं, बल्कि कई दुर्लभ और प्राचीन हथियार भी मिली हैं। उत्खनन निदेशक एस. परनथामन के अनुसार, यहां से 1.9 मीटर लंबा लोहे का भाला मिला है।

इसके अलावा तीर के अग्रभाग, कुल्हाड़ियां, तलवारें, कटार, चाकू और लोहे की कीलें भी मिली हैं। विशेषज्ञों को यहां एक बेहद प्राचीन स्टील की तलवार मिलने का भी संदेह है।

यह स्थल पहले भी काफी चर्चा में रहा है, जब यहां से मिली एक स्टील की तलवार की कार्बन डेटिंग 1200 ईसा पूर्व तय की गई थी। इसे दुनिया की सबसे पुरानी स्टील की तलवारों में से एक माना जाता है।

लौह युग के कंकाल और चार प्रकार की दफनाने की प्रथाएं

उत्खनन के दौरान पुरातत्वविदों को यहां लौह युग के दो इंसानों के पूरे कंकाल भी मिले हैं। इसके अलावा, इस एक ही स्थल पर दफनाने की चार अलग-अलग पद्धतियां गड्ढा/पिट, पाषाण पेटिका/सिट, अस्थि कलश/अर्न और शव-मंजूषा/सरकोफैगस देखने को मिली हैं।

निदेशक परनथामन का कहना है कि एक ही जगह पर चार प्रकार की दफन प्रणालियों का मिलना यह दर्शाता है कि यहां एक विविधतापूर्ण समाज निवास करता था। यह इस बात का भी प्रमाण है कि यह स्थान शुरुआती लौह युग से विकसित होकर उत्तर लौह युग तक निरंतर समृद्ध रहा।

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308 चक्के वाला ट्रक, 200 टन की मशीन और 2 करोड़ का डीजल… https://livehalchal.com/308-%e0%a4%9a%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95-200-%e0%a4%9f%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%b6%e0%a5%80/683581 Tue, 29 Sep 2026 11:34:08 +0000 https://livehalchal.com/?p=683581 जिस देश में सड़क किनारे जेसीबी (JCB) की साधारण सी खुदाई देखने के लिए भी सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो जाती है, जरा सोचिए।।। अगर वहां की सड़कों पर अचानक 308 पहियों वाला एक ‘दैत्यरूपी’ मेगा ट्रक और उस पर लदी 200 टन की भारी-भरकम मशीन सामने आ जाए, तो नजारा कैसा होगा? जी …]]>

जिस देश में सड़क किनारे जेसीबी (JCB) की साधारण सी खुदाई देखने के लिए भी सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो जाती है, जरा सोचिए।।। अगर वहां की सड़कों पर अचानक 308 पहियों वाला एक ‘दैत्यरूपी’ मेगा ट्रक और उस पर लदी 200 टन की भारी-भरकम मशीन सामने आ जाए, तो नजारा कैसा होगा?

जी हां, इस वक्त उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में कुछ ऐसा ही अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है! इस मेगा ट्रक को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। फिलहाल यह ट्रक चंदौली में रुका हुआ है और आगे के रूट क्लेरेंस का इंतजार कर रहा है।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर 308 पहियों वाला यह मेगा ट्रक आ कहां से रहा है? इसे जाना कहां है? यह कौन-कौन से रास्तों से होकर गुजरा, अब तक इसमें कितना डीजल फूंक दिया गया और सबसे जरूरी बात इस भारी-भरकम मशीन का असली काम क्या है? आइए, इस मेगा ट्रक की पूरी सफरनामा और इससे जुड़े हर एक दिलचस्प फैक्ट के बारे में विस्तार से जानते हैं।

कहां से आई है 200 टन वजनी मशीन?
200 टन वजनी यह औद्योगिक वेसल यूरोपीय देश बेल्जियम से समुद्री रास्ते से भारत आया है। यह वेसल बेल्जियम के एंटवर्प बंदरगाह से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचा। इसके बाद इसे विशेष हाइड्रोलिक ट्रक के जरिये सड़क मार्ग से बलरामपुर स्थित चीनी मिल लाया जा रहा है।

सोमवार तक ये यह ट्रक बनारस पहुंचा था। मंगलवार सुबह राजातालाब से रिंग रोड चढ़ाते हुए हरहुआ, संदहा होते हुए गाजीपुर के लिए निकाला जाएगा।

रूट क्लेरेंस सबसे बड़ी समस्या
308 पहिए वाले, 100 फीट लंबे और लगभग सात मीटर चौड़े ट्रेलर को निकालने के लिए सड़कें बाधा बनी हुई है। कहीं सड़क की चौड़ाई कम है तो कहीं फूटओवर ब्रिज तो कहीं बिजली के खंभे और होर्डिंग्स समस्या बनी हुई है।

रास्ता साफ करने के लिए लगातार काम चल रहा है यहीं वजह है कि ट्रक अपनी औसत स्पीड से (20 किमी/प्रतिदिन) से कम रस्तार से चल पा रहा है।

किन राज्यों से होकर गुजरा ट्रक?
308 पहियों वाला यह ट्रक ओडिशा के पारादीप पोर्ट से लंबी सड़क यात्रा पर निकला है। ओडिशा के बाद इसने झारखंड,होते हुए बिहार की सीमा में कदम रखा। बिहार के औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर जिलों से होकर गुजरते हुए, इसने नौबतपुर के रास्ते उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में एंट्री ली।

अब चंदौली से आगे बढ़ते हुए यह वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़ और लखीमपुर खीरी समेत यूपी के कई बड़े जिलों को पार करेगा। इसके सफर का आखिरी पड़ाव बलरामपुर शुगर मिल है, जहां इस मशीन को डिलीवर किया जाना है।

किस काम आएगा 200 टन वजनी वेसल?
बेल्जियम से मंगाया गया यह 200 टन वजनी वेसल बलरामपुर चीनी मिल से जुड़े एथनॉल प्लांट में स्थापित किया जाएगा। इस वेसल के अंदर ‘वैक्यूम बॉयलर’ जैसे भारी औद्योगिक उपकरण लगे हैं।

बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (BCML) इस वेसल का इस्तेमाल केवल चीनी उत्पादन तक सीमित न रखकर, गन्ने से एथनॉल जैसे सह-उत्पाद तैयार करने के लिए करेगी।

अब तक इसमें कितना डीजल फूंका गया?
ट्रक चालक के अनुसार अब तक 2 करोड़ का डीजल की खपत हो चुकी है। ट्रक के ड्राइवर ने बताया कि रोजाना 200 लीटर डीजल की खपत हो रही है। संभावना है कि आने वाले नवरात्र तक यह ट्रक लखीमपुर प्लांट तक पहुंच जाएगा।

308 पहिए वाले ट्रक की खासियत
200 टन वजनी, 100 फीट लंबे और 7 मीटर चौड़े विशाल वेसल को सड़क मार्ग से लखीमपुर खीरी स्थित बलरामपुर चीनी मिल तक पहुंचाने के लिए 308 पहियों वाले एक विशेष हैवी-ड्यूटी ट्रक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

जेएम बक्शी ग्रुप द्वारा संचालित इस परिवहन कार्य में स्वीडिश ऑटोमोबाइल दिग्गज वोल्वो का Volvo FH16 ट्रक मॉडल लगाया गया है।

100 टन से अधिक भार सहने के लिए डिजाइन किया गया यह ट्रक 600 से 780 HP की जबरदस्त इंजन क्षमता और लगभग 3800 Nm का प्रचंड टॉर्क पैदा करता है, जो सैकड़ों टन वजन के सिंगल-यूनिट वेसल का भार 308 पहियों में समान रूप से विभाजित करके बिना किसी रुकावट के खींचने में सक्षम है।

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नेपाल में एक और त्रासदी: हिमलुंग हिमाल बेस कैंप में अचानक हिमस्खलन, 10 लोग लापता https://livehalchal.com/%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%bf/683516 Sun, 27 Sep 2026 10:23:38 +0000 https://livehalchal.com/?p=683516 नेपाल के पश्चिमी हिस्से में तिब्बत की सीमा के पास स्थित हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप में रविवार सुबह भीषण हिमस्खलन हुआ। इस हादसे के बाद कम से कम 10 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों में अलग-अलग पर्वतारोहण अभियानों से जुड़े लोग शामिल हैं। अभियान आयोजकों के मुताबिक, दो …]]>

नेपाल के पश्चिमी हिस्से में तिब्बत की सीमा के पास स्थित हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप में रविवार सुबह भीषण हिमस्खलन हुआ। इस हादसे के बाद कम से कम 10 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों में अलग-अलग पर्वतारोहण अभियानों से जुड़े लोग शामिल हैं। अभियान आयोजकों के मुताबिक, दो लापता लोग रसोई में काम करने वाले कर्मचारी हैं। इलाके में पिछले कई दिनों से भारी बर्फबारी हो रही थी और खराब मौसम के कारण पर्वतारोहण अभियान पहले ही मुश्किल हो गए थे।

हिमलुंग हिमाल में आखिर क्या हुआ?
अभियान आयोजक मिंगमा ग्यालजे शेरपा के मुताबिक, हिमस्खलन रविवार सुबह आया। उन्होंने बताया कि उनके रसोई कर्मचारियों में से दो लोग भी लापता हैं। पिछले सप्ताह मौसम को लेकर चेतावनी जारी होने के बाद पर्वतारोहण दल और रस्सी लगाने वाली टीमें पहाड़ की ढलानों से नीचे लौट आई थीं। हालांकि, कुछ लोग वहां रुक गए थे। रविवार को आए हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद कम से कम 10 लोगों के लापता होने की जानकारी मिली है। ये सभी लोग अलग-अलग अभियान कंपनियों से जुड़े हुए थे।

क्या कई दिनों से लगातार हो रही थी बर्फबारी?
हिमलुंग हिमाल क्षेत्र में पिछले कई दिनों से भारी बर्फबारी हो रही थी। खराब मौसम के कारण पर्वतारोहियों को शरद ऋतु में होने वाली चढ़ाई से पीछे हटना पड़ा था। लगातार बारिश और बर्फबारी ने नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हालात और मुश्किल कर दिए हैं। मौसम बिगड़ने के बाद पर्यटन अधिकारियों ने ट्रेकिंग और पर्वतारोहण गतिविधियों को रोकने की सलाह दी है। पर्यटन विभाग ने भी लोगों को मौसम साफ होने तक पर्यटन गतिविधियां स्थगित रखने को कहा है।

कितने मीटर ऊंचा है हिमलुंग हिमाल?
हिमलुंग हिमाल की ऊंचाई 7,126 मीटर है और यह नेपाल के मनांग जिले में स्थित है। ऊंचाई पर पर्वतारोहण का अनुभव हासिल करने वाले पर्वतारोहियों के बीच यह चोटी काफी लोकप्रिय है। हालांकि, यहां पहुंचना आसान नहीं है। हिमलुंग हिमाल क्षेत्र में हेलीकॉप्टर उड़ाने के लिए अतिरिक्त अनुमति की जरूरत होती है। ऐसे में किसी हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान चलाना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। लापता लोगों की तलाश के बीच खराब मौसम इस चुनौती को और बढ़ा रहा है।

नेपाल में क्यों बिगड़े हैं मौसम के हालात?
बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने मौसम तंत्र का असर नेपाल के कई हिस्सों में दिखाई दे रहा है। पहाड़ों में भारी बर्फबारी हो रही है, जबकि पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार बारिश हो रही है। शुक्रवार से खराब मौसम के कारण नेपाल में कई जगह सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने कुछ सड़कों को यातायात के लिए बंद भी किया है। लगातार बारिश और बर्फबारी के कारण कई ट्रेकिंग मार्ग प्रभावित हुए हैं और मनास्लू तथा धौलागिरी जैसे पहाड़ों पर प्रमुख पर्वतारोहण अभियानों को रद्द या स्थगित करना पड़ा है।

पिछले महीने आई बाढ़ के बाद अब हिमस्खलन की मार?
नेपाल अभी पिछले महीने आई विनाशकारी बाढ़ के असर से भी जूझ रहा है। रसुवा में आई बाढ़ में 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और 5000 से अधिक लोग लापता बताए गए थे। त्रिशूली नदी के किनारे बसे कई इलाकों को बाढ़ ने तबाह कर दिया था। इस आपदा का असर नेपाल के पर्यटन क्षेत्र पर भी पड़ा। अब लगातार बारिश और बर्फबारी ने ट्रेकिंग मार्गों और पर्वतारोहण गतिविधियों को प्रभावित कर दिया है। ऐसे में हिमलुंग हिमाल में हुआ हिमस्खलन नेपाल के लिए एक और गंभीर चुनौती बन गया है।

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भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना इतना आसान नहीं… https://livehalchal.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%95/683513 Sun, 27 Sep 2026 09:57:42 +0000 https://livehalchal.com/?p=683513 भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाना इतना आसान नहीं है और सरकार भी चाहे तो सीधे तौर पर सीईसी को नहीं हटा सकती। ऐसा इसलिए है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जजों की तरह ही विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं। सीईसी को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। निर्वाचन आयोग (ECI) …]]>

भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाना इतना आसान नहीं है और सरकार भी चाहे तो सीधे तौर पर सीईसी को नहीं हटा सकती। ऐसा इसलिए है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जजों की तरह ही विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं।

सीईसी को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज में सरकार के सीधे दखल को रोकने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। आजाद भारत के इतिहास में कभी भी किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से नहीं हटाया गया है। हालांकि, इसकी कोशिशें तो हुईं लेकिन ऐसा हो न सका। आइए पीछे के पन्नों को पलटकर देखते हैं…

1992… टीएन शेषन के खिलाफ मांग
1992 में वामपंथी दलों ने तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को हटाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। यह कोशिश किसी औपचारिक प्रस्ताव के रूप में आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि इसे पेश करने के लिए जरूरी संसदीय समर्थन नहीं मिल पाया।

2006… चुनाव आयुक्त नवीन चावला के खिलाफ एनडीए की याचिका
मार्च 2006 में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) ने राष्ट्रपति को याचिका देकर चुनाव आयुर्त नवीन चावला को हटाने की मांग की।

2009… नवीन चावला के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश
2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने पक्षपातपूर्ण व्यवहार और राजनीतिक झुकाव के आरोपों का हवाला देते हुए चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की औपचारिक सिफारिश की। बाद में तत्कालीन यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) सरकार ने इस सिफारिश को खारिज कर दिया।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया
सीईसी को हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से उन संवैधानिक प्रावधानों के तहत होती है जो चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।

अनुच्छेद 324(5)

संविधान का अनुच्छेद 324(5) यह तय करता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से केवल उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है।

अनुच्छेद 124(4)

अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जज को तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक कि राष्ट्रपति का आदेश न हो। यह आदेश संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद ही जारी किया जा सकता है। इस प्रस्ताव के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित तथा वोट देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत का समर्थन जरूरी है।

साथ ही, यह प्रस्ताव उसी सत्र में राष्ट्रपति को सौंपा जाना चाहिए और यह साबित होना चाहिए कि जज ने दुर्व्यवहार किया है या वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ है।

सीईसी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने और उसे पूरा करने के काम में पांच अलग-अलग चरण शामिल हैं।

पहला चरण… नोटिस जमा करना

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए राज्यसभा के चेयरमैन या लोकसभा के स्पीकर को एक औपचारिक नोटिस दिया जाता है। इस नोटिस को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सदस्य या राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्य का समर्थन जरूरी है।

दूसरा चरण… जांच समिति का गठन

अगर नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है तो पीठासीन अधिकारी हटाने के खास आधारों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक खास समिति बनाता है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज या चीफ जस्टिस, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और पीठासीन अधिकारी की राय में कानून के एक जाने-माने जानकार शामिल होने चाहिए।

तीसरा चरण… जांच और रिपोर्टिंग

गठित समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी औपचारिक जांच रिपोर्ट चेयरमैन या स्पीकर को सौंपती है।

चौथा चरण… संसदीय वोटिंग

अगर जांच समिति मुख्य चुनाव आयुक्त को साबित हो चुके दुर्व्यवहार या अक्षमता का दोषी पाती है तो मामले को वोटिंग के लिए संसद में लाया जाता है। इस प्रस्ताव को पास करने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत होती है-

सदन के कुल सदस्यों के बहुमत का समर्थन और दोनों सदनों में मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई का बहुमत।

पांचवां चरण… राष्ट्रपति का आदेश

अगर हटाने का बिल या प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों से सफलतापूर्वक पास हो जाता है तो इसे राष्ट्रपति के सामने पेश किया जाता है। इसके बाद राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का आधिकारिक आदेश जारी करते हैं।

संसद में मौजूदा संख्या-बल
मौजूदा संसदीय समीकरणों के तहत संसद के दोनों सदनों में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करना किसी भी एक विपक्षी गुट के लिए एक ऐसी गणितीय बाधा है जिसे पार करना नामुमकिन है।

क्यों है असंभव?
लोकसभा में 360 का आंकड़ा छूने के लिए विपक्ष की मौजूदा कुल संख्या से कहीं ज्यादा सीटों की जरूरत है। अगर हम बीजेपी की 240 सीटों को भी हटा दें तो सिर्फ 300 सदस्य ही बचते हैं। इसलिए 360 तक पहुंचना मुमकिन नहीं है।

इसी तरह राज्यसभा में 162 के आंकड़े तक पहुंचना गणितीय रूप से सीमित है। अगर हम बीजेपी की 116 सीटों को भी हटा दें तो सिर्फ 127 गैर-बीजेपी सदस्य बचते हैं। डीएमके (22 लोकसभा, 8 राज्यसभा) को विपक्षी गठबंधन इंडी के बजाय अन्य की श्रेणी में रखा गया है।

ऐसे में सवाल उठता है कि संख्याबल में कमी के बावजूद विपक्ष हटाने का प्रस्ताव क्यों ला रहा है?

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‘शक्ति की सप्तधारा से विकसित भारत का निर्माण’, पीएम मोदी ने सेवा संकल्प यात्रा के युवाओं से किया संवाद https://livehalchal.com/%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b8/683463 Thu, 24 Sep 2026 10:36:56 +0000 https://livehalchal.com/?p=683463 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘सेवा संकल्प यात्रा’ के प्रतिभागियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने विकसित भारत 204 से लेकर युवाओं तक, कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। बता दें कि सेवा संकल्प यात्रा प्रधानमंत्री के जन्मस्थान वडनगर से शुरू होकर उनके सांसदी क्षेत्र वाराणसी तक पहुंच रही …]]>

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘सेवा संकल्प यात्रा’ के प्रतिभागियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने विकसित भारत 204 से लेकर युवाओं तक, कई अहम मुद्दों पर बातचीत की।

बता दें कि सेवा संकल्प यात्रा प्रधानमंत्री के जन्मस्थान वडनगर से शुरू होकर उनके सांसदी क्षेत्र वाराणसी तक पहुंच रही है। इसी बात को मद्देनजर रखते हुए पीएम मोदी ने युवाओं के सेवा कार्यों की सराहना की और ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया।

शक्ति की सप्तधारा का किया जिक्र
संवाद के दौरान पीएम मोदी ने शक्ति की सप्तधारा से विकसित भारत के निर्माण पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि आप सभी को एक और काम करना है। इस वर्ष लाल किले से शक्ति की जिन सप्तधाराओं की चर्चा मैंने की है, उनके विषय में भी आपको लोगों से बात करनी है।

पीएम मोदी ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग की धारा, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की धारा, कनेक्टिविटी की धारा जैसी 7 धाराएं विकसित भारत के निर्माण की बहुत बड़ी ऊर्जा बनेगी। इस ऊर्जा को हर नागरिक से ही गति मिलेगी।

पीएम मोदी ने की युवाओं की यात्रा की सराहना?
पीएम मोदी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी विकसित भारत की निर्माता भी है और यही पीढ़ी एक बड़ी लाभार्थी भी होगी। उन्होंने कहा कि इस दायित्व को निभाने के लिए भारत को जमीन पर जानना, समझना, देश की हर बारीकियों को अनुभव करना जरूरी है।

इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों, सामाजिक वर्गों से मिलना, उनके सपनों से परिचित होना, उनकी आकांक्षाओं को समझना, उनकी बातों को जानना। ये सारी बातें बहुत जरूरी हैं और इसमें सेवा संकल्प यात्रा निश्चित रूप से आपके जीवन में अहम भूमिका निभाने वाली है।

सेवा की हमारा मकसद कार्य- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि सेवा ही हमारा मुख्य मकसद होना चाहिए और सेवा करते-करते ही सेवा का संदेश देना है, कोई उपदेश नहीं देना है। हम सेवा करके ही सेवा का संदेश देंगे, शब्दों में नहीं देंगे।

पीएम ने आगे इस बात पर जोर दिया कि हमारे आचरण से ही लोगों को पता चले कि राजनीति में सत्ता कितनी ही बड़ी क्यों न हो जाए, लेकिन हमारा मार्ग सेवा का ही रहेगा। हम कभी भी सेवा के मार्ग से विचलित नहीं होंगे। कितने ही ऊंचे शिखर पर पहुंचेंगे, लेकिन ‘सेवा परमो धर्म:’ के भाव को लेकर ही आगे बढ़ेंगे।

‘सेवा भाव से बदली देश की तस्वीर’
पीएम ने कहा कि जब राजनीति से ऊपर उठकर ‘सेवा की भावना’ आती है, तो मुफ्त अनाज योजना और ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाएं जन्म लेती हैं। इसी सेवा भाव के दम पर देश में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया और 4 करोड़ गरीबों को पक्के घर दिए गए।

विकसित भारत 2047 और युवा शक्ति पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि साल 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने में आज की युवा पीढ़ी ही सबसे बड़ी निर्माता और लाभार्थी है। इसके लिए देश के गांवों, अलग-अलग क्षेत्रों और समाज के हर वर्ग की आकांक्षाओं को जमीन पर जाकर समझना बेहद जरूरी है।

झाबुआ गांव का किया जिक्र
संवाद में पीएम मोदी ने झाबुआ के एक गांव में ‘मोदी फालिया’ नामकरण का जिक्र करते हुए युवाओं के सेवा भाव और जनभागीदारी के इस अनूठे अभियान की खुलकर सराहना की।

साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि एक तरफ वडनगर उन्हें हटकेश्वर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त उनकी जन्मभूमि है, तो दूसरी तरफ काशी बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद वाली उनकी कर्मभूमि है। इन दोनों ऐतिहासिक शहरों को जोड़ने वाला यह सेवा अभियान बहुत ही सराहनीय है।

सोशल मीडिया पर नजर रखते हैं पीएम
पीएम मोदी ने कहा कि वे सोशल मीडिया पर इस यात्रा से जुड़े वीडियो और तस्वीरें लगातार देखते हैं। युवाओं और विशेषकर युवा बेटियों को इस बड़े और साहसिक अभियान में जुटे देखकर उन्हें बेहद खुशी और प्रेरणा मिलती है।

पीएम मोदी ने अपने पुराने दिनों को किया याद
संवाद के दौरान पीएम मोदी ने अपने संगठन के दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि मैंने खुद कई यात्राओं का आयोजन और नेतृत्व किया है। वे मौसम की मार और बदलती जरूरतों जैसी चुनौतियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं, इसलिए वे युवाओं के संघर्ष और जज्बे को भली-भांति समझ सकते हैं।

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