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	<title>बड़ीखबर &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>बड़ीखबर &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>दुनिया का सबसे बड़ा बांध बना रहा चीन, असम से लेकर अरुणाचल प्रदेश पर क्या होगा असर?</title>
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		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 11:50:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बांध]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="349" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-25-1024x578.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-25-1024x578.jpg 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-25-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-25-768x433.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-25.jpg 1115w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />चीन ने दुनिया के सबसे बड़े पनबिजली बांध का निर्माण शुरू कर दिया है। यह बांध तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी के निचले हिस्से पर बनाया जा रहा है। यह एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है जो अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सिर्फ 50 किलोमीटर दूर है। भारत देगा चीन को जवाबचीनी बांध के जवाब में, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="349" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-25-1024x578.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-25-1024x578.jpg 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-25-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-25-768x433.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-25.jpg 1115w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>चीन ने दुनिया के सबसे बड़े पनबिजली बांध का निर्माण शुरू कर दिया है। यह बांध तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी के निचले हिस्से पर बनाया जा रहा है। यह एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है जो अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सिर्फ 50 किलोमीटर दूर है।</p>



<p><strong>भारत देगा चीन को जवाब<br></strong>चीनी बांध के जवाब में, भारत &#8216;सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट&#8217; (SUMP) को आगे बढ़ा रहा है। यह अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग और सियांग जिलों में सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,000 मेगावाट का पनबिजली और बाढ़-नियंत्रण वाला मेगा-बांध है।</p>



<p>सरकारी कंपनी NHPC द्वारा संचालित SUMP, अगर बन जाता है, तो भारत का सबसे बड़ा पनबिजली प्रोजेक्ट होगा। इससे सालाना लगभग 47 अरब यूनिट बिजली पैदा होने का अनुमान है और इसकी अनुमानित लागत लगभग 13 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये) होगी।</p>



<p><strong>भारत के सामने बड़ी चुनौती<br></strong>भारत और चीन दोनों के प्रोजेक्ट्स की तुलना करें तो भारत के सामने एक बड़ी चुनौती साफ नजर आ रही है। एक तरफ जहां चीन का 60,000 मेगावाट का मेडोग पनबिजली प्रोजेक्ट पहले से ही बन रहा है, वहीं SUMP अभी भी शुरुआती चरण में है और निर्माण से पहले की तैयारी भी अभी तक शुरू नहीं हुई है।</p>



<p>ऐसी खबरें हैं कि चीन का प्रस्तावित प्रोजेक्ट SUMP की क्षमता से कहीं ज्यादा बड़ा है। भारत अब अपनी रणनीतिक प्रतिक्रिया को तेज करने की कोशिश कर रहा है और साथ ही विवादित नदी पर बीजिंग की हर हरकत पर बारीकी से नजर रख रहा है।</p>



<p><strong>असम-अरुणाचल प्रदेश पर पड़ेगा असर<br></strong>यारलुंग त्सांगपो नदी, जो भारत में सियांग नदी के रूप में प्रवेश करती है और बाद में ब्रह्मपुत्र बन जाती है, अरुणाचल प्रदेश और असम में लाखों लोगों के लिए जीवन रेखा है।</p>



<p>विशेषज्ञों का कहना है कि नदी के ऊपरी हिस्से में इतने बड़े पैमाने पर बांध बनने से पानी का बहाव पूरी तरह बदल सकता है। स्थानीय इकोसिस्टम बर्बाद हो सकता है, खेती पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके साथ ही निचले इलाकों में भयानक और अप्रत्याशित बाढ़ आ सकती है।</p>



<p>लोकसभा में एक औपचारिक लिखित जवाब में, केंद्र सरकार ने पुष्टि करते हुए बताया &#8216;ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन से जुड़ी सभी गतिविधियों, जिसमें पनबिजली के लिए चीन की योजनाएं भी शामिल हैं, पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।&#8217;</p>



<p>सरकार ने निचले इलाकों में लोगों की जान और आजीविका की सुरक्षा के लिए जरूरी एहतियाती और सुधारात्मक उपाय करने का वादा भी किया।</p>
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		<title> 20 हजार करोड़ के दांव से भारत बनेगा का लॉजिस्टिक्स किंग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:48:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ग्रेट निकोबार परियोजना]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="342" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-57.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-57.jpg 805w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-57-300x166.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-57-768x426.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />ग्रेट निकोबार परियोजना को भारत के समुद्री व्यापार और रणनीतिक शक्ति के लिए अहम माना जा रहा है। 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल भविष्य में 21 मिलियन टीईयू क्षमता तक पहुंच सकता है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल डी.के. जोशी ने गुरुवार को ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="342" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-57.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-57.jpg 805w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-57-300x166.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-57-768x426.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>ग्रेट निकोबार परियोजना को भारत के समुद्री व्यापार और रणनीतिक शक्ति के लिए अहम माना जा रहा है। 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल भविष्य में 21 मिलियन टीईयू क्षमता तक पहुंच सकता है।</p>



<p>अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल डी.के. जोशी ने गुरुवार को ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर पीटीआई से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना भारत के समुद्री व्यापार के लिए गेम-चेंजर साबित होगी और अंडमान-निकोबार को हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करेगी। जोशी की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, परियोजना अब पहले दौर में प्रवेश करने जा रही है और इसका प्रमुख हिस्सा इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT) देश के समुद्री व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देगा।</p>



<p><strong>‘तीन साल में पूरा होगा पहला चरण’<br></strong>उपराज्यपाल जोशी के मुताबिक, ‘पहले चरण में यह टर्मिनल लगभग 6 मिलियन टीईयू (TEU) कार्गो क्षमता संभालने में सक्षम होगा और इसे बनाने पर करीब 20,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी और कार्य शुरू होने के तीन वर्षों के भीतर इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अंतिम चरण में इसकी क्षमता बढ़कर 21 मिलियन टीईयू तक पहुंच सकती है, जिससे यह न केवल भारत बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सबसे बड़े कंटेनर बंदरगाहों में शामिल हो जाएगा। बता दें कि टीईयू कंटेनर जहाजों की कार्गो क्षमता और बंदरगाहों की माल ढुलाई क्षमता मापने की मानकीकृत इकाई है।</p>



<p><strong>पीपीपी मॉ़डल के तहत तैयार किया जा रहा प्रोजेक्ट<br></strong>ग्रेट निकोबार की मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थिति का उल्लेख करते हुए जोशी ने कहा कि यह बंदरगाह वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर एक प्रमुख ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में उभर सकता है। अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक-निजी भागीदारी पीपीपी मॉडल के तहत विकसित की जा रही इस परियोजना में बंदरगाह आधारित विकास के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और आदिवासी समुदायों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जाएगा।</p>



<p><strong>एयरपोर्ट और सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मिलेगा विस्तार<br></strong>बंदरगाह के साथ एक ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी कम से कम एक रनवे के अगले तीन वर्षों में चालू होने की उम्मीद है। इसके अलावा, कैंपबेल बे स्थित नौसैनिक एयर स्टेशन आईएनएस बाज की मौजूदा रनवे को लगभग तीन किलोमीटर तक विस्तारित किया जा रहा है, ताकि बड़े विमानों का संचालन संभव हो सके।</p>



<p><strong>‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मिलेगी नई गति<br></strong>जोशी ने कहा कि ये सभी पहल भारत के ‘विकसित भारत’ के व्यापक लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेंगी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की आर्थिक एवं रणनीतिक महत्ता को मजबूत करेंगी।<br>उन्होंने द्वीप समूह में चल रही अन्य पहलों का भी जिक्र किया, जिनमें कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ कौशल विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन के लिए हुए समझौते शामिल हैं। इनका उद्देश्य जहाज मरम्मत क्षमताओं को बढ़ाना है।</p>



<p><strong>‘जहाज मरम्मत और निर्माण केंद्र के रूप में विकसित होगा क्षेत्र’<br></strong>जोशी ने बताया कि स्वराज द्वीप (पूर्व में हैवलॉक द्वीप) के निकट पोर्ट मीडोज में प्रस्तावित शिप-टू-शिप ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल तथा डिगलीपुर के पास अटलांटा बे में प्रस्तावित गहरे पानी के बहुउद्देश्यीय बंदरगाह जैसी परियोजनाएं ग्रेट निकोबार परियोजना को और मजबूती प्रदान करेंगी। उन्होंने कहा, ‘इन विकास कार्यों के साथ अंडमान सागर में अगले पांच वर्षों के दौरान जहाजरानी गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इससे यह क्षेत्र पहले जहाज मरम्मत केंद्र और बाद में जहाज निर्माण केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।’ वहीं, अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न परियोजनाओं को लेकर कई अध्ययन जारी हैं और आने वाले वर्षों में इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।</p>



<p><strong>प्रोजेक्ट पर कांग्रेस ने जताई है आपत्ति<br></strong>हालांकि, ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर कुछ पक्षों ने पर्यावरण संबंधी चिंताएं भी जताई हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इस परियोजना से पारिस्थितिक तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचेगा और बड़ी संख्या में प्रवाल (कोरल) कॉलोनियों का विनाश हो सकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>आईपीए और अनुवादिनी ए.आई. के बीच समझौता, पत्तन क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को मिलेगी नई गति</title>
		<link>https://livehalchal.com/ipa/676001</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 05:43:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय पत्तन संघ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="438" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-20.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-20.jpg 796w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-20-300x213.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-20-768x544.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />भारतीय पत्तन संघ (आई.पी.ए.) और अनुवादिनी ए.आई. ने भारत के पत्तन क्षेत्र में डिजिटल बदलाव को गति देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए. एक ऐतिहासिक समझौता जो देश भर में स्मार्ट, प्रौद्योगिकी-संचालित बंदरगाहों की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता हैडिजिटल नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, भारतीय पत्तन संघ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="438" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-20.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-20.jpg 796w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-20-300x213.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/1-20-768x544.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>भारतीय पत्तन संघ (आई.पी.ए.) और अनुवादिनी ए.आई. ने भारत के पत्तन क्षेत्र में डिजिटल बदलाव को गति देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए. एक ऐतिहासिक समझौता जो देश भर में स्मार्ट, प्रौद्योगिकी-संचालित बंदरगाहों की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है<br>डिजिटल नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, भारतीय पत्तन संघ (आई.पी.ए.) और अनुवादिनी ए.आई. ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो प्रौद्योगिकी की शक्ति के माध्यम से भारत के पत्तन क्षेत्र को रूपांतरित करने में सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत है।</p>



<p>यह समझौता ज्ञापन भारतीय पत्तन संघ के प्रबंध निदेशक श्री विकास नरवाल, आई.ए.एस., और अनुवादिनी ए.आई. के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बुद्धा चंद्रशेखर के बीच हस्ताक्षरित हुआ। यह साझेदारी आई.पी.ए. की संस्थागत मजबूती और अनुवादिनी ए.आई. की तकनीकी विशेषज्ञता को एक साथ लाकर स्मार्ट बंदरगाह संचालन के एक नए युग की शुरुआत करती है।</p>



<p>इस समझौते की शर्तों के अनुसार, दोनों संगठन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.), बिजनेस इंटेलिजेंस (बी.आई.), डिजिटल इंटेलिजेंस (डी.आई.) और उन्नत अनुवाद प्रौद्योगिकियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इस साझेदारी में भारत के पत्तन क्षेत्र के लिए विशेष रूप से तैयार प्रशिक्षण कार्यक्रम, सलाहकार सेवाएं और व्यापक डिजिटल रूपांतरण पहलें भी शामिल होंगी।</p>



<p>इस अवसर पर बोलते हुए, भारतीय पत्तन संघ (आई.पी.ए.) के प्रबंध निदेशक श्री विकास नरवाल, आई.ए.एस. ने कहा, “यह समझौता ज्ञापन भारत के बंदरगाहों के आधुनिकीकरण के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अनुवादिनी ए.आई. के साथ साझेदारी करके, हम एक कुशल, बुद्धिमान और भविष्य के लिए तैयार पत्तन तंत्र के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम उठा रहे हैं।”</p>



<p>अनुवादिनी ए.आई. के सीईओ डॉ. बुद्धा चंद्रशेखर ने इस सहयोग पर अपना उत्साह व्यक्त करते हुए कहा, “भारतीय पत्तन संघ के साथ इस परिवर्तनकारी यात्रा में साझेदार बनकर हम सम्मानित महसूस कर रहे हैं। अनुवादिनी ए.आई. भारतीय बंदरगाहों की परिचालन क्षमताओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए ए.आई. और डिजिटल प्रौद्योगिकियों की सर्वोत्तम क्षमताओं का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।”</p>



<p>भारतीय पत्तन संघ (आई.पी.ए.) भारत के सभी प्रमुख बंदरगाहों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक शीर्ष संस्था है। इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से, आई.पी.ए. और अनुवादिनी ए.आई. का लक्ष्य ऐसे समाधान विकसित करना और लागू करना है जो न केवल बंदरगाह की कार्यक्षमता और कार्गो प्रबंधन में सुधार करेंगे, बल्कि उन्नत अनुवाद प्रौद्योगिकियों के माध्यम से भाषा और संवाद की बाधाओं को भी दूर करेंगे, जो एक बहुभाषी और विविधतापूर्ण समुद्री परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण कारक है।</p>



<p>यह सहयोग भारत के वैश्विक समुद्री केंद्र बनने के दृष्टिकोण को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जो राष्ट्रीय समुद्री विकास कार्यक्रम और डिजिटल इंडिया के व्यापक एजेंडे के अनुरूप है।</p>



<p><strong>भारतीय पत्तन संघ (आई.पी.ए.) के बारे में<br></strong>भारतीय पत्तन संघ भारत सरकार द्वारा स्थापित एक शीर्ष संस्था है जो सभी प्रमुख बंदरगाहों के लिए एक साझा मंच के रूप में कार्य करती है। आई.पी.ए. भारत के प्रमुख पत्तन ट्रस्टों में शोध, विकास और नीति समन्वय को सुगम बनाती है, तथा समुद्री क्षेत्र में परिचालन उत्कृष्टता और सतत विकास की दिशा में कार्य करती है।</p>



<p><strong>अनुवादिनी ए.आई. के बारे में<br></strong>अनुवादिनी ए.आई. एक प्रौद्योगिकी-संचालित संगठन है जो ए.आई. अनुवाद प्रौद्योगिकियों और डिजिटल रूपांतरण समाधानों पर केंद्रित है। यह फाउंडेशन समावेशी और कुशल विकास के लिए डिजिटल उपकरणों की क्षमता का उपयोग करने हेतु सरकारी निकायों, संस्थानों और उद्योगों के साथ काम करता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>जी7 शिखर सम्मेलन: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यों पकड़ा पीएम मोदी का हाथ? </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:37:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[जी7 शिखर सम्मेलन]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54.jpg 810w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54-300x171.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54-768x439.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैमिली फोटो में हिस्सा लिया, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीढ़ियां चढ़ते समय उनका हाथ पकड़ा। भारत-अमेरिका के बीच आज द्विपक्षीय बैठक की संभावना है। जी7 शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54.jpg 810w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54-300x171.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-54-768x439.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैमिली फोटो में हिस्सा लिया, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीढ़ियां चढ़ते समय उनका हाथ पकड़ा। भारत-अमेरिका के बीच आज द्विपक्षीय बैठक की संभावना है।</p>



<p>जी7 शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज यानी 17 जून को द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। इस द्विपक्षीय बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य और अमेरिका से ऊर्जा आयात जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को लेकर उत्सुक हैं और दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत हो सकती है।</p>



<p>सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में है। वार्ताएं लगातार आगे बढ़ रही हैं और आने वाले कुछ सप्ताह में इस समझौते पर काम पूरा होने की उम्मीद है। दोनों देशों ने लगभग एक वर्ष तक चली बातचीत के बाद फरवरी में एक अंतरिम व्यापार समझौता किया था। व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की है कि पीएम मोदी और ट्रंप की बैठक में प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।</p>



<p><strong>आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?<br></strong>इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान ‘नई साझेदारियां बनाने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर मजबूत करने’ विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक आपस में जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर हो गई है। ऐसे में यह विषय और भी अहम हो जाता है। लेकिन कोई भी साझेदारी तभी सफल हो सकती है, जब उसकी नींव भरोसे पर टिकी हो।</p>



<p>उन्होंने कहा, आपसी भरोसा आज सबसे अहम रणनीतिक संपत्ति है। लेकिन दुख की बात है कि आज दुनिया में संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि भरोसे की कमी है और हमारे साझेदारियों का भविष्य इसी भरोसे को फिर से बनाने पर निर्भर करता है।</p>



<p>प्रधानमंत्री ने कहा, भारत में हम दुनिया को एक परिवार के रूप में देखते हैं। हमारा अनुभव बताता है कि विकास तभी सबसे प्रभावी होता है, जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा होता है। इसी सिद्धांत पर हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां आधारित हैं, जैसे अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा सहनशील अवसंरचना गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, मिशन लाइफ और ‘एक पेड़ मां के नाम’।</p>
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		<title>राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी 20 जून को ओडिशा दौरे पर, संताली पवित्र स्थल पर करेंगे पूजा-अर्चना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:15:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-20.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-20.jpg 819w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-20-300x168.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-20-768x430.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को ओडिशा के मयूरभंज जिले में संताली समुदाय के पवित्र स्थल ‘गोसानी’ में पूजा-अर्चना करेंगे। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति मुर्मू के ससुराल वालों के पैतृक गांव पहाड़पुर का दौरा करेंगे। इसके साथ ही राष्ट्रपति के 68वें जन्मदिन पर पारंपरिक संताली अनुष्ठानों में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-20.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-20.jpg 819w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-20-300x168.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/5-20-768x430.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को ओडिशा के मयूरभंज जिले में संताली समुदाय के पवित्र स्थल ‘गोसानी’ में पूजा-अर्चना करेंगे। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति मुर्मू के ससुराल वालों के पैतृक गांव पहाड़पुर का दौरा करेंगे। इसके साथ ही राष्ट्रपति के 68वें जन्मदिन पर पारंपरिक संताली अनुष्ठानों में भाग लेंगे।</p>



<p><strong>क्या है पूरा कार्यक्रम?<br></strong>उस दिन दोपहर के आसपास मोदी के पहाड़पुर के हेलीपैड पर उतरने और फिर गोसानी जाने की उम्मीद है, जहां वे और मुर्मू प्रार्थना करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री के दौरे से एक दिन पहले, 19 जून को राष्ट्रपति के पास के रायरांगपुर पहुंचने का कार्यक्रम है। पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित और संताली भाषा की शोधकर्ता दमयंती बेशरा के अनुसार, गोसानी एक पूजनीय ग्राम देवता और पूर्वजों की आत्माओं तथा सामुदायिक नेताओं के आध्यात्मिक संरक्षकों का स्थान है।</p>



<p>उन्होंने कहा, ‘संताली लोग नए उद्यम शुरू करने और लंबी यात्राओं से सुरक्षित लौटने की खुशी में गोसानी में मत्था टेकते हैं।’ संताली रीति-रिवाजों के अनुसार, गोसानी परिसर में प्रवेश करने वाले आगंतुक पारंपरिक संताली पोशाक पहनते हैं। यहां तक कि परिसर में आने वाले वर्दीधारी रक्षाकर्मी भी प्रार्थना करने से पहले संताली वस्त्र ओढ़ते हैं।</p>



<p><strong>गोसानी स्थल का क्या है महत्व<br></strong>बेशरा ने कहा कि गोसानी स्थल आम तौर पर या तो गांव के केंद्र में या संताली बस्तियों के प्रवेश द्वार पर स्थित होते हैं और आदिवासी समुदाय के लिए इनका गहरा धार्मिक महत्व है। गोसानी की यात्रा के बाद, मोदी द्वारा मुर्मू के पति और दो बेटों को समर्पित स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने और ग्रामीणों से बातचीत करने की भी उम्मीद है।</p>



<p><strong>मीडिया के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध<br></strong>इस बीच, सरकार ने दोनों नेताओं के दौरे के दौरान गांव में मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। पत्रकारों को भेजे गए एक संदेश में, जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी (डीआई एंड पीआरओ) ने मीडियाकर्मियों से अनुरोध किया कि वे यात्रा के दौरान गांव में न जाएं और न ही प्रवेश करें। इसमें कहा गया है कि जिला खुफिया ब्यूरो की सिफारिशों के बाद यह प्रतिबंध लगाया गया था। इसमें आगे कहा गया है, ‘प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सभी प्रतिनिधियों से अनुरोध है कि वे इस प्रतिबंध पर ध्यान दें और वीवीआईपी यात्रा के सुचारू संचालन और सुरक्षा प्रोटोकॉल के रखरखाव को सुनिश्चित करने में अपना सहयोग दें।’</p>



<p>अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन ने प्रमुख क्षेत्रों को ड्रोन और हवाई उड़ान निषेध क्षेत्र घोषित कर दिया है और यात्रा से पहले व्यापक सुरक्षा उपाय किए हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों के लिए लगभग 5,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। मुर्मू और मोदी के रायरांगपुर में ओडिशा में भाजपा सरकार की दूसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल होने का कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने मंगलवार को इस यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार की चूक को रोकने का निर्देश दिया।</p>
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